कोरोना टेस्ट के लिए नमूने लेने का आया नया तरीका, जानिए क्या हैं इसके फायदे

कोरोना टेस्ट के लिए नमूने लेने का आया नया तरीका, जानिए क्या हैं इसके फायदे
गुजरात में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

अभी तक कोरोना वायरस (Corona Virus) की जांच के लिए जिस तरीके से नमूना लिया जाता है, वह काफी परेशानियों भरा है, लेकिन नई तकनीक से यह प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2020, 4:17 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus) को मात देने के लिए दुनिया भर में शोध चल रहा है. इसके प्रसार को रोकने के लिए भी कई चुनौतियां सामने हैं. लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे तरीकों पर जोर तो दिया जा ही जा रहा है, लेकिन व्यापक और तेज टेस्टिंग भी एक कड़ी चुनौती के साथ एक बड़ी जरूरत भी है. टेस्टिंग (Testing) की भी अपनी चुनौतियां हैं. ऐसे में जांच का एक नया और प्रभावी तरीका सामने आया है.

कोरोना वायरस के नए रूप सार्स कोव-2 के टेस्टिंग में जो पहले तरीका उपयोग में लाया जाता था. उसके नतीजे दो दिन में आते थे, वहीं कुछ टेस्ट के नतीजे दो घंटों में आ जाने का दावा किया गया. लेकिन किसी भी टेस्ट के आने में समय कई बातों पर निर्भर करता है. इनमें नमूने को जांच वाली लैब तक पहुंचने का समय भी शामिल है. वहीं नमूने लेने का तरीका भी कितना सुरक्षित और परेशानियों भरा है यह भी सवाल है.

क्या है नमूने लेने का नया तरीका
अभी तक हो रही जांचों में स्वाब को मरीज के गले में डाल कर नमूना लिया जाता है. लेकिन अब मरीज की लार को ही नमूने के तौर पर लेना ज्यादा सुरक्षित और आसान तरीका हो सकता है. अभी तक कोरोना वायरस के लिए जो टेस्ट लिए जाते हैं, उसमें एक लंबे स्वैब से मरीज के गले के अंदर से नमूना लिया जाता है. नेचर की खबर के अनुसार स्वैब का एक वैकल्पिक तरीका नमूने लेने संबंधी कई समस्याओं का हल हो सकता है.



Corona
कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में टेस्ट की अहम भूमिका है.




क्यों दिक्कत भरा है पुराना तरीका
आमतौर पर स्वाब से नमूने लेने में बहुत सी परेशानियां हैं. एक तो स्वैब से नमूने लेने में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि नमूने लेते समय  मरीज के खांसने या छींकने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. कई बार कुछ जगह पर स्वाब की कमी भी हो जाती है.

क्या पाया गया शोध में
कनेक्टिकट के येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ न्यू हेवन की ऐने वाइली और उनके साथियों ने कोविड-19 मरीजों से सलाइवा और गले से नमूने लिए. उनकी टीम ने गले के स्वाब नमूनों में वायरस नहीं पाया, लेकिन उन्हीं मरीजों के सलाइवा नमूनों में वायरस उपस्थित पाया.

स्वाब से नमूना लेना उतना प्रभावी नहीं
दो स्वास्थ्य कर्मी जो अच्छा महसूस कर रहे थे, यानी जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं दिख रहे थे उनके गले के नमूनों की जांच नकारात्मक आई, लेकिन उनकी सलाइवा टेस्टिंग में वे पॉजिटिव पाए गए. यानी वास्तव में वे सक्रमित थे.

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.कोरोना वायरस को लेकर इलाज और वैक्सीन के अलावा टेस्टिंग पर भी शोध हो रहे हैं.


इलाज और वैक्सीन में लग रहा है समय
दरअसल कोरोना वायरस के इलाज और वैक्सीन की खोज में अभी समय लग सकता है. ऐसे में कोरोना संक्रमण से बचाव ही इस महामारी को टालने का एक कारगर उपाय हो सकता है. इसमें संक्रमण के फैलाव को रोकना प्राथमिकता मानी जा रही है.

टेस्ट हो गया है संवेदनशील मामला
लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की बहुत अहमियत है लेकिन इसका प्रभावी होना तभी संभव है जब कोरोना संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान हो. इसी लिए टेस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है. टेस्टिंग में भी कई चुनौतियां रही हैं.

पहले समय पर नतीजे आने की समस्या तो थी तो वह अब हल होती दिख रही है, लेकिन नमूने हासिल करना चुनौतीपूर्ण काम था. सलाइवा (लार) से नमूना हासिल करना इसे आसान बना सकता है.

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