कैसा है चीन सीमा से महज 60 किमी दूर बना सिक्किम एयरपोर्ट

सिक्किम में देश का सौवां अापरेशनल एयरपोर्ट काम करना शुरू कर रहा है. सामरिक तौर पर भी ये खासा अहम एयरपोर्ट है

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2018, 4:00 PM IST
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चीनी सीमा से महज 60 किलोमीटर की दूरी पर भारत ने एक एयरपोर्ट बना लिया है. ये सिक्किम का पहला एयरपोर्ट है. राजधानी गंगटोक से 35 किलोमीटर दूर. पहाड़ों के बीच हराभरा एयरपोर्ट. देश के पांच सबसे ऊंचे हवाईअड्डों में एक. इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. देश के लिए ये इसलिए भी खास है, क्योंकि इसके साथ ही भारत ने एयरपोर्ट की सेंचुरी भी लगा ली.

इस एयरपोर्ट का नाम पाक्योंग है. वर्ष 2009 में इसकी आधारशिला रखी गई थी. नौ साल बाद अब ये बनकर तैयार है. हालांकि ये प्रोजेक्ट और पहले भी शुरू हो सकता था लेकिन भूमि अधिग्रहण संबंधी दिक्कतों के कारण इसमें कुछ देर हुई. 04 अक्टूबर को स्पाइट जेट का 78 सीट वाला प्लेन यहां से पहली कामर्शियल फ्लाइट भरेगा.

एयरपोर्ट की खास बातें
- ये एयरपोर्ट चीन सीमा के सबसे करीब है, लिहाजा भारत के लिए रणनीतिक तौर पर भी काफी काम आएगा.



- ये समुद्र से 4500 फुट ऊंचाई पर है. देश के पांच सबसे ऊंचे एयरपोर्ट्स में एक है


- इस एयरपोर्ट पर 605 करोड़ की लागत आई है
- एयरपोर्ट का रनवे 1.75 मीटर का है, जिसकी चौड़ाई 30 मीटर है.
- इस एयरपोर्ट की बिल्डिंग 80 मीटर ऊंची है, जो दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में है.
- एयरपोर्ट का कुल परिसर 990 एकड़ में फैला हुआ है.

सिक्किम एय़रपोर्ट देश के सबसे ऊंचे पांच हवाईअड्डों में एक है


इससे क्या फायदा होगा
- पहले गंगटोक के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए 124 किमी दूर बागडोगरा जाना होता है. अब उन्हें इससे निजात मिल जाएगा. साथ ही इस एयरपोर्ट के बनने से सिक्किम के टूरिज्म, आर्थिक विकास को बल मिलेगा. सिक्किम अकेला ऐसा राज्य था, जिसके पास अपना कोई एयरपोर्ट भी नहीं था. अब इस राज्य के पास भी अपना एयरपोर्ट हो गया. जो देश का सौवां अापरेशनल हवाई अड्डा है.



एयरपोर्ट परिसर में क्या क्या है
- एटीसी टॉवर
- पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग
- 80 वाहनों की पार्किंग
- 3000 वर्ग मीटर में फैली टर्मिनल बिल्डिंग

किसने इस एयरपोर्ट को बनाया है
- पुंज लॉयड ग्रुप को इसे बनाने का ठेका मिला था. इसकी पूरी संरचना और सुविधाओं को पूरी तरह उसी ने बनाया है. वर्ष 2009 में इसे मंजूरी जरूर मिल गई लेकिन इस पर वर्ष 2012 से काम शुरू होना था लेकिन जनवरी 2014 में स्थानीय लोगों के आंदोलन के कारण इसका काम रोक दिया गया. जब गांव वालों को अधिग्रहण का बाकी धन दिया गया, उसके बाद अक्टूबर 2014 से काम पूरी तरह शुरू हो पाया.
- जुलाई 2015 में फिर विरोध शुरू हो गया. जिसकी वजह से इसमें रनवे का काम दो बार करना पड़ा. इससे इसकी लागत में भी बढोतरी हुई.
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क्या है एयरपोर्ट की क्षमता
- इसके 1.75 मीटर लंबे रनवे के साथ 116 मीटर का टैक्सीवे है, जिससे इस हवाई पट्टी पर एक ही समय में दो विमान उतारे जा सकते हैं.
- एयरपोर्ट की क्षमता सौ यात्रियों की है
- रनवे की लाइट्स हाई इंटेसिटी हैं
- एयरपोर्ट को कामर्शियल आपरेशंस का लाइसेंस इस साल मार्च में ही मिल चुका है

सामरिक दृष्टि से भी ये भारत के लिए खासा अहम हवाई अड्डा है


सैन्य क्षमता को क्या फायदा मिलेगा
चूंकि ये एयरपोर्ट भारत-चीन सीमा से केवल 60 किलोमीटर दूर है. लिहाजा रणनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण है. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि भारतीय वायु सेना जरूरत पड़ने पर यहां पर अपने कुछ विमान उतार सकेगी.

हालांकि इस बात को लेकर एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर उड्डयन मंत्रालय और गृह मंत्रालय में विवाद की स्थिति भी बनी. गृह मंत्रालय चाहता था कि एयरपोर्ट की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल संभाले जबकि उड्डयन मंत्रालय स्थानीय पुलिस सुरक्षा के पक्ष में था. आखिरकार सिक्किम पुलिस ही यहां की सुरक्षा का काम देखेगी.
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