आने वाला जमाना 'मेड इन चाइना' नहीं बल्कि 'मेड इन बांग्लादेश' का होगा

बांग्लादेश में लेबर एशिया में सबसे सस्ता. नीतियां ऐसी और आसान कि चीन के कई उद्यमी अपनी फैक्ट्रियां बंद कर वहां यूनिट लगा रहे हैं. गारमेंट इंडस्ट्री की सफलता ने बांग्लादेश के दरवाजे दूसरे देशों के लिए खोल दिये हैं.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 18, 2019, 9:06 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 18, 2019, 9:06 PM IST
अगर कुछ सालों के बाद आपके द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले सामान मेड इन चाइना के बदले मेड इन बांग्लादेश हो जाएं तो अचरज में मत पड़िएगा. दरअसल चीन की कंपनियां बड़े पैमाने पर अपना कारोबार समेटकर बांग्लादेश में मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयां लगा रही हैं. केवल चीन ही बल्कि भारत, जापान और कई यूरोपीय देशों के लिए अब बांग्लादेश निवेश की सबसे बेहतरीन जगह बनकर उभर रहा है.

जब खुद चीन के कारोबारी अपना देश छोड़ बांग्लादेश का रास्ता पकड़ रहे हों तो समझा जा सकता है असल में तस्वीर क्या है और क्या कह रही है. बीस साल पहले बांग्लादेश एक गरीब देश था. जहां सही मायनों में नाममात्र की सुविधाएं थीं और संरचना जैसी चीज तो थी ही नहीं.  एशिया में अक्सर लोग कहते थे कि बांग्लादेश जैसा देश तो अपने भाग्य में गरीबी ही लिखाकर लाया है. उसे कोई नहीं बदल सकता.

अब उसकी वही गरीबी उसका भाग्य बदल रही है. दुनिया में सबसे सस्ता श्रम और आसान प्रक्रिया ने उसे दुनियाभर में बड़े पैमाने पर मैन्यूफैक्चर्स का पसंदीदा बना दिया है. हालांकि ये दुर्भाग्य की बात है कि बांग्लादेश का मजदूर शायद दुनिया में सबसे कम पैसा पाता है. इस वजह से उसे हर साल सड़कों पर भी उतरना होता है.

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बहुत सस्ता लेबर 
अंतर कितना ज्यादा है वो इसी से समझ लीजिए कि चीनी बिजनेसमैन लियो झुआंग लिफेंग ने कुछ साल पहले जब चीन में अपनी फैक्ट्री बंद की तो वहां अपने श्रमिकों को औसतन 2000 यूआन (20,108 रुपए) की माहवार सैलरी दे रहे थे. लेकिन बांग्लादेश में वो एक श्रमिक को औसत तौर पर 170 यूआन (1713 रुपए) माहवार ही दे रहे हैं. चकरा गए न आप. हां, इसी वजह से तमाम तरह की इंडस्ट्रीज बांग्लादेश पहुंच रही हैं.

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गारमेंट इंडस्ट्री की सफलता के बाद बना बड़ी संभावना
बांग्लादेश आने वाले सालों में दुनिया का सबसे बड़े मैन्यूफैक्चरिंग में बदलने की संभावना बन रहा है. ये संभावना इस देश की उस गारमेंट इंडस्ट्री की जबरदस्त सफलता के बाद पैदा हुई है, जिसमें दुनियाभर के बड़े रेडिमेड ब्रांड के मंहगे से मंहगे कपड़े पिछले बीस सालों से बांग्लादेश में ही बनकर पूरी दुनिया में जा रहे हैं. 2000 से 3000 रुपए में बिकने वाली किसी महंगे ब्रांड की टीशर्ट सारे मेहनताने और मटीरियल के अलावा ट्रांसपोर्ट के खर्च को लेकर बमुश्किल 400 से 500 रुपए की पड़ती है.

बीस सालों में बहुत कुछ बदला बांग्लादेश में 

चीनी वेबसाइट साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी बिजनेस लियो झुआंग लिपेंग जब 22 साल पहले ढाका पहुंचे थे तो वहां एयरपोर्ट की हालत खस्ता थी, केवल दो लगेज कंवेयर बेल्ट्स काम कर रही थीं. बिजली भी सही तरीके से नहीं आती थी.

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उन्होंने उत्तरा एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन में जहां अपनी यूनिट लगाई वो जगह ढाका से आठ से दस घंटे के सड़क रास्ते की दूरी पर थी. अब बांग्लादेश का ढाका एयरपोर्ट तो लकदक हो ही गया है, साथ ही वहां के बहुत से शहर एयर ट्रांसपोर्ट से जुड़ चुके हैं, इसमें वो शहर भी है, जहां झुआंग ने अपनी यूनिट लगाई है.

बड़े पैमाने पर चीनी उद्यमी या तो बांग्लादेश में आने की योजना बना रहे हैं या आ चुके हैं


झुआंग का ये भी कहना है कि तब बांग्लादेश के शहरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान बमुश्किल से मिलते थे, हां ये जरूर था कि लेबर बहुत सस्ता था और श्रमिकों की उपलब्धता खासी ज्यादा थी. अब झुआंग का एलडीसी ग्रुप से देश में 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं. पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश बिल्कुल बदल गया है.

