हमें जीवन में केवल एक बार नहीं बल्कि इतनी बार होता है प्यार...

जीवन में एक बार नहीं बल्कि कितनी बार हो सकता है प्यार. क्या कहता है विज्ञान  और क्या मानता है मनोविज्ञान.

जीवन में एक बार नहीं बल्कि कितनी बार हो सकता है प्यार. क्या कहता है विज्ञान और क्या मानता है मनोविज्ञान.

हम आमतौर पर सुनते आए हैं कि जिंदगी में सच्चा प्यार तो केवल एक ही बार होता है लेकिन साइंस की मानें तो हम जिंदगी में तीन से चार बार प्यार में पड़ते हैं. मनोविज्ञान कहता है कि ऐसा होने की वजहें भी होती हैं तो जानिए कि जिंदगी में वास्तव में कितनी बार आप प्यार में पड़ सकते हैं.

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‘कुछ कुछ होता है’ फिल्म में शाहरुख खान की लाइन है, " हम एक बार जीते हैं, एक बार मरते हैं, शादी भी एक बार होती है, और प्यार, प्यार भी एक ही बार होता है."

पता नहीं आप शाहरुख की इस बात से कितना सहमत हैं. लेकिन दुनिया में प्यार पर पिछले कुछ सालों में की गईं रिसर्च ऐसा नहीं मानतीं. वो इस बात पर अड़ी हैं कि प्यार केवल एक बार नहीं होता बल्कि उनका मानना है कि ये कम से कम तीन बार तो होता ही . बाकी जो होता है, वो कुछ भी हो सकता है लेकिन प्यार नहीं.

इन अलग-अलग शोध के मुताबिक तीन बार प्यार होने की वजह भी अलग-अलग होती हैं. पहला प्यार जब हम स्कूल-कॉलेज में होते हैं. यह वैसा प्यार होता है जो परियों की कहानियों में या कहें कि फिल्मों से प्रेरित होता है. सब कुछ एकदम आदर्श.

यही वह प्यार होता है जिसमे आप मानते हैं कि यही आपके साथ होने वाला असली प्यार है. हम इस समय इस विश्वास के साथ प्यार में पड़ते हैं कि यही हमारा आखिरी प्यार भी होने वाला है. अगर हमें यह रिश्ता अच्छा नहीं लग रहा, तब भी यह सोचकर कि "प्यार शायद ऐसा ही होता है", हम इसमें डूबे रहते हैं. क्योंकि इस प्यार में हम अपने से ज्यादा दूसरों के विचारों को तवज्जो देते हैं. दूसरों को आपका प्यार कैसा लग रहा है, वो उसके बारे में क्या सोचते हैं, वगैरह..वगैरह.

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पहली बार का प्यार उम्मीदों से भरा होता है

...और जब दूसरा प्यार होता है

जैसे मेहनत की कमाई होती है, वैसे ही मेहनत से हासिल किया गया प्यार भी होता है. यही प्यार हमारा दूसरा प्यार होता है. यह प्यार हमें दूसरे से ज्यादा अपने आप के करीब लेकर जाता है. यह हमें बताता है कि हमारी जिंदगी में प्यार कितना जरूरी है. इस प्यार में दर्द, झूठ, उठापटक सब कुछ होता है. हमें लगता है कि हम पहली वाली गलतियां नहीं दोहराएंगे.



इसके बाद भी गलतियां होती हैं. या कहना चाहिए कि ड्रामा होता है, जिसमें तमाम तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं. हम इस प्यार को खोना नहीं चाहते इसलिए हम इसे ठीक करने के चक्कर में इसे और पेचीदा बनाते चलते हैं. यह वह प्यार होता है जो हम चाहते हैं कि काम कर जाए.

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दूसरी बार प्यार होते होते हम थोड़ा संभल जाते हैं

फिर जब सामने आता है तीसरा प्यार 

लेकिन प्यार अपने कहने या करने से कहां रुकता है. खैर, आगे बढ़कर हमारे सामने आता है तीसरा प्यार. दिलचस्प यह है कि पहले प्यार में धोखा खाने के बाद हम उम्मीद छोड़ चुके होते हैं. और यह प्यार इसी नाउम्मीदी के बीच कहीं से उठकर आता है. हमें इसका एहसास भी नहीं होता. यह उस शक्ल या रूप में होता है जिसके बारे में हमने कभी सोचा नहीं था. यह प्यार को लेकर हमारी तमाम धारणाओं को तोड़ता है.

ये बहुत सहजता से आता है

यह प्यार जो इतनी सहजता से आपके जीवन में आता है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है. इस प्यार तक पहुंचते पहुंचते हम किसी दूसरे से अपेक्षाएं करना छोड़ चुके होते हैं. न ही हम किसी और के लिए खुद को बदलने की कोशिश करते हैं. हम एक दूसरे को वैसे ही स्वीकार कर लेते हैं जैसे कि हम हैं.

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तीसरी बार प्यार तब होता है जब हम इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं होती

विज्ञान क्या कहता है

जैसा कि किसी ने कहा है कि यह वो प्यार है जो लगातार हमारा दरवाज़ा खटखटाता रहता है, फिर हम जवाब देने में कितना भी वक्त क्यों न लगाएं. यह वो प्यार है जिसमें पड़कर लगता है कि सब कुछ सही है. वैसे प्यार को लेकर जिज्ञासा को शांत करने के लिए विज्ञान जगत चुप नहीं बैठा. अन्य किए गए शोध बताते हैं कि प्यार दो या चार बार भी हो जाता है.

फिर भी अगर हम औसत निकाले तो तीन ही आता है. यानि तीन बार तो प्यार तो पक्का है, आप प्यार में पड़ना चाहें या नहीं, तीन बार तो आपका इससे सामना होना ही है. वैसे भी प्यार जैसी चीज़ को बार बार नहीं तो एक बार मौका जरूर देना चाहिए...

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