प्लास्टिक की जगह आया जूट का इको फ्रेंडली ग्रीन प्लास्टिक

बांग्लादेश ने जूट फाइबर से प्लास्टिक जैसा बैग बनाया है, जो मिट्टी में दबाने पर पूरी तरह उसमें मिल जाता है, ये पर्यावरण के अनुकूल भी है. दुनियाभर में इसकी डिमांड बढने की उम्मीद है

News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 3:30 PM IST
प्लास्टिक की जगह आया जूट का इको फ्रेंडली ग्रीन प्लास्टिक
जूट का ग्रीन प्लास्टिक बैग
News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 3:30 PM IST
अब जबकि सारे देश या तो प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी ला रहे हैं या फिर उन्हें बिल्कुल ही खत्म कर रहे हैं. ऐसे में बांग्लादेश के एक वैज्ञानिक ने बढिया विकल्प पेश किया है. इसे ग्रीन प्लास्टिक का नाम दिया जा रहा है. ये प्लास्टिक की तरह जूट के फाइबर के जरिए तैयार होगा।
बांग्लादेश दुनिया में भारत के बाद जूट का सबसे बड़ा निर्माता है. इसे एक जमाने में गोल्डेन फाइबर भी कहा जाता था-क्योंकि ये सुनहरे रंग का होता था लेकिन तब इसका दाम भी ज्यादा होता है लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बार धीरे धीरे इसकी चमक फीकी पड़ती चली गई.
अब बांग्लादेश के एक साइंटिस्ट ने जूट के फाइबर को कम कीमत के बॉयोडिग्रेडेबल सेल्यूकोज शीट में बदल दिया है, जिसे जब फेंका जाएगा तो तीन महीने के भीतर ही ये विखंडित होकर पर्यावरण में मिल जाएगा. प्लास्टिक की तरह ये अनग्रेडेबल नहीं होगा.

ये भी पढ़ें - क्यों फिर आर्टिकल 35ए पर मचा है बवाल, क्या इसे हटा सकती है केंद्र सरकार

वायस ऑफ अमेरिका के अनुसार ये खोज बांग्लादेश जूट मिल्स कारपोरेशन के साइंटिफिक एडवाइजर मुबारक अहमद खान ने की है. इन्हीं के नेतृत्व में टीम ने नए किस्म के ग्रीन प्लास्टिक बैग को बनाया है, जिसे बंगाली में सोनाली कहा जा रहा है. उनका कहना है कि जमीन में दबाने के बाद ये बॉयोडिग्रेडेबल हो जाएगा. इसे आराम से रिसाइकल किया जा सकेगा.

बांग्लादेश के वैज्ञानिकों ने जूट के फाइबर से प्लास्टिक जैसी इकोफ्रेंडली


बांग्लादेश अब प्रायोगिक तौर पर रोज इस तरह के 2000 बैग बना रहा है. उसकी योजना इसका कामर्शियल उत्पादन शुरू करने की है. क्योंकि एक ब्रिटिश कंपनी की जापानी फर्म ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है. अक्टूबर में बांग्लादेश और इस जापानी ग्रीन पैकेजिंग फर्म में समझौता होने वाला है.
Loading...

देखने में ये प्लास्टिक जैसा ही है. डैश वैले डॉट कॉम के अनुसार जूट के नए बैग बनाने वाली टीम के मुखिया मुबारक अहद खान का कहना है, "इसके भौतिक गुण लगभग एक जैसे ही हैं."

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इसी साल मार्च में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे लोगों से "गोल्डेन बैग के व्यापक इस्तेमाल को तेज करने में मदद" का अनुरोध किया था. अप्रैल में सरकार ने बांग्लादेश के क्लाइमेट चेंज ट्रस्ट फंड से नौ लाख डॉलर धन भी मुहैया कराया ताकि इन थैलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो सके. बीजेएमसी के जेनरल मैनेजर ममनूर राशिद ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "एक बार प्रोजेक्ट पूरी तरह से चलने लगा तो हम सोनाली बैग को छह महीने के भीतर कारोबारी रूप से बनाने की उम्मीद कर रहे हैं."

यह भी पढ़ें- इन आतंकियों के बच्चों ने की है IIT से पढ़ाई, मल्टीनेशनल कंपनियों में कर रहे हैं काम

उम्मीद की जा रही है कि हर महीने कम से कम एक करोड़ थैले का निर्यात होगा. कारोबारी तौर पर थैले का उत्पादन इस साल के आखिर तक शुरू हो जाएगा.

बांग्लादेश दुनिया में भारत के बाद जूट का दूसरा बड़ा उत्पादक है


बांग्लादेश में प्लास्टिक बैग पर रोक 
बांग्लादेश दुनिया के उन पहले देशों में है जिसने प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाई. 2002 में यह काम स्थानीय जलमार्गों में जमा होने वाली प्लास्टिक को रोकने के लिए किया गया. हालांकि तब इस रोक को बहुत कामयाबी नहीं मिली थी. आज भी बांग्लादेश की राजाधानी ढाका में हर महीने करीब 41 करोड़ प्लास्टिक थैले उपयोग में लाए जा रहे हैं. बूढ़ी गंगा नदी में तीन मीटर की गहराई तक प्लास्टिक कचरे की परत जमा हो गई है.

60 से ज्यादा देशों में रोक 
60 से ज्यादा देशों में प्लास्टिक की थैली के इस्तेमाल पर रोक है. फ्रांस से लेकर चीन तक ने कुछ इलाकों में ही सही यह रोक जरूर लगाई है. बांग्लादेश में प्लास्टिक की थैली पर रोक का विस्तार होने के बाद 100 से ज्यादा बांग्लादेशी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने नए जूट वाले बैग का इस्तेमाल करने की बात कही है.

यह भी पढ़ें- कश्मीर की सियासत में रसूखदार मुफ्ती खानदान की पूरी कहानी
First published: July 29, 2019, 3:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...