Rajasthan Government Crisis : अब नजरें राज्यपाल कलराज मिश्र पर, क्या करेंगे वो

Rajasthan Government Crisis : अब नजरें राज्यपाल कलराज मिश्र पर, क्या करेंगे वो
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र

जयपुर हाई कोर्ट ने जिस तरह सचिन पायलट और उनके साथ के विधायकों के अयोग्यता के मसले पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. अब इसके बाद अशोक गहलोत विधानसभा में शक्ति परीक्षण करके अपनी सरकार को बचाना चाहेगे. ऐसे में सभी की निगाहें राज्यपाल कलराज मिश्रा पर टिक गई हैं कि वो क्या करते हैं

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जयपुर हाईकोर्ट द्वारा सचिन पायलट समेत 19 विधायकों की अयोग्यता के मामले पर यथास्थिति बरकरार रखने के बाद राजस्थान में घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. अब जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चाहते हैं कि वो विधानसभा पर शक्ति परीक्षण करें. बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्यपाल उनको इसकी इजाजत देंगे.

राजस्थान के मुख्यमंत्री पिछले एक सप्ताह में दो बार राज्यपाल से सदन में बहुमत साबित करने के लिए सदन की बैठक बुलाने की मांग कर चुके हैं लेकिन राज्यपाल ने उनकी इस बात का कोई जवाब नहीं दिया है. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनसे तीसरी बार इसका अनुरोध उनसे करेंगे. कुल मिलाकर सारे देश की नजरें राज्यपाल कलराज मिश्र पर टिक गई हैं.

दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सदन में शक्ति परीक्षण करके अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकते हैं और विश्वास मत हासिल करके अपनी सरकार बचा सकते हैं.



संविधान क्या कहता है
संविधान ये कहता है कि अगर किसी राज्य का मंत्रिपरिषद सदन में बैठक बुलाने की लिखित मांग राज्यपाल को करता है तो एक बार तो राज्यपाल उसको ठुकरा सकते हैं लेकिन दूसरी बार अगर ये मांग की जाती है तो वो उससे इससे ठुकरा नहीं सकते. लिहाजा राज्यपाल कलराज मिश्र का कोई भी कदम अब राजस्थान की सियासत में मुख्य भूमिका निभाएगा.

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अभी कुछ ही दिन पहले ही बात है जबकि निजी विश्वविद्यालयों के अध्यक्षों और कुलपतियों से संवाद करते हुए उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग में कहा था, हम संविधान के मार्ग निर्देशन पर चलते हैं. संविधान हमारे राष्ट्र का मूल ग्रंथ है. संविधान की जानकारी युवा पीढी को कराना आवश्यक है.

क्या सदन की बैठक को टाल सकते हैं राज्यपाल
आमतौर पर मंत्री परिषद की सिफारिश पर राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने की तारीख तय करते हैं. हालांकि ये भी माना जा रहा है कि राज्यपाल कोरोना आशंका के मद्देनजर सदन में बैठक बुलाने की बात को टाल भी सकते हैं. इससे राज्यपाल सचिन पायलट और उनके साथ मौजूद अन्य विधायकों को कुछ समय और दे सकते हैं. इससे बीजेपी खेमे को राज्य में सरकार गिराने के लिए थोड़ा समय और मिल जाएगा.

बीजेपी के सीनियर लीडर रहे हैं कलराज
79 वर्षीय कलराज मिश्र राज्यपाल बनने से पहले बीजेपी के सीनियर नेता रहे हैं. वो पिछली एनडीए सरकार में मंत्री रहे हैं. लेकिन वर्ष 2019 में जब बीजेपी ने उन्हें चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया तो उसी से जाहिर हो गया था कि अब उन्हें राज्यपाल के तौर पर नई भूमिका मिल सकती है. उन्हें पहले हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया लेकिन फिर इसी भूमिका में राजस्थान भेज दिया गया.

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पिछली मोदी सरकार में मंत्री थे
केंद्र में पिछली मोदी सरकार में वो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री थे. वो वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश के देवरिया लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे.उनका लंबा चौड़ा राजनीतिक करियर रहा है.

बीजेपी में बढ़ता गया कलराज का कद
1977 में वह जनता पार्टी के चुनाव संयोजक बने. 1978 में वह राज्यसभा के सदस्य बन गए. 1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए. कलराज मिश्र राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. वो 1991, 1993, 1995 और 2000 में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. बीजेपी में उनका कद बढ़ता गया. 2003 में वे यूपी, और 2004 में राजस्थान और दिल्ली के प्रभारी बने. 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित किए गए. 2012 के विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए. 2014 में देवरिया लोकसभा सीट से सांसद बने.

क्या होती है राज्यपाल की भूमिका और उनकी शक्ति
अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य में राज्यपाल जरूरी है. उसको राज्य में केंद्र सरकार का प्रतिनिधि माना जाता है. वो राज्य का प्रथम व्यक्ति होता है.  हालांकि वास्तविक शक्तियां मुख्यमंत्री के पास होती हैं. राज्यपाल के पास कार्यकारी शक्तियां होती हैं.

राज्यपाल के पास विधानमंडल सत्र बुलाने और उसे समाप्त करने का अधिकार है. मंत्रिपरिषद की सलाह पर वो विधानसभा को भंग कर सकते हैं. साथ ही अगर विधानमंडल सत्र में नहीं हो तो वो विशेष अधिकार के तहत अध्यादेश जारी कर सकते हैं.
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