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जानिए, क्या है न्यूक्लियर ट्रायड, जो China हासिल करने जा रहा है

जानिए, क्या है न्यूक्लियर ट्रायड, जो China हासिल करने जा रहा है

चीन तीनों जरियों से परमाणु हमला कर सकने की ताकत जुटा रहा है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

चीन तीनों जरियों से परमाणु हमला कर सकने की ताकत जुटा रहा है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

रूस और अमेरिका के बाद अब चीन भी वो देश बन सकता है, जो जमीन, पानी या हवा- कहीं से भी परमाणु हमला (after Russia and America- China will soon gain nuclear triad power) कर सके. इसे ट्रायड क्षमता कहते हैं.

  • News18Hindi
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    पेंटागन (Pentagon) ने चीन के बारे में एक खौफनाक खुलासा किया है. उसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले 10 सालों के भीतर ये देश जल, थल और वायु तीनों से परमाणु हमला करने लायक हो जाएगा. चीन के विस्तारवादी और आक्रामक रवैये को देखते हुए ये डराने वाली बात है. बता दें कि फिलहाल अमेरिका और रूस के पास ही ये तीनों जरियों से परमाणु हमला कर सकने की ताकत है. इसे "nuclear triad" क्षमता कहते हैं, जिसकी तरफ अब चीन भी तेजी से बढ़ रहा है. जानिए, ये कितना खतरनाक हो सकता है.

    अमेरिकी कांग्रेस में अपनी सालाना रिपोर्ट पेश करने हुए पेंटागन ने चिंताजनक बात बताई. इसके अनुसार चीन जिस तेजी से अपनी सैन्य और परमाणु क्षमता में बढ़त कर रहा है, वो अधिक से अधिक 10 सालों के भीतर वो देश बन जाएगा जो किसी भी देश पर पानी, जमीन या फिर हवा से परमाणु हमला कर सके. फिलहाल चीन जिस तरह से देशों को हड़पने या जमीनों को कब्जाने की नीयत दिखा रहा है, उसे देखते हुए चीन का ट्रायड क्षमता-युक्त होना डरावना माना जा रहा है. बता दें कि अमेरिका लगातार चीन