वे महान लोग, जिन्होंने दशकों पहले भी लॉकडाउन को खुद पर हावी नहीं होने दिया, किये नए आविष्कार

उसी दौर में इस महान गणितज्ञ और भौतकिशास्त्री ने कई ऐसे पेपर लिखे जो प्रकाश (optics) के संबंध में नई दिशा देते थे

उसी दौर में इस महान गणितज्ञ और भौतकिशास्त्री ने कई ऐसे पेपर लिखे जो प्रकाश (optics) के संबंध में नई दिशा देते थे

आइजैक न्यूटन (Isaac Newton), चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin), जॉन मिल्टन (John Milton) और लॉर्ड बायरन (Lord Byron) ने अपने दौर की महामारियों के दौरान लंबा वक्त घर में कैद रहते हुए यानी लॉकडाउन (lockdown) में बिताया. यही वो वक्त था, जिसकी वजह से विज्ञान (science) और कला-साहित्य (art-culture) में नई खोजों हुईं.

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दिसंबर में चीन में पहली बार कोरोना संक्रमण (corona infection in China) फैला. तब वहां के वुहान शहर को लॉकडाउन (lockdown) करके सीमाएं पूरी तरह से सील कर दी गईं. उस दौरान दुनिया में किसी ने सोचा भी नहीं था कि यही हालात लगभग हर जगह होने जा रहे हैं. अब दुनिया की बड़ी आबादी लॉकडाउन में है. इस दौरान डिप्रेशन (depression) की समस्या भी गंभीर होकर सामने आई है. माना जा रहा है कि हालात यही रहे तो बहुत से लोग मानसिक समस्याओं (mental disorders) का शिकार हो जाएंगे. हालांकि ये लॉकडाउन ही है, जिसने न्यूटन, डार्विन और मिल्टन जैसे लोगों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था.

न्यूटन के दौर में भी भी कोरोना की ही तरह एक महामारी फैली थी, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. उस बीमारी का नाम था ग्रेट प्लेग (Great Plague). साल 1665 से पूरे साल चली इस महामारी ने 1 लाख से ज्यादा जानें ली थीं. उस वक्त ये आबादी पूरे लंदन की आबादी का एक चौथाई हिस्सा थी. जिस दौरान लंदन प्लेग की महामारी से जूझ रहा था, तभी न्यूटन की यूनिवर्सिटी (Trinity College) ने भी अपने स्टूडेंट्स को घर भेज दिया ताकि वे सुरक्षित रह सकें. तब न्यूटन की उम्र महज 20 साल थी. घर लौटे हुए न्यूटन ने होम क्वेरेंटाइन के इसी दौर में कई अहम खोजें कीं.

न्यूटन के दौर में भी भी कोरोना की ही तरह एक महामारी फैली थी


वॉशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर बताती है कि ब्रिटेन में प्लेग महामारी फैलने पर जो उपाय अपनाए गए, वे उन तरीकों से बहुत मिलते-जुलते हैं जो आज कोविड-19 के मामले में अपनाए जा रहे हैं. इन्हीं में से एक तरीका था सोशल डिस्टेंसिंग या आइसोलेशन. इसी वक्त न्यूटन भी दूसरे बच्चों की तरह अपने घर Woolsthorpe Manor में थे. उस पूरे साल के दौरान, जब न्यूटन कॉलेज की बजाए अपने घर पर रहे, लगातार कई शोध करते थे. माना जाता है कि उसी दौर में इस महान गणितज्ञ और भौतकिशास्त्री ने कई ऐसे पेपर लिखे जो प्रकाश (optics) के संबंध में एक नई दिशा देते थे. यही वो समय था जब उन्होंने अपने गार्डन में टहलते हुए गुरुत्वाकर्षण के बारे में सोचा था कि इसकी ताकत धरती से एक निश्चित दूरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि काफी ऊपर तक चंद्रमा तक जानी चाहिए. अप्रैल 1667 में न्यूटन कैंब्रिज लौटे और छह महीने बाद ही वे ट्रिनिटी कॉलेज के फैलो चुन लिए गए.
चार्ल्स डार्विन के घर में कैद रहने की वजह महामारी न होकर उनकी अपनी सेहत थी


चार्ल्स डार्विन के घर में कैद रहने की वजह महामारी न होकर उनकी अपनी सेहत थी. क्राइस्ट कॉलेज में पढ़ाने के दौरान उन्हें एकाएक कई बीमारियों हो गईं. इनमें वर्टिगो, उल्टियां होना, थकान और देखने में समस्या जैसे लक्षण शामिल थे. लक्षण गंभीर होने पर उन्हें लंबी छुट्टी लेनी पड़ी. इस दौरान वे पूरी तरह से शोधकार्य में लग गए और कई नई खोजें कीं. सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट (Survival of the fittest) की थ्योरी दे चुके डार्विन ने खुद अपनी जीवनी में इस आइसोलेशन का जिक्र किया है और बताया है कि कैसे घर में बीते इस वक्त ने उन्हें प्रेरणा दी. उनके मुताबिक बीमारी में बीते इसी वक्त ने उन्हें ज्यादा एकाग्र बना दिया था.

ख्यात अंग्रेजी कवि Lord Byron को भी क्वारंटाइन में रहना पड़ा था




ख्यात अंग्रेजी कवि Lord Byron को भी क्वारंटाइन में रहना पड़ा था. ये साल 1811 की बात है, जब वे ग्रीस से लौटे थे, जो कि उस वक्त में कॉलरा की चपेट में आ चुका था. इसके बाद उन्हें नियम के तहत 40 दिन माल्टा द्वीप पर बिताने पड़े. पहले तो बायरन इस बात से डरे हुए थे कि कैसे वे इतने दिन अकेले बिता सकेंगे. उन्हें लगता था कि क्वारंटाइन जैसी बातें गैरजरूरी हैं. हालांकि द्वीप में मिले एकांत ने उनकी रचनात्मकता को नई दिशा दी. इसी दौरान बायरन ने Farewell to Malta जैसी कविता लिखी थी. वैसे द्वीप के उदास मौसम और उदास माहौल पर ये कविता व्यंग्य की शैली में लिखी गई थी लेकिन काफी चर्चित रही.

पढ़ाई से दूर लंदन में क्वारंटाइन में रह रहे मिल्टन ने इसी दौरान अपनी पहली रचना की


अंग्रेजी कवि और दार्शनिक जॉन मिल्टन के साथ भी क्वारंटाइन जैसी घटना हो चुकी है. ये साल 1626 की बात है, जब क्राइस्ट कॉलेज में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट थे. इसी वक्त शहर में जानलेवा ब्यूबॉनिक प्लेग का हमला हुआ. पढ़ाई से दूर लंदन में क्वारंटाइन में रह रहे मिल्टन ने तब पहली रचना की. Elegia Prima नाम से उन्होंने लैटिन में शोकगीत की रचना की. खुद मिल्टन ने अपने करीबी मित्र चार्ल्स डिओडटी से ये लिखते हुए बताया कि उन्हें कैंब्रिज से अलग और स्कूल के शोरगुल से दूर ये वक्त कितना अच्छा लग रहा है.

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