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क्यों दवाओं पर ट्रंप का नया आदेश भारत के लिए बना मुसीबत?

दवा पर चीन को झटका देने की ट्रंप की कोशिश भारत पर भी असर डाल सकती है

दवा पर चीन को झटका देने की ट्रंप की कोशिश भारत पर भी असर डाल सकती है

अमेरिका (America) में बिकने वाली हर तीसरी दवा भारत की होती है. ऐसे में अमेरिका का खुद दवाएं बनाना भारत के लिए परेशानी ला सकता है.

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    हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American president Donald Trump) ने एक ऑर्डर साइन किया. इसके तहत उनके अपने देश में ही जरूरी और क्रिटिकल दवाओं के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा. अमेरिका फर्स्ट को बढ़ावा देने वाला ये कदम हालांकि भारत के लिए कुछ खास बेहतर नहीं हो सकेगा. बता दें कि भारत अमेरिका में दवाओं के सबसे बड़े सप्लायर्स में से है. ऐसे में हमारे यहां की दवा इंडस्ट्री पर क्या असर हो सकता है, जानिए.

    क्या कहता है ट्रंप का ऑर्डर?
    गुरुवार, 6 अगस्त को ट्रंप ने एक वर्चुअल मीटिंग में सारे विभागों से दवा निर्माण की कमजोर कड़ी की पहचान करने को कहा. साथ ही सारी जरूरी दवाओं की लिस्ट बनाने और उनके लिए जल्दी से जल्दी क्लीयरेंस लेने को कहा गया ताकि दवाएं देश में ही तैयार हो सकें. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक फेडरल कंपनियों को इस तरह से काम करना है कि उत्पादन की प्रक्रिया के दौरान कीमत भी न बढ़े और न ही दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़े. साथ ही साथ इस बात का खास ध्यान रखना है कि दवाओं के निर्माण के दौरान कोरोना वायरस से फिलहाल चल रही लड़ाई भी प्रभावित न हो.

    अमेरिका में जरूरी और क्रिटिकल दवाओं के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


    किसलिए उठाया गया कदम?
    दूसरे कई विकसित देशों की तरह अमेरिका भी दवाओं के लिए भारत और चीन जैसे देशों पर निर्भर करता है. कोरोना वायरस महामारी के दौरान अमेरिका की विकासशील देशों पर ये निर्भरता खुलकर सामने आई, जो उसे अखर रही है. जैसे चीन के हुबई को ही लें तो उसके लॉकडाउन में रहने के कारण अमेरिका और खुद भारत में भी कई दवाओं की कमी होने लगी. इसमें पैरासिटामोल जैसी बेसिक दवाएं भी शामिल थीं. हुबई के लॉकडाउन में अपना स्टॉक बचाए रखने के लिए भारत ने लगभग 13 दवाओं का आयात बंद कर दिया ताकि देश में दवाओं की कमी न हो.

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    इसी बीच जब ट्रंप ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना की चमत्कारी दवा कहा, तब सामने आया कि भारत ही इसका सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है. माना जा रहा है कि इसी दौरान दवाओं के मामले में अमेरिका की भारत या चीन जैसे देशों पर निर्भरता खुलकर सामने आई.

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    माना जा रहा है कि इन्हीं हालातों को देखने के बाद इस बात की जरूरत सामने आई कि अमेरिका को भी अपने लिए दवाएं बनानी चाहिए. यही वजह है कि अब अमेरिका न केवल एसेंशियल ड्रग्स, बल्कि कई दूसरी दवाएं भी बनाने पर जोर दे रहा है. ट्रंप का नया ऑर्डर इसी बात को लेकर है.

    दवाओं के मामले में अमेरिका की भारत या चीन जैसे देशों पर निर्भरता खुलकर सामने आई-सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


    अब जानते हैं कि अमेरिका एक दवा बाजार के तौर पर देश के लिए कितना जरूरी है. भारत की सबसे ज्यादा दवाएं अमेरिका ही आयात होती हैं. कहा जाता है कि वहां बिकने वाली हर तीसरी दवा यहीं से बनकर जाती है.

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    फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (PHARMEXCIL) के मुताबिक भारत से दवाओं के आयात की सालाना लागत लगभग 6 डॉलर बिलियन है. यहां की जेनेरिक दवाएं कम कीमत और अच्छी गुणवत्ता के कारण अमेरिका में हाथोंहाथ ली जाती हैं.

    ट्रंप का आदेश देशी दवा निर्माण पर क्या असर डालेगा?
    वैसे तो ट्रंप का आदेश किसी एक देश के चलते नहीं है लेकिन अमेरिका दवा कंपनियों का मानना है कि मूल तौर पर चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए ट्रंप ने ऐसा फैसला लिया. हालांकि भारत पर भी इसका असर तो पड़ेगा, लेकिन उतना नहीं होगा.

    मूल तौर पर चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए ट्रंप ने ऐसा फैसला लिया


    इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में PHARMEXCIL के चेयरमैन दिनेश दुआ कहते हैं कि इसका एक बड़ा कारण यह है कि भारतीय दवाएं "बड़े पैमाने पर" अमेरिकी सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में शामिल नहीं हैं.

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    चूंकि अमेरिका वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन का सदस्य है, इसलिए इसके तहत वो भारत को सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में शामिल नहीं करता है. इससे भारत को फायदा हो सकता है. साथ ही ट्रंप के आदेश से भारत के दवा आयात पर असर न होने का एक और कारण भी है. ऑर्डर में कई छूटें हैं, जिनके दायरे में देश आता है. हालांकि आशंका जताई जा रही है कि लंबे वक्त में जब अमेरिका अपनी दवाएं ज्यादा बनाने लगेगा तो भारत के दवा उद्योग को नुकसान हो सकता है, जो सबसे ज्यादा मात्रा में वहीं दवाएं निर्यात करती हैं.

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