रावण नहीं बल्कि उसके इस सौतेले भाई ने बसाई थी सोने की लंका, दशानन ने किया था कब्जा

रावण नहीं बल्कि उसके इस सौतेले भाई ने बसाई थी सोने की लंका, दशानन ने किया था कब्जा
लंकेश रावण ने स्वर्ण नगरी लंका पर हमला कर कब्जा कर लिया था. उससे पहले यहां का शासक उसका सौतेला भाई था

आमतौर पर कहा जाता है कि सोने की लंका रावण ने बसाई थी जबकि ये सही नहीं है. लंका को ऐश्यर्यशाली करने के साथ स्वर्णजनित करने का काम उसके नामी सौतेले भाई ने किया था, जिसे बाद में रावण के हमले के बाद यहां से भागना पड़ा. उसके बाद इस नगरी पर रावण राज करने लगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2020, 4:26 PM IST
  • Share this:
दूरदर्शन पर रामायण के प्रसारण के बाद ये पौराणिक गाथा फिर चर्चाओं में है. कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में घरों में बैठे लोग इस पर तीन दशक से कहीं ज्यादा पहले बने टीवी सीरियल का आनंद ले रहे हैं. साथ ही उनमें रामायण के तमाम पात्रों को लेकर दिलचस्पी भी जग रही है. बार-बार कहा जाता है कि सोने की लंका रावण ने बनाई, हकीकत में ऐसा नहीं था. रावण ने सोने की लंका को हमला कर कब्जे में ले लिया था.

सोने की लंका रावण के नामी सौतेले भाई ने बनाई थी. जब रावण ने लंका पर हमला किया तो ये भाई जान बचाकर वहां से भाग गया था. फिर यहां कभी नहीं लौट सका.

पौराणिक ग्रंथों के साथ रामचरित मानस, वाल्मिकी रामायण और अन्य किताबों में इसका जिक्र होता है. कुछ समय पहले प्रकाशित हुई अनंत नीलकंठन की किताब "असुर" में इसका विस्तार से वर्णन है कि किस तरह रावण ने ऐश्वर्य नगरी कही जाने वाली स्वर्णिम लंका पर हमला करके उसे जीत लिया. फिर वह लंबे समय तक यहां राज करता रहा.



क्या था रावण के सौतेले भाई का नाम
रावण के इस भाई का नाम कुबेर था. जी हां, वही कुबेर जो धन के देवता कहे जाते हैं. कुबेर रावण का सौतेला भाई था. वह धनपति था. कुबेर ने लंका पर राज कर ना केवल उसका विस्तार किया था बल्कि उसे सोने की नगरी में बदल दिया था. जिससे लंका के वैभव की चर्चा हर ओर होने लगी.

कौन थे रावण के पिता 
रावण के पिता जाने-माने ऋषि थे. उनका नाम विश्रवा था. उनकी दो पत्नियां थीं. पहली पत्नी इलबिड़ा के गर्भ से कुबेर पैदा हुए जबकि दूसरी पत्नी कैकसी से रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का जन्म हुआ. ऋषि विश्रवा की दूसरी पत्नी कैकसी राक्षस कुल से थीं.

रावण का सौतेला भाई कुबेर, जिसे हिंदू धर्म ग्रंथों में धन का देवता कहा जाता है


कुबेर के अपमान से आहत था रावण
अनंत नीलकंठन की किताब "असुर" कहती है, जहां एक ओर कुबेर ऐश्वर्य और धनदौलत का स्वामी था और श्रीलंका का राजा था. वहीं रावण और उसके अन्य भाई-बहन बहुत दरिद्रता के शिकार थे.  उन्हें अभावों का जीवन जीना पड़ता था. कुबेर का व्यवहार भी रावण और उसके भाई-बहनों के प्रति अच्छा नहीं था. ना ही उसने कभी उनकी कोई मदद ही की. कुबेर के अपमानजनक व्यवहार से युवा रावण आहत रहता था.

रावण ने खुद को मजबूत किया और छीन ली लंका
इसके बाद रावण ने तप किया. कई तरह की शक्तियां हासिल कीं. उसने खुद को बहुत मजबूत बना लिया. बाद में हालात ऐसे बने कि रावण ने हमला करके कुबेर से सोने की नगरी लंका छीन ली. कुबेर को वहां से भागना पड़ा. कुबेर को हिंदू पौराणिक ग्रंथों में ना केवल धनपति और धन का देवता माना जाता है बल्कि वह यक्षों के राजा भी हैं.

सबसे पहले तीन राक्षसों ने बसाई थी ये नगरी
पुराण ये कहते हैं कि कुबेर से भी पहले माली, सुमाली और माल्यवान नाम के तीन राक्षसों ने त्रिकुट सुबेल यानि सुमेरु पर्वत पर लंकापुरी बसाई थी. फिर माली को मारकर देवों और यक्षों ने कुबेर को लंकापति बना दिया था.

एक प्राचीन चित्र में रावण का सोने से बना हुआ किला, जहां हमेशा राक्षसों का कड़ा प्रहरा होता था


रावण की मां कैकसी इन्हीं तीन राक्षसों में एक सुमाली की बेटी थीं. नाना सुमाली के उकसाने पर रावण ने सौतेले भाई कुबेर से युद्ध की ठानी.

रावण के हमले में भागना पड़ा था कुबेर को
रावण ने पहले तो तप किया और फिर जंगलों में रहते हुए एक मजबूत सेना तैयार कर ली. रावण ने जब सेना के साथ कुबेर की वैभवशाली नगरी पर हमला किया तो ये हमला इतना तीव्र था कि कुबेर और उसकी सेना संभल भी नहीं सकीय उसे वहां से परिवार के साथ जान बचाकर भागना पड़ा.

कुबेर वहां से भाग गया. वहां से वो अलका पर्वत जाकर रहने लगा. इसके बाद रावण ने उसकी सारी संपत्ति और लंका को हथिया लिया. हालांकि ये भी कहा है कि पिता विश्रवा के कहने पर कुबेर ने खुद ही लंका रावण को दे दी थी. इसी दौरान रावण ने कुबेर के पुष्पक विमान भी हथिया लिया, जिसका उसने भरपूर इस्तेमाल किया. सीता का हरण करने के लिए भी रावण इसी विमान से जंगल में गया था. बाद में जब श्रीराम ने रावण पर जीत हासिल की तो वो इसी विमान से अयोध्या लौटे थे.

क्या रावण के पिता ने ही दिया था उसके नष्ट होने का श्राप
हालांकि अनंत नीलकंठन की किताब असुर और रामानंद सागर के टीवी सीरियल रामायण के अनुसार रावण के पिता विश्रवा उसकी हरकतों से नाराज रहते थे. उन्होंने उसे श्राप भी दिया था कि एक दिन ये लंका उसके हाथ से निकल जाएगी. उसे हार का मुंह ही नहीं देखना पड़ेगा बल्कि मृत्यु का सामना भी करना होगा. बाद में यही हुआ भी.

ये भी पढ़ें
5 महीने बाद भी कोविड-19 को कितना समझ पाए हैं वैज्ञानिक?
कोरोना के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा वेंटिलेटर, 80% की गई जान
Covid-19 : क्या है उस दवा पर वैज्ञानिकों की रिपोर्ट, जो भारत ने अमेरिका को भेजी है
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading