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जानिए जेफ बेजोस की कंपनी Blue Origin के नए स्पेस स्टेशन के बारे में

जानिए जेफ बेजोस की कंपनी Blue Origin के नए स्पेस स्टेशन के बारे में

यह दुनिया का पहले निजी क्षेत्र का स्पेस स्टेशन (Space station) होगा. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

यह दुनिया का पहले निजी क्षेत्र का स्पेस स्टेशन (Space station) होगा. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा अब अमेरिका (USA)  में निजी क्षेत्र में भी दिखने जा रही है. अमेरिका के निजी क्षेत्र में अंतरिक्ष पर्यटन की शुरुआत हो चुकी है. अब प्रतिस्पर्धा का एक और रूप देखने को मिलने वाला है. एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स से तगड़ी प्रतिस्पर्धा झेल रही जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन अब अपना एक स्पेस स्टेशन बनाने की राह पर है. पृथ्वी की निचली कक्षा में ऑर्बिटल रीफ (Orbital Reef) नाम के इस स्पेस स्टेशन (Space Station) का लक्ष्य एक माइक्रोग्रेविटी का माहौल प्रदान करना है. कंपनी का कहना है कि यह आउटपोस्ट भविष्य के लिए एक व्यवसायिक मॉडल की तरह काम करेगा.

    अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में निजी क्षेत्र भी
    पिछले कुछ समय से जब भी चीन अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित कोई नई गतिविधि करता था, तो इसे चीन अमेरिका प्रतिद्वंदता और नई अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा के तौर देखा जाता था. लेकिन अमेरिका का निजी क्षेत्र इसमें अपनी एक बड़ी उपस्थिति दर्ज कराता दिख रहा है. यानि अब इसमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एकाधिकार नहीं रहेगा.

    मिश्रित उपयोग वाला व्यवसायिक पार्क
    ब्लू ओरिजिन का कहना है कि ऑर्बिटल रीफ एक मिश्रित उपयोग वाला व्यवसायिक पार्क होगा.  इसे शोध, उद्योग,अंतरराष्ट्रीय और व्यवसायिक ग्राहकों के ले उपयोग में लाया जाएगा. और ब्लू ओरिजन अंतरिक्ष परिवहन, लॉजिस्टिक्स, आवास, उपकरण रखाव और संचालन क्रियाओं के लिए इसका उपयोग करेगा.

    क्या होगा ब्लू ओरिजिन का योगदान
    अपने बयान में कंपनी ने कहा कि ऑर्बिटल रीफ वह सारी जरूरी आधारभूत संरचनाएं प्रदान करेगा जिससे अंतरिक्ष में आर्थिक गतिविधि बढ़ सके और नए बाजार खुल सकें. पुनर्उपयोगी अंतरिक्ष परिवहन, स्मार्ट डिजाइन, आधुनिक स्वचालन और प्रचालन तंत्र, सभी परंपरागत अंतरिक्ष ऑपरेटर्स के लिए लागत को कम करने के साथ ही जटिलताएं भी कम करेंगे.

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    ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) के स्पेस स्टेशन में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का सहयोग होगा. (तस्वीर: Blue Origin)

    वैश्विक स्तर का सहयोग
    कंपनी का कहना है कि स्पेस स्टेशन की विभिन्न कंपनियों  वैश्विक सहयोग से बनाया जाएगा. ब्लूओरिजिन यूटिलिटी सिस्टम, विशाल व्यास के कोर मॉड्यूल, नए ग्लेन लॉन्च सिस्टम, प्रदान करेगा. इसके अलावा सिएरा स्पेस लार्ज इंटीग्रेटेड फ्लेक्सीबल एनवायर्नमेंट (LIFE) मॉड्यूल, नोड मॉड्यूल, और क्रू और सामान को लाने ले जाने के लिए रनवे लैडिंग ड्रीम चेजर स्पेस प्लेन डिजाइन करेगा.

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    बोइंग से लेकर एरिजोना यूनिवर्सिटी
    इसके अलावा बोइंग स्टेशन के लिए साइंस मॉड्यूल डिजाइन करने केसाथ स्पेस स्टेशन के कार्य, रखरखाव, और स्टारलाइनर क्रू स्पेसक्राफ्ट प्रदान करना भी सुनिश्चित करेगा. रेडवायर स्पेस माइक्रोग्रेविटी शोध, विकास और निर्माण, पेलोड कार्य, आदि प्रदान करेगा. जेनेसिसि इंजीनियरिंग सॉल्यूशन्स एक व्यक्ति वाला स्पेसक्राफ्ट को डिजाइन और निर्मित करेगा. वहीं एरीजोना स्टेट यूनिवर्सिटी शोधकार्य सेवा आदि के लिए यूनिवर्सटी के वैश्विक समूह की अगुआई करेगा.

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    ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) का स्पेस स्टेशन आईएसएस के बाद अमेरिका केलिए खाली स्थान भर सकता है. (तस्वीर: Blue Origin)

    क्या अमेरिकी उपस्थिति कायम रहेगी
    अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका को पहले ही चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है. चीन खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बना रहा है, जब अमेरिका की भागीदारी वाला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कुछ ही सालों में कभी भी बंद हो सकता है. ऐसे में अमेरिका में चिंता जताई जा रही थी कि कहीं अंतरिक्ष में अमेरिकी उपस्थिति खत्म तो नहीं हो जाएगी. ऐसे में ब्लू ओरिजिन उस खाली स्थान को भर सकता है जो आईएसएस के बंद होने पर बनेगा.

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    एक ओर जहां रूस भी अपना खुद का स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष भेजने की तैयारी में है. आज दुनिया की अंतरिक्ष शक्तियां अपने दूसरे देशों के रूप में साझेदार भी खोज रही हैं. अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया,  न्यूजीलैंड, जापान, जैसे कई देश जोड़े हैं. तो रूस और चीन ने चंद्रमा पर भी रिसर्च स्टेशन के लिए गठजोड़ किया है. कई यूरोपीय कंपनियां अंतरिक्ष में कई नवाचारों के साथ सामने आ रही हैं. इस माहौल में ब्लू ओरिजिन एक आयाम दे सकता है.

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