क्या है न्यूजीलैंड का जलवायु परिवर्तन कानून, जिसे अपनाने से डरते हैं दूसरे देश

न्यूजीलैंड (New Zealand) ऐसा कानून लागू करने वाला पहला ऐसा देश बन जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

न्यूजीलैंड (New Zealand) ऐसा कानून लागू करने वाला पहला ऐसा देश बन जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

न्यूजीलैंड (New Zealand) पहला ऐसा देश है जो वित्तीय क्षेत्र (Finance Sector) के लिए जलवायु परिवर्तन (Climate Change) संबंधी कानून बना रहा है. ऐसा अब तक दुनिया में कोई भी देश नहीं कर सका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 1:03 PM IST
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के लिए दुनिया के लगभग सभी देश पेरिस समझौते से बंधे हैं. इसके बाद भी पर्यावरणविदों को लगता है कि यह काफी नहीं है क्योंकि  दुनिया का कोई देश अपने यहां उद्योगों के लिए सख्त कानून लागू नहीं कर रहा है जिससे उनकी गतिविधियां पर्यावरण (Environment) पर बुरा प्रभाव डालना बंद कर दें. ऐसा नहीं है देशों में पर्यावरण के कानून नहीं हैं, लेकिन वे बहुत लचर हैं और नाकाफी है. अब न्यूजीलैंड (New Zealand) ने जलवायु परिवर्तन के लिए ऐसा कानून बनाया है जो वित्तीय क्षेत्रों को पर्यावरण के लिए जवाबदेह बना सकेगा.

क्या है यह कानून

न्यूजीलैंड अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए यह आवश्यक करेगा कि वे अपने द्वारा किए निवेश के जलवायु परिवर्तन पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दें. अधिकारियों का मानना है कि यह दुनिया का पहला कानून होगा जो वित्तीय क्षेत्र को पर्यावरण के प्रति जवाबदेह बनाएगा. न्यूजीलैंड के वाणिज्य मंत्री डेविड क्लार्क का कहना है कि कानून के मुताबिक बैंक, बीमा कंपनी और निवेश प्रतिष्ठानों के लिए जलवायु रिपोर्टिंग अब अनिवार्य होगी.

नेतृत्व की मिसाल पेश करने की कोशिश
डेविड क्लार्क का भी कहना है कि दुनिया में इस तरह कानून ला कर न्यूजीलैंड को वास्तविक नेतृत्व दिखाने का मौका मिला है जिससे दूसरे देशों को जलवायु संबंधित खुलासे करने अनिवार्य करने के लिए रास्ता मिलेगा. इससे वित्तीय प्रतिष्ठानों को अपने निवेश के जलवायु पर असर का ध्यान रखना होगा और लोगों को उनका प्रदर्शन आंकने का अवसर भी मिलेगा.

पहले भी बन चुका है कानून लेकिन

वैसे दो दुनिया में कहीं भी राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का कानून नहीं बना है. अमेरिका के कैलिफोर्निया ने साल 2006 में ग्लोबल वार्मिंग सॉल्यूशन्स एक्ट लागू किया था जिसमें बहुत सारे जलवायु परिवर्तन संबंधी बड़े कदम उठाए गए थे. इस कानून का लक्ष्य साल 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के 1990 के स्तर तक ले जाने का था.



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न्यूजीलैंड (New Zealand) में अब वित्तीय प्रतिष्ठानों को अपने निवेश पर क्लाइमेट रिपोर्ट देनी होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


वित्तीय क्षेत्र क्यों

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि दुनिया में अब तक किसी भी देश में इस तरह का कानून लागू करने की पहल नहीं की गई है. वैश्विक पूंजीवादी व्यवस्था में वित्तिय क्षेत्र की कंपनियों और प्रतिष्ठानों का खासा प्रभाव रहता है और उनके निवेश ही औद्योगिक गतिविधियों को दिशा प्रदान करते हैं. ऐसे में यह एक साहसिक कदम माना जा रहा है.

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यह फायदा होगा इस कानून से

यह कानून अगर पास हो गया तो साल 2023 को लागू हो जाएगा जिसके बाद वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के लिए जलवायु रिपोर्टिंग आनिवार्य हो जाएगी. न्यूजीलैंड के जलवायु परिवर्तन मंत्री जेम्स शॉ ने बताया कि वार्षिक रिपोर्ट इस तथ्य को रेखांकित करेंगी कि उच्च कार्बन निवेश कम आकर्षक हो जाएगा क्योंकि उत्सर्जन को रोकने के ले सख्तियां लागू होने लगेंगी.

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न्यूजीलैंड (New Zealand) ने साल 2050 तक को खुद को शून्य कार्बन उत्सर्जन देश बनाने का लक्ष्य रखा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


वित्तीय क्षेत्र की भूमिका

शॉ का कहना है कि साल 2050 तक के नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तब तक हासिल नहीं किया जा सकता जब तक वित्तीय क्षेत्र यह समझे कि उनके निवेश का जलवायु पर क्या असर हो रहा है. यह कानून वित्तीय और वाणिज्यिक निर्णय लेने में जलवायु जोखिम और लचीलेपन को शामिल करने में मदद करेगा.

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न्यूजीलैंड वैसे तो जलवायु परिवर्तन का बुरी तरह से शिकार देश नहीं माना जाता है, लेकिन फिर भी न्यूजीलैंड को प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न ने यह संकल्प लिया है कि उनका देश साल 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन करने वाला देश बन जाएगा और साल 2035 तक पूरी तरह से अक्षय ऊर्जा के जरिए अपनी ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी करने लगेगा.
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