जानिए कितनी धूर्त और मक्कार है पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई

भारत ने 1971 की लड़ाई में इस एजेंसी के दांत बुरी तरह तोड़कर इसके आत्मविश्वास को हिला दिया था

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 5:21 PM IST
जानिए कितनी धूर्त और मक्कार है पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई
पाकिस्तान की बदनाम और मक्कार खुफिया एजेंसी है आईएसआई
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 5:21 PM IST
भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन का मिग विमान जब पाकिस्तान की सीमा में दुर्घटनाग्रस्त हुआ तो वो दो दिनों तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की कैद में रहे. उसने उन्हें बहुत टार्चर किया. आईएसआई का असली चेहरा वाकई बहुत गंदा और मक्कार है. दुनियाभर में जहां कहीं भी इस्लामी आतंकियों का हमला होता है, उसके तार कहीं ना कहीं से आईएसआई से जुड़े पाए जाते हैं.

फरवरी में पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 से ज्यादा जवान जिस आतंकवादी हमले में शहीद हुए, उसके पीछे असली दिमाग आईएसआई का ही था.


हाल ही में श्रीलंका में जिस तरह धमाके हुए, उसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए, उसमें भी माना जाता है कि विस्फोटक आईएसआई ने उपलब्ध कराए थे. कहा जाता है कि श्रीलंका में भी आतंकियों को ट्रेनिंग भी इसी एजेंसी के लोगों ने दी थी. अफगानिस्तान और ईरान में आतंकी हमलों में भी बार बार आईएसआई का नाम आता रहा है.

असली काम है दक्षिण एशिया में दहशतगर्दी

आईएसआई का पूरा नाम है इंटर सर्विसेट इंटैलिजेंस. दरअसल एशिया में आमतौर पर जहां कहीं भी गड़बड़ी होती है, उसमें पीछे आईएसआई का हाथ होता है. कुल मिलाकर ये संस्था अब दहशतगर्दी फैलाने वाली संस्था के तौर पर कुख्यात हो चुकी है. पाकिस्तान में जितने भी आतंकी गुट हैं, उन सभी की पीठ पर इसी का हाथ रहा है.

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हकीकत ये भी है कि भारत में हर आतंकी हमले की स्क्रिप्ट आईएसआई ही लिखती है. उसने खासकर दक्षिण एशिया के देशों में गड़बड़ी फैलाने के लिए अपने अलग अलग प्रकोष्ठ खोल रखे हैं.
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इस्लामाबाद में आईएसआई का मुख्यालय


सीआईए से सीखे हैं पैंतरे
80 के दशक में जब अमेरिका की जासूसी एजेंसी सीआईए ने अफगानिस्तान में सोवियत संघ की फौजों को खदेड़ने के लिए वहां तालिबानियों और अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों को तैयार करना शुरू किया तो उसके काम में सबसे ज्यादा काम आया पाकिस्तान का आईएसआई.

कहा जा सकता है कि आईएसआई पिछले कुछ सालों से जिन पैंतरों का इस्तेमाल कर रहा है, वो उसने सीआईए से सीखे. उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया. उसने उसे दुनिया की सबसे मक्कार और कुख्यात एजेंसी बना दिया.

71 में भारत ने तोड़े थे आईएसआई के दांत 
पाकिस्तान बनने के एक साल बाद आईएसआई की शुरुआत हुई. इसका मुख्यालय एक बहुत बड़ी बिल्डिंग में इस्लामाबाद में है. आजादी के बाद पाकिस्तानी इलाकों से भारत में कई बार हुए कबायली हमलों के पीछे आईएसआई का हाथ था. 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान सेना ही नहीं बल्कि आईएसआई के दांत भी अच्छी तरह तोड़े थे. इसके बाद फिर नए सिरे से खड़ा किया गया.

उसने सीआईए के साथ मिली ट्रेनिंग और खाड़ी देशों से मिलने वाली इस्लामी फंड के जरिए भारत में पिछले दो दशकों में आतंकवाद की पूरी फसल खड़ी कर दी है, जो कश्मीर में लगातार सक्रिय रहती है.

