नई बात नहीं है विस्फोटक अनानास से जानवरों की मौत, इस वजह से होता है इनका उपयोग

नई बात नहीं है विस्फोटक अनानास से जानवरों की मौत, इस वजह से होता है इनका उपयोग
अनानास में पटाखे से जानवरों के मारने के हादसे केरल में होते रहते हैं.

केरल में विस्फोटक अनानास (Cracker filled pineapple) खाने से किसी जानवर की मौत कोई नई बात नहीं है. इस बार हथिनी (Female elephant) इसका शिकार बन गई.

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नई दिल्ली:  हाल ही में केरल के पल्लकड़ जिले के मन्नीरकड़ में पटाखों से भरा अनानास (Cracker filled Pineapple)  खाने की वजह से एक गर्भवती हथिनी (Pregnant Elephant) की मौत हो गई. इस घटना से पूरे देश में देश में रोष का माहौल बन गया है. सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर डाली. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केरल (Kerala) में किसी जानवर का इस तरह से मरना पहली घटना नहीं हैं. बल्कि केरल में तो यह जानवरों को मारने का एक तरीका है.

क्या है तरीका
दरअसल केरल में सुअर वहां की फसल को बर्बाद कर देते हैं. उन्हें रोकने के लिए ये विस्फोटक स्थानीयत स्तर पर उपयोग में होने वाले पटाखों से तैयार किया जाता है और उनका इस्तेमाल जानवरों को खेतो में आने से रोकने के लिए किया जाता है. केरल  खास तौर पर जंगली सुअरों के लिए. इनसे केरल के किसान बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं. वैसे तो वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत इन सुअरों को मारना कानूनी तौर पर अपराध है, लेकिन इसके बाद भी किसान इनसे फसल बचाने के लिए  इन्हें मारने के लिए ऐसे तरीके प्रयोग करते हैं.

नई बात नहीं है, लेकिन ..



यह तरीका कोई नया नहीं है. जानकार लोग जानते हैं की यह तरीक बहुत पुराना और प्रचलित है. लेकिन जिन लोगों को इस हादसे के जरिए पहली बार पता लगा उन्हें वास्तविकता का पता नहीं है. सोशल मीडिया पर यह खबर फैलते देर नहीं लगी कि हथिनी को बेरहमी से मारा गया है.



तो क्या हथनी की इरादतन हत्या नहीं हुई थी
ऐसा दावा करने वालों की कमी नहीं है. इस बात की संभावना बहुत ही ज्यादा है कि यह हथिनी या किसी भी हाथी को मारने के लिए किया गया प्रयास नहीं था. कहा जा रहा है कि हथिनी संयोग से इस जाल में आ गई जो जंगली सुअरों के लिए बिछाया गया था. कई लोग इसे एक अनचाहा हादसा बता रहे हैं.

Elephant
27 मार्च को प्रेग्नेंट हथिनी की हो गई थी मौत


भारत में दूसरे प्रदेशों में भी अपनाई जाता है यह तरीका
केरल ही नहीं कई दूसरे प्रदेशों में भी अपनाया जाता है वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि विस्फोटक और अलग अलग तरह के जाल का उपयोग पूरे भारत में किया जाता है. लेकिन केरल में इसे मलयालम में पन्नी पड़कम कहा जाता है. इसके अलावा जानवरों को खेतों में आने से रोकने के लिए बिजली के तारों का उपयोग भी होता है.

कैसे हुई हथिनी की मौत
25 मई को इस हथिनी ने जब इस अनानास को खाया तब यह गर्भवती थी. इसके खाने के बाद इसके मुंह में विस्फोट हो गया था और  उसका जबड़ा क्षतिग्रस्त हो गया. यह विस्फोट इतना तेज था कि हथिनी के दांत भी टूट गए. जिसके बाद से ही हथिनी पास के एक तालाब में पड़ी रहती थी और बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी पिया करती थी. इस घटना के तीन दिन बाद दर्द से कराहते हुए उसने दम तोड़ दिया.

शक हुआ कि किसी ने जानबूझकर तो नहीं...
इस घटना के बाद यह शक हुआ कि कुछ लोगों ने इसे इस तरह का अनानास खिलाकर मारने की कोशिश की है. लेकिन बाद में पाया गया कि इस तरह का अनानास किसान जंगली सुअरों के लिए अपने खेतों के पास छोड़ देते हैं जिससे वे उनकी फसल बरबाद नहीं कर सकें. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस तरह के कमेंट किए हैं कि यह एक हादसा हो सकता है. मामले की जांच जारी है.

पूरे देश में इस बात को लेकर विरोध हो रहा है.


जो भी हो यह तय है कि इस तरह से अनानास में पटाखे रखना मानवीय कार्य की श्रेणी में नहीं माना जा सकता. जंगली सुअरों को रोकने के बहुत से कारगर उपाय हैं लेकिन यह उपाय न तो कानूनी रूप से सही है और न ही आसापास के जानवरों के लिए, भले ही उसे किसी परंपरा के तौर पर ही क्यों न अपनाया गया हो.

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