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आखिर क्यों उत्तर कोरिया में है जबरदस्त भ्रष्टाचार

आखिर क्यों उत्तर कोरिया में है जबरदस्त भ्रष्टाचार

मां-बेटे से बात होने के बाद किया ट्रैप

मां-बेटे से बात होने के बाद किया ट्रैप

उत्तर कोरिया (North Korea) में भ्रष्टाचार बहुत ही अधिक है. ट्रांसपरेंसी इंटरनेशन ही हालिया वार्षिक करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (Corruption Perceptions Index) में 20 सालों से वह लगातार आखिरी स्थान पर है. इस देश में भ्रष्टाचार (Corrption) ने एक अगल रूप और अलग सोच की तरह विकसित हो गया है. ऊंचे स्तर पर तो भ्रष्टाचार व्यापक है ही, लेकिन निचने स्तर पर और आम लोगों के लिए यह एक अच्छी सुविधा के तौर पर विकसित हो गया है. यहां अधिकारियों को कम तनख्वाह दी जाती है. इसके अलावा भी कई वजह हैं जिससे यहां भ्रष्टाचार एक अलग स्थिति बनाता है.

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    आमतौर पर लगता है कि तानाशाही जैसे कठोर शासन में भ्रष्टाचार (Corruption) कम होता होगा, ऐसा नहीं हैं. यह सब कुछ व्यवस्था की मजबूती पर निर्भर करता है, लेकिन इस बात पर भी काफी कुछ निर्भर करता है कि भ्रष्टाचार की स्थिति दुनिया के सामने कितनी उजागर होती है. यही वजह है कि यह जानकर हैरानी होती है कि ट्रांसपरेंसी इंटरनेशन ही हालिया वार्षिक करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (Corruption Perceptions Index) में दो दशकों से लगातार सबसे नीचे रह रहे उत्तर कोरिया (North Korea) इस बार भी अंतिम स्थान पर है. क्या वाकई भ्रष्टाचार के मामले में उत्तर कोरिया एक बेहतरीन मिसाल है. इस जबरदस्त भ्रष्टाचार के पीछे आखिर कहानी क्या है.

    यहां भी है भ्रष्टाचार
    कई देशों सरकारों में भ्रष्टाचार की बहुत संभावनाएं देखी जाती हैं. रिश्वत अनुदान व्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा होते हैं और ऐसा उच्च स्तर पर अधिक होने की गुंजाइश होती है. लेकिन उत्तर कोरिया में उपहार की राजनीति ने उद्योगों को एक अलग दिशा दी है. यहां भी भ्रष्टाचार एक व्यापक स्तर पर फैला है, लेकिन यहां निचले स्तर पर इसका बहुत अच्छा असर देखने को मिलता है.

    सुविधाजनक है भ्रष्टाचार
    उत्तर कोरिया के निजी क्षेत्र की ताकत बढ़ती ही जा रही है जिससे यहां के लोगों की सोच भी बदल रही है. आम लोगों के लिए अब बिना लोक सुरक्षा मंत्रालय की नजर में आए रिश्वत देना आसान या सुविधाजनक हो गया है. उत्तर पूर्व एशिया पीस एंड करप्शन इंस्टीट्यूट के मुताबिक करीब 90 प्रतिशत उत्तरी कोरियाई लोग बाजार यानि सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार से जुड़े हैं.

    अधिकारियों को मोटी तनख्वाह?
    इस बात को उत्तर कोरिया के बाहर  के हालात से समझा जा सकता है. उत्तर कोरिया की सरकार अपने अधिकारियों को बहुत ही अधिक वेतन देती है जिससे वहां रिश्वत को रोका जा सके. लेकिन इसकी कारगरता की गारंटी नहीं होती है. जहां सिंगापुर में कड़ी व्यवस्था के चलते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सफलता पाई है, वहीं केन्या अपने सांसद को मोटी तनख्वाह देने के बाद भी सूचकांक में काफी नीचे हैं.

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    उत्तर कोरिया (North Korea) में भ्रष्टाचार एक सुविधा का रूप ले चुका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    बहुत नुकसान पर एक फायदा भी
    उत्तर कोरिया में अधिकारियों को बहुत कम तनख्वाह दी जाती है. आमतौर पर संबंधित अधिकारियों को विदेशी मुद्रा कमाने का दबाव होता है जिससे यहां रिश्वत और प्रलोभन एक तरह से सिस्टम का जरूरी हिस्सा हो जाते हैं. बड़े पैमाने पर यह किसी भी देश के लिए बहुत ही अव्यवस्था,  अक्षमता और अंततः बहुत ही ज्यादा नुकसानदेह साबित होता है, लेकिन फिर भी इससे उत्तरकोरिया के समाज में एक समरूपता  जरूर आ रही है.

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    सामाजिक बदलाव
    यहां घूसखोरी के कारण बहुत से गरीब लोग, जो यहां के तानाशाही सिस्टम का सीधा हिस्सा हैं, उनका जीवन स्तर उठ रहा है. ऐसा अचानक नहीं हुआ. 1990 में सरकारी तंत्र की नाकमी के बाद देश में निवेशकों, कामगारों और विशेषज्ञों के लिए निजी बाजार तेजी से विकसित हुए और दैनिक जीवन में घूसखोरी के बढ़ने से लोगों में नए सामाजिक बदलाव देखने को मिला.

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    उत्तर कोरिया (North Korea) के तंत्र के लिए भ्रष्टाचार एक तंत्र के रूप में विकसित हो गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    भ्रष्टाचार से ही हो सकता है काम
    लोग नई जानकारी के लिए प्रतिबंधित रेडियो प्रसारण सुनने लगे हैं. लोग प्रतिबंधित वस्तुओं का उपयोग करते हैं और पकड़े जाने पर रिश्वत देकर छूट भी जाते हैं. जन वितरण तंत्र के बिना लोगों को सत्ता से तो लाभ कम ही मिलता है, लेकिन लोगों ने यहां भ्रष्टाचार की अहमियत समझ ली है कि अधिकारियों और एजेंटों से इसी तरह से अपना काम कराया जा सकता है.

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    जो लोग लाभकारी आर्थिक अवसरों के लिए औपचारिक तौर पर सरकारी तंत्र से नहीं जुड़े हैं , उनके लिए रिश्वत बहुत जरूरी है. विदेशी मुद्रा कमाने वाली कंपनियां रिश्वत के तौर पर अपने व्यवसायी परमिटों को उच्च वर्ग वाले निवेशकों को बेच देते हैं. यह उच्च वर्ग डोंजू कहता है. इस तरह का पैसा अप्रतयक्ष रूप से सरकारी खजाने में चला जाता है. सरकार खुद विदेशी मुद्रा की तंगी से जूझ रही है और इसके लिए वह अपनी पकड़ तक ढीली करने को तैयार है.

    Tags: North Korea, Research, World

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