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किस तरह रचता है कुचक्र
माना जाता है कि ये पाकिस्तानी एजेंसी स्टाफ के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी है. लगता नहीं कि उसके पास फंड की कमी है. खासकर एशियाई देशों में कुचक्र रचने के लिए वो बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों को पैसा देकर फुसलाती है. फिर उनसे आतंक से लेकर खुफिया जानकारियां लेने के तमाम काम करती है.इस एजेंसी की मर्जी के बगैर आतंकवादी संगठनों का पत्ता भी नहीं खड़कता.

पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को वास्तव में आईएसआई ने ही खड़ा किया है


सेना के अफसर चलाते हैं इसे
आमतौर पर आईएसआई में बड़े पैमाने पर पाकिस्तानी सेना से ही अफसर आते हैं. एक तरह से वो पाकिस्तानी सेना का ही एक हिस्सा माना जाता रहा है. उसके प्रमुख की नियुक्ति से लेकर आपरेशंस तक में पाक सेना का खास रोल रहता है.

इसका नाम ही इंटर सर्विसेज इसलिए रखा गया था ताकि उसमें पाकिस्तानी सेना के तीन अंग यानि आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के अफसरों को रखा जा सके.हालांकि पिछले कुछ सालों से इस संस्था की क्षमता बढाने के लिए पाकिस्तान के कई अलग सरकारी विभागों से भी लोग इसमें नियुक्त किए जाने लगे हैं.

किस तरह का ढांचा है 
आईएसआई का हेड पाकिस्तानी सेना का जनरल रैंक का कोई अधिकारी ही होता है. उसके नीचे तीन डिप्टी होते हैं, जो तीन अलग विंग की अगुवाई करते हैं. ये तीन विंग इंटरनल विंग, एक्सटर्नल और फॉरेन रिलेशन विंग हैं. आईएसआई के एक्सटर्नल और फॉरेन रिलेशन विंग सीमापार कश्मीर में आतंकवादियों के संगठन तैयार करने से लेकर उन्हें ट्रेनिंग, पैसा और हथियार देने का काम करते हैं.

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भारत के किसी भी आतंकवादी हमले में इन दोनों विंग्स की भूमिका खास रहती है. हालांकि इन तीनों विंगों को आठ डिविजन में बांटा गया गया है. इसमें ज्वाइंट इंटैलिजेंस नार्थ सीधे सीधे जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में आतंकवादियों की फसल तैयार करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसआई आतंकवाद संचालन बेल्ट की तरह काम को अंजाम देता रहता है.

आईएसआई का मोटे तौर पर एक ही काम है एशिया में दहशतगर्दी फैलाने में आतंकी संगठनों की मदद करना


क्या कहती है रिपोर्ट 
थिंक टैंक ग्लोबल सेक्यूरिटी रिव्यू ने कुछ समय पहले आईएसआई पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार आईएसआई हमेशा इस कोशिश में रहती है कि उसके दो पड़ोसियों भारत और अफगानिस्तान में बड़ी आतंकी गतिविधियां होती रहें-क्योंकि इससे उसके अपने सुरक्षा हित सधते हैं.
अफगानिस्तान में आईएसआई ने तीन बड़े आतंकी सगंठन तैयार किए, इसमें हक्कानी नेटवर्क, अफगान तालिबान और अलकायदा शामिल थे. अफगान तालिबान तो अब भी पाकिस्तान के ही इशारों पर नाचता है.

एशियाई देशों में हर जगह फैले हैं एजेंट
1984 में जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक बने तो उन्होंने आईएसआई के साथ मिलकर आतंकवादियों की फौज तैयार करने की साजिश पर काम करना शुरू किया. फिर जनरल परवेज मुशर्रफ ने इसे गति दी. एशियाई देशों में आईएसआई के एजेंट्स ने बड़े पैमाने पर घुसपैठ कर रखी है.

तकरीबन सभी एशियाई देशों में आईएसआई के एजेंट दूतावासों, मल्टीनेशनल संगठनों, गैर सरकारी संगठनों में कर्मचारी के रूप में जगह हासिल करके काम कर रहे हैं. पाकिस्तान से आने वाले सांस्कृतिक प्रोग्राम्स दल में भी उनके सदस्य आवश्यक तौर पर रहते ही हैं.

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