फैक्ट्रियों को दिये जा रहे हैं बड़े कंपाउंड 
बांग्लादेश में बड़ी फैक्ट्रियों को काफी बड़े कंपाउंड उपलब्ध कराए जाते हैं, जिसमें कामगारों और उनके परिवारजनों के लिए मुफ्त मेडिकल कंसल्टेशन सेंटर बनाए गए हैं. साथ ही साथ बच्चों के लिए डे केयर सेंटर भी हैं. बांग्लादेश में खुलने वाली तकरीबन सभी बड़ी फैक्ट्रियों में ये सुविधाएं हैं. चीन के निवेशक बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं.

चीन के उद्यमी क्यों कर रहे हैं बांग्लादेश का रुख
जिस तरह चीन में वेज वार बढ़ता जा रहा है, उससे लग रहा है कि मेड इन चाइना का बड़ा हिस्सा मेड इन बांग्लादेश में बदल जाएगा. 22 साल पहले अगर बांग्लादेश में केवल 20 से 30 चीनी कंपनियां थीं. वो अब 400 के करीब पहुंच गई लेकिन अब इनकी संख्या हजारों में होने की उम्मीद जताई जा रही है.

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केवल चीन ही नहीं बल्कि भारत, जापान, कोरिया और अन्य देश भी बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर निवेश कर चुके हैं या निवेश कर रहे हैं. फिलहाल बांग्लादेश की आर्थिक विकास दर छह फीसदी की है, इस साल इसके 8.13 फीसदी पर छलांग लगाने की उम्मीद है. इस तरह देखें तो बांग्लादेश दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई इकोनॉमी है.

बांग्लादेश में आठ एक्सपोर्ट जोन बनाए गए हैं लेकिन इनकी संख्या बढाई जा रही है


बांग्लादेश की इकोनॉमी स्थिर और तेज
साथ ही पूरी दुनिया ने बरसों से ये भी देखा है कि बांग्लादेश में तेज और स्थायित्व भरे इकोनॉमिक ग्रोथ की क्षमता रही है. दुनिया में विग बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी एवरग्रीन प्रोडक्ट्स ग्रुप अपनी फैक्ट्रियों को चीन से बांग्लादेश भेज रहा है.

बांग्लादेश के उत्तरा एक्सपोर्ट जोन में उसके पास 18 हजार कर्मचारी हैं. हाल ही में 20 अन्य चीनी कंपनियों ने अपनी फैक्ट्रियां बांग्लादेश के एक्सपोर्ट जोन में स्थापित की है. बांग्लादेश में ऐसे आठ जोन बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि बांग्लादेश अपने मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट जोन बढा भी रहा है.

कई तरह की छूट भी 
बांग्लादेश अपने यहां आ रही विदेशी कंपनियों को एक बड़ी छूट ये भी दे रहा है कि अगर उन्हें बाहर से कच्चा माल आयात करना हो तो उसपर कोई टैक्स नहीं लगेगा. ये ऐसी पॉलिसी है, जिसने मैन्युफैक्चर्स की बांछें खिला दी हैं. एक अन्य चीनी उत्पादक कई फैक्ट्रियां हेन्नान प्रांत के शेनझेन, गुआंगझोऊ और कूमिंग में थीं. करीब दस साल पहले उन्होंने ज्यादातर फैक्ट्रियां बद कर दीं. अब उनका 93 फीसदी काम बांग्लादेश में हो रहा है.
बांग्लादेश में फिलहाल न्यूनतम माहवार मजदूरी 95 डॉलर (6,615 रुपए) है, हालांकि इसे भी कई जगह नहीं दिया जा रहा. किसी भी एशियाई देश में मजदूरी इतनी सस्ती नहीं है. यहां तक की वियतनाम, कंबोडिया और म्यांमार जैसे देशों में मजदूरी भी बांग्लादेश से ज्यादा है. हालांकि सस्ते श्रम के चलते हमेशा ही बांग्लादेश में अंसंतोष के हालत दिखते हैं और सड़कों पर मजदूरों के जुलूस नजर आते हैं.

बांग्लादेश की इकोनॉमी तेज और स्थिर है


क्यों और कहीं नहीं जा रहे चीनी उद्यमी 
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि चीन के उद्योगपतियों ने पहले वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और कंबोडिया की ओर भी नजरें गड़ाईं लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि इन देशों में भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है साथ ही श्रमिक यूनियन बहुत ताकतवर हैं. फिर इन देशों में चीन को लेकर हमेशा एक गुस्से वाली स्थितियां भी रही हैं.

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30 साल पहले से चीन सरीखी है बांग्लादेश की स्थिति 
करीब-करीब बांग्लादेश की हालत अभी कुछ वैसी ही है, जैसी 30-40 साल पहले खुद चीन की थी. चीनी उद्योगपति कहते हैं कि बांग्लादेश उस मॉडल का इस्तेमाल कर रहा है, जो चीन ने इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए किया था. हालांकि बांग्लादेश ये ख्याल रख रहा है कि उसके देश में केवल चीनी निवेश ही न हो बल्कि भारत, जापान और अन्य देशों की भागीदारी भी रहे.

बांग्लादेश पर फिलहाल ऋण का बोझ तो है लेकिन ये ऐसा है जिसे कुछ सालों में उतार सकता है. बांग्लादेश की इकोनामी, पालिटिक्स और सिविल सोसायटी पर किताब लिख चुके प्रोफेसर डेविड लेविस का मानना है कि देश की इकोनॉमी मजबूत है और इसकी वजह उसकी मजबूत एक्सपोर्ट रणनीति है. इसी वजह से बांग्लादेश बहुत तेजी से उभर भी रहा है.

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