Home /News /knowledge /

नए सफेद बौने ने तोड़ा सबसे तेजी से घूमने का रिकॉर्ड

नए सफेद बौने ने तोड़ा सबसे तेजी से घूमने का रिकॉर्ड

इससे पहले इतनी तेजी से घूमने वाला सफेद बौना (White Dwarf) दिखाई नहीं दिया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

इससे पहले इतनी तेजी से घूमने वाला सफेद बौना (White Dwarf) दिखाई नहीं दिया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

सफेद बौने (White Dwarf) की नई खोज में वैज्ञानिकों ने ऐसा पिंड खोजा है जो अपना खुद का एक चक्कर (Rotation of Star) 25 सेकेंड के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लेता है. यह अनोखी खोज वार्विक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है. इस सफेद बौने तारे का नाम उन्होंने LAMOST J024048.51+195226.9 रखा है जिसे संक्षेप में J0240+1952 भी कहा जाता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह अब तक का खोजा गया सबसे तेज गति से घूमने वाला तारा (Star) है. इतना ही नहीं यह एक बड़े तारे के बहुत पास स्थित है. जिसका पदार्थ भी खींच कर निगल रहा है.

अधिक पढ़ें ...

    तारों (Stars) का भी एक जीवन चक्र होता है. इस चक्र में वे कई तरह पिंडों का निर्माण करते हैं जिसमें न्यूट्रॉन तारे और ब्लैकहोल जैसे पिंड भी शामिल है. लेकिन खत्म होते तारे जिन्हें सफेद बौने (White Dwarf) कहा जाता है. तारों के जीवन चक्र का ज्यादा प्रमुख हिस्सा होते हैं. बहुत मुश्किल से दिखाई देने वाले सफेद बौने भी कई बार अपनी प्रक्रियाओं से खगोलविदों को हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक बौना वैज्ञानिकों को मिला है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि अब तक का खोजा गया ब्रह्माण्ड (Universe) का सबसे तेजी से घूमने वाला सफेद बौना है.

    पृथ्वी जितना बड़ा पर बहुत ही भारी
    खगोलविदों ने इस बौने की घूमने की गति 25 सेकंड बताई गई है यानि यह खुद का ही एक चक्कर 25 सेकंड में लगा लेता है.  इस तारे का आकार तो पृथ्वी की ही तरह है, लेकिन इसका भार पृथ्वी से 2 लाख गुना ज्यादा है जिससे यह एक छोटा घना पिंड हो गया है. इस तारे का नाम वैज्ञानिकों ने LAMOST J024048.51+195226.9 दिया है जिसे वे संक्षेप में J0240+1952 कहते हैं.

    क्या होते हैं ये सफेद बौने
    सफेद बौने तुलनात्मक रूप से ठंडे और सुगठित तारे होते हैं जो अपने जीवनकाल के अंत के बहुत निकट पहुंच चुके होते हैं. खुद हमारा सूर्य भी 5 अरब साल बाद इस अवस्था में पहुंच जाएगा. लेकिन यह सफेद बौना अपने बुढ़ापे वाले सालों में बहुत तीव्र ऊर्जा से घूम रहा है. खगोलभौतिकविदों की टीम ने इस बौने की घूर्णन गति के साथ कुछ और भी विशेषताओं का पता लगाया है.

    भारी मात्रा होने पर ही ऐसा घूर्णन संभव
    मंथली नेटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी: लैटार्स में प्रकाशित हुआ है. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और वार्वरीक यूनिवर्सिटी के खगोलभौतिकविद इनग्रिड पेलिसोली ने अपनी प्रेस रिलीज  का कहना है कि जब तक लोग J0240+1952 के बारे में  पढ़ेंगे, तब तक वह अपने कई चक्कर लगा चुका होगा. इसका घूर्णन इतना तेज है कि सफेद बौने के पास इतना पदार्थ जरूर होगा जिससे वह खुद ही तार तार ना हो जाए.

    Space, Stars, White Dwarf, White Dwarf Rotation, Gravitation pull, Rotation of Star, Star life Cycle, Siphoning matter,

    सफेद बौना (White Dwarf) मरते हुए तारे की आखिरी अवस्था होती है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    इससे पहले खोजे गए बौने से कितना तेज
    पहली नजर में यह सफेद बौना अजीब नजर नहीं आता, ऐसा लगता है कि कोई कंचा हर 25 सेकेंड में खुद का चक्कर लगा रहा है. वहीं इससे पहले खोजे गए सबसे तेज घूमने वाले सफेद बौने की गति 29 सेकेंड ही थी. जबकि J0240+1952 इस पिंड से 20 प्रतिशत तेज गति से घूम रहा है.

    भारतीय खगोलविदों ने खोजे सूर्य से भी ज्यादा गर्म 8 दुर्लभ तारे

    और ये खासियतें भी
    घूर्णन के अलावा J0240+1952 की खासियत इसकी स्थति है जो एक विशाल साथी तारे के बहुत पास है. इसका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव साथी तारे से पादर्थ साइफन की तरह खींच लेता है और इसकी मैग्नेटिक फील्ड इससे पदार्थ बहुत तेजी से फैंक रही है. इस लिहाज से J0240+1952 दूसरा ऐसा खोजा गया तारा है जो एक मैग्नेकटिक प्रोपेलर की तरह काम करता है.

    Space, Stars, White Dwarf, White Dwarf Rotation, Gravitation pull, Rotation of Star, Star life Cycle, Siphoning matter,

    सफेद बौना (White Dwarf) एक द्विज तारों के युग्म का हिस्सा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    अनोखी बात नहीं कि
    शोधकर्ताओं का कहना है कि वे जानते हैं कि यह कोई बहुत अनोखी बात नहीं है. यह इस बात को स्थापित करता है कि अगर हालात अनुकूल हों तो  मैग्नेटिक प्रोपेलर प्रणाली इस तरह के द्विजों के मूल गुण होती है यह वैज्ञानिकों को एक और आंकड़ों  का स्रोत देता है जिससे अंतरिक्ष में चुंबकीय पिंडों को समझने में सहायता मिल सकती है.

    Electric Propulsion इंजन बनाएंगे अंतरिक्ष यानों का सफर आसान, जानिए कैसे

    तारों की सफेद बौनों जैसी स्थिति तभी बनती है जब इनका अपने नाभकीय ईंधन खत्म हो जाता  है इनका बाहरी पदार्थ बाहर फिंका जाता है और केवल क्रोड़ ही रह जाता है.  जहां का भी तापमान 99 हजार डिग्री तक होता है. नासा का कहना है कि इस तरह के पिंड के भार सूर्य के आधे होते हैं लेकिन आकार पृथ्वी से कुछ ही बड़ा होता है जैसा कि J0240+1952 के साथ है.

    Tags: Research, Science, Space, Stars

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर