चेन्नई में पानी खत्म, अब दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद की बारी

चेन्नई पिछले कुछ दिनों से शहर पानी की एक एक बूंद त्राहि-त्राहि कर रहा है. कई बड़े जुलूस निकल चुके हैं. वहां के चार बड़े पानी के जलाशय सूख चुके हैं. हालांकि इस संकट की स्थिति पर पूरा देश अब बैठा है

  • Share this:
बहुत साल पहले बशीर बद्र का एक शेर काफी लोकप्रिय था, "ये अजीब मिजाज का शहर है, कोई तपाक से हाथ भी नहीं मिलाएगा, जरा फासले से मिला करो..." अगर इसे चेन्नई की मौजूदा हालत से जोड़ें तो कह सकते हैं कि "ये अजीब मिजाज का शहर है, कोई पानी का एक गिलास भी नहीं पिलायेगा..."  चेन्नई में पानी बिल्कुल खत्म हो गया है यानि जीरो ग्राउंडलेवल पर पहुंच गया है. अब ये शहर हर रोज पानी की चिंता के साथ जागता और सोता है.

चेन्नई के इतिहास में पहली बार उसके चारों बड़े जलाशय सूख चुके हैं. कुओं में पानी नहीं है. घरों में पानी नहीं है. तमाम इलाकों के रेस्टोरेंट्स और होटलों पर ताले लटक चुके हैं. आईटी हब कहलाने वाले इस शहर में तमाम कंपनियों ने आफिस बंद कर कर्मचारियों से इसलिए घरों से काम करने को कह दिया है, क्योंकि उनके पास कर्मचारियों के इस्तेमाल के लिए पानी नहीं है. सैकड़ों हास्टल खाली करा लिये गए हैं.

ऐसा इस शहर में कभी नहीं हुआ. इस शहर में पैदा हुए फिल्म स्टार सिद्धार्थ ट्वीट करते हैं, "मैं 1980 में चेन्नई में पैदा हुआ. आजतक ये हालत मैने नहीं देखी." शहर के उम्रदराज लोग पानी के इस अभूतपूर्व संकट से हैरान हैं. शहर में भोर से लेकर देर रात जिधर जाएंगे, वहां बाल्टी, घड़े और केन लिए लोग नजर आएंगे..और जगह-जगह खड़े पानी के टैंकर.



जानें कितनी होती है स्पीकर की सैलरी और मिलती हैं क्या खास सुविधाएं
टैंकर्स अगवा हो रहे हैं
ये खबरें भी आ रही हैं कि शहर में आ रहे टैंकर्स अगवा हो रहे हैं. पानी के लिए रोज-ब-रोज लड़ाइयां हो रही हैं. बहुत से लोगों ने कुछ दिनों के लिए बोरिया बिस्तर बांधकर शहर से निकलने में ही भलाई समझी है.

चेन्नई देश का छठा बड़ा शहर है, वहां की आबादी तकरीबन 46 लाख के आसपास है. चेन्नई के पड़ोसी जिलों से रोज बड़े पैमाने पर टैंकर पानी लेकर वहां आ रहे हैं. एक टैंकर का पानी 6000 से 7000 रुपए या और अधिक का बिक रहा है. शहर में केवल छह लाख लोगों के घरों में ही नल से पानी पहुंचता है, जहां पहुंचता है, वहां अब पानी राशनिंग के साथ तीसरे या चौथे दिन आ रहा है.

चेन्नई में हर ओर अब सुबह से शाम तक यही स्थिति बनी रहती है


भयावह तस्वीर
सबसे बुरा हाल बूढों और बीमारों का है. वो कहां और कैसे पानी लेने जाएं. स्थिति वाकई भयावह है और भयावह भविष्य की ओर संकेत कर रही है. हालांकि लोगों को यकीन है कि मानसून की बारिश सबकुछ ठीक कर देगी, लेकिन हकीकत है कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या ने सारे संतुलन बिगाड़ दिए हैं.

नीति आयोग की रिपोर्ट आगाह करती है, "अगर आज चेन्नई जीरो ग्राउंड लेवल पानी की हालत से गुजर रहा है तो ठीक यही स्थिति एक दो सालों में ही बेंगुलुरु और मुंबई की होने वाली है. उसके बाद दो-तीन सालों ठीक यही हालत दिल्ली और हैदराबाद समेत देश के कई बड़े शहरों की होने वाली है." रिपोर्ट कहती है, "पूरा देश अब पानी के लिहाज से ऐसे मुहाने पर बैठा है, जो अलार्मिंग है. कम से कम आधे देश में अगले एक दशक या उससे पहले ही पानी खतरे की घंटियां बजाने लगेगा.

चेन्नई के आसपास के चारों बड़े जलाशय सूख चुके हैं


पानी के केवल 91 रिजर्व वायर
सूखा भारत की शाश्वत समस्या है. हम पानी के लिए हमेशा मानसून पर ही आश्रित रहते हैं. वाटर मैनेजमेंट या फिर वाटर हार्वेंस्टिंग को लेकर हमारे यहां शायद ही कोई तैयारी दिखती हो. पूरे देश में केवल 91 रिजर्व वायर हैं. ये सभी कई दशक पहले के बने हैं.

कौन हैं बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट, जिन्हें उम्र कैद की सजा हुई

सही बात ये भी है कि ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ती गर्मी और जनसंख्या विस्फोट ने हालत को और खराब किया है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भारत को पानी के मामले में अलार्मिंग स्थिति में रखती है, जहां तेजी से पानी कम हो रहा है.
यूनाइटेड नेशंस की एक ताजातरीन रिपोर्ट ये भी कहती है, "भारत में आबादी अब इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वर्ष 2027 में हम चीन को पीछे छोड़ देंगे. फिर 2050 तक हमारी आबादी 300 मिलियन होगी."

चेन्नई में पानी के टैंकर्स की भीड़ सड़कों के किनारे लगातार लगी रहती है


पानी का उपभोग देशों में
यूनेस्को के वर्ष 2011 के आंकड़े कहते हैं कि चीन की आबादी 150 करोड़ है. वो सालाना 363 ट्रिलियन गैलन पानी का उपभोग करता है. अमेरिका की आबादी 30 करोड़ है और वो सालाना 216 ट्रिलियन पानी का कंजप्शन करता है. वहीं 110 करोड़ की आबादी वाले भारत में इसकी खपत 30 ट्रिलियन गैलन सालाना है.

वाटर स्टोरेज की स्थिति
बांग्लादेश हमारी तुलना में काफी छोटा देश है लेकिन वो भारत की तुलना में आधा पानी स्टोर करने की क्षमता रखता है. भारत की पर कैपिटा स्टोरेज कैपिसिटी अगर 253 क्यूबिक मीटर है तो बांग्लादेश की 141 क्यूबिक मीटर. पाकिस्तान की क्षमता 155 क्यूबिक मीटर है. वहीं कनाडा जैसे देश की क्षमता 25,337 क्यूबिक मीटर है. कनाडा कई उन्नत तरीकों से वाटर हार्वेस्टिंग और स्टोरेज करता है.

कुछ साल पहले ब्राजील में भी पानी का संकट होता था लेकिन अब ये देश वाटर हार्वेस्टिंग में सबसे आगे हैं


वाटर हार्वेस्टिंग में हम कहीं नहीं 
कुछ समय पहले तक ब्राजील भी पानी के संकट से गुजरने वाला देश था, फिर उसने वाटर स्टोरेज और वाटर हार्वेंस्टिंग के तौर तरीके बदले. अब बारिश के पानी को सबसे बेहतर तरीके से इकट्ठा करने में वो सबसे आगे है. इसके बाद सिंगापुर, चीन, जर्मनी और आस्ट्रेलिया जैसे देशों का नंबर हैं, जहां घरों से लेकर
जलाशयों तक में बारिश के पानी का सबसे बेहतरीन उपयोग किया जा रहा है.

चीन में योगा सेलिब्रिटी है ये बच्चा, हर महीने करता है मोटी कमाई
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading