खुल गई क्वांट्म कम्प्यूटर से वक्त को पलटने के वैज्ञानिकों के दावे की पोल, जानें क्या है घपला?

MIT के वैज्ञानिकों ने इसे विज्ञान की छवि खराब करने वाला दावा बताया.

News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 4:57 PM IST
खुल गई क्वांट्म कम्प्यूटर से वक्त को पलटने के वैज्ञानिकों के दावे की पोल, जानें क्या है घपला?
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: March 15, 2019, 4:57 PM IST
'एरो ऑफ टाइम एंड इट्स रिवर्सल ऑन द आईबीएम क्वांटम कम्प्यूटर' नाम के रिसर्च पेपर को लिखने वाले वैज्ञानिकों ने वक्त को पलटने और उसे उल्टी दिशा में चलाने को लेकर कई दावे किए थे. दुनिया भर में यह बहुत बड़ी ख़बर बनी. लेकिन दुनिया के सबसे बड़े टैक्नोलॉजी के कॉलेज में से एक MIT की डिजिटल मैग्जीन टेक्नोलॉजी रिव्यू ने इसे समझाने का प्रयास किया है. उन्होंने लिखा है कि अगर आप सोचते हैं कि समझ में न आने वाला यह काम उन्होंने कैसे किया होगा, तो चिंता मत कीजिए, उन्होंने ऐसा कुछ किया भी नहीं है.

मैग्जीन ने लिखा कुछ साधारण भौतिक मॉडल वक्त के हिसाब से काम करते हैं. सूर्य का चक्कर लगाती धरती के बारे में सोचिए, जहां सब कुछ अपने आकार में है. अब इस सिस्टम को आगे बढ़ते हुए देखें और धरती को घड़ी की सुई की दिशा में चक्कर लगाते देखें. दोनों ही सच्चे लगते हैं. या दो बिलियर्ड खेल की गेंदों को टकराते देखें. आप वीडियो के तौर पर इन्हें किसी भी दिशा में चला सकते हैं और यह देखने में सच्चा ही लगेगा.

मैग्जीन कहती है कि लेकिन असली दुनिया ऐसी नहीं है. पहले चीजें जैसी थीं आगे चलकर वे उससे अलग दिखने लगती हैं, वह भी कई तरीकों से और उनमें रहने वाली ऊर्जाओं का स्तर भी बदलता रहता है. यह भौतिक विज्ञान और साधारण समझ दोनों में समझ आने वाली बात है. तो अगर इन वैज्ञानिकों को वक्त को रिवर्स नहीं किया है तो उन्होंने किया क्या है? इस बात को कुछ इस तरह से समझें-



एक वीडियो का रिवाइंड बटन दबाने के बारे में सोचिए. यह भी एक तरह से वक्त को 'पीछे की दिशा में घुमा देता है' इसके जरिए आप कप से गिर चुकी चाय को फिर से चाय में जाता देख सकते हैं. ठीक ऐसी ही बात इस रिसर्च पेपर में भी सामने आती है. इसमें ऐसे ही एक वीडियो के क्वांटम कम्यूटिंग वर्जन की बात की गई है.

MIT की पत्रिका ने लिखा, बस इसमें लेंस का रोल है. वैसे ही लेंस जैसे टेलिस्कोप, माइक्रोस्कोप या नज़र के चश्मों में होते हैं. इन लेंस का इस्तेमाल बिखरी हुई रौशनी को फोकस करने के लिए किया जाता है. इस पेपर को लिखने वाले रिसर्चरों का दावा है कि इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग क्वांटम कम्प्यूटर की टेस्टिंग में किया जा सकेगा. उनकी यह बात बिल्कुल सही है लेकिन यह किसी टाइम मशीन जैसी बात से बहुत कम रोचक है.

ऑस्टिन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के क्वांटम इन्फॉर्मेशन सेंटर के डायरेक्टर स्कॉट आरोन्सन कहते हैं, "अगर आप एक टाइम को उल्टा चलाने वाली प्रक्रिया को अपने कम्प्यूटर पर कर रहे हैं. तो आप 'वक्त की दिशा' भी बदल रहे हैं. उनका इसके बारे में कहना था कि उन्हें समझ नहीं आता कि अगर इस प्रक्रिया को IBM के क्वांटम कम्यूटर पर दोहराया जाए तो इससे क्या फर्क पड़ जाएगा?"

MIT ने इस मुद्दे पर कई लोगों से बात की. उनमें से एक ने कहा, "मुझे नहीं समझ आता यह कितना कारगर होगा? ऐसा नहीं समझ आता कि इन लोगों ने टाइम मशीन बनाई है. उन्होंने थर्मोडाइनेमिक्स या फिजिक्स के नियमों में कोई अंतर नहीं किया है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी बातों से क्वांटम कम्प्यूटर का नाम खराब होगा."
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MIT की पत्रिका ने लिखा है, ऐसी सुर्खियों से न सिर्फ क्वांटम कम्प्यूटिंग की छवि खराब होती है बल्कि ये विज्ञान के लिए भी खतरनाक हैं. वक्त, हम इसे माने या न मानें, अपनी गति से चलता रहता है.

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