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अपनी जगह तेजी से बदल रहा है Magnetic Pole, जानिए क्या असर हो रहा है हम पर

पिछले तीस सालों में उत्तरी चुंबकीय ध्रुव (North Magnetic Pole) तेजी से अपनी जगह बदल रहा है. इसका हमारे नेविगेशन सिस्टम (Navigation System) पर असर पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • | May 07, 2020, 19:02 IST
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    हाइलाइट्स

    नई दिल्ली:  हमारी धरती के बारे में हम जानते हैं कि कौन सा स्थान कहां हैं. इसके लिए हमारे पास एक खास नेविगेशन सिस्टम (Navigation System) भी है जो हमारे सेटैलाइट की मदद से चलता है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस सिस्टम की सटीकता खतरे में हैं. और इसकी वजह है पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों (Magnetic PolesP का खिसकना. पिछले 20 से 30 सालों से चुंबकीय ध्रुवों की स्थिति खिसक रही है. अब वैज्ञानिकों ने एक शोध में इसकी सही व्याख्या करने का दावा है.

    क्या हैं चुंबकीय ध्रुव
    हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है. यहां तीन तरह के ध्रुव हैं. एक भौगोलिक ध्रुव (Geographical Poles) इन्हीं से गुजरने वाले अक्ष (Axis) पर वह अपना खुद का चक्कर लगाती है. दूसरे हैं भूचुंबकीय (Geomagnetic) ध्रुव जिसमें बहुत ही कम बदलाव होता है. तीसरे होते हैं, चुंबकीय ध्रुव जहां पर लोहे की सुई सीधी खड़ी हो जाती है.

    अपनी जगह बदल रहा चुंबकीय उत्तरी ध्रव
    लीड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि उत्तरी (चुंबकीय) ध्रुव अपनी मूल स्थिति बदल रहा है, वहां से खिसक रहा है. इस बदलाव के कारण  ही हमें अपने नेविगेशन सिस्टम में बार बार बदलाव करने पड़ रहे हैं. यहां तक कि स्मार्टफोन में भी कुछ जो जीपीएस होता है उसमें भी. यह उत्तरी ध्रुव जो अब तक कनाडा के पास था अब उत्तरी अमेरिका महाद्वीप से रूस के साइबेरिया की ओर खिसक रहा है.

    क्यों हुआ यह बदलाव और क्या हुआ इसका असर
    दरअसल चुंबकीय प्रभाव पृथ्वी के आंतरिक भाग में पिघली धातुओं के बहाव के कारण पैदा होता है. इसी बदलाव का के कारण जो दिशासूचक यंत्र पहले कभी कनाडा पर उत्तरी ध्रव का संकेत देते थे अब वे साइबेरिया की ओर यह संकेत देते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी ध्रुव के दो हिस्सों में चुंबकीय प्रभुत्व की एक तरह प्रतियोगिता चल रही है. हाल के कुछ सालों में जहां कनाडा के नीचे का क्षेत्र कमजोर हुआ तो वहीं रूस के नीचे का क्षेत्र कुछ ताकतवर हो गया. यह सब पृथ्वी के आंतरिक पदार्थों के बहाव में परिवर्तन के कारण ही हुआ. और इसकी नतीजा है कि उत्तरी ध्रुव कनाडा से साइबेरिया की ओर खिसकने लगा है.

    Earth, Life on Earth
    मैग्नेटिक नॉर्थे पिछले कुछ सालो में तेजी से खिसक रहा है.


    तो क्या हम पर होगा कोई असर
    इसे असर को ऐसे समझें कि अगर आपको अपने निजी वायुयान से  केवल दिशा सूचक यंत्र के सहारे दिल्ली से उत्तरी कनाडा को जाना हो तो आप रूस के साइबेरिया के आसपास पहुंच सकते हैं. दिशा सूचक यंत्र ही सदियों से नाविकों को सुदूर समुद्री यात्राओं में दिशा बताने का सहारा रहा है. पिछले 20 से 30 सालों में यह बदलाव बहुत प्रखर हो गया है.

    कैसे बदली स्थिति
    इस स्थिति का बदलाव 1990 के दशक में देखा गया था. इस स्थिति के सबसे पहले खोज साल 1830 में की गई थी तब यह कनाडा के नुनावुट (Nunavut) इलके में था. उस दौरान इसकी स्थिति में बदलाव नहीं देखा गया था.  लेकिन पिछले 30 सालों से यह स्थिति बदल रही है और वह भी तेजी से बदल रही है.  वैज्ञानिकों ने पिछले 20 साल के सैटेलाइट आंकड़ों का अध्ययन किया है और उत्तरी ध्रुव के इस बदलाव का पूरा रास्ता पता कर लिया है.

    तो फिर क्या मायने हैं इसके हमारे लिए
    हमें अपने दिशा सूचक यंत्र के संकेतों के अर्थ में बदलाव करने होंगे. लेकिन अब दिशासूचक यंत्र का उपयोग नहीं होता. उसकी  जगह दुनिया भर में नेविगेशन सिस्टम ने ले ली है. अब हमें हमारे नेविगेशन सिस्टम में और जल्दी-जल्दी बदलाव करने होंगे. ये नेविगेशन सिस्टम हमारे मोबाइल के मैप संबंधी ऐप के आधार हैं.

    तो अगली बार जब अब अपने मोबाइल में कोई नक्शा देखें तो यह जरूर उम्मीद करें कि इस नक्शे को अपडेन करने वाले साइट ने अपना नेविगेशन सिस्टम अपडेट कर लिया होगा.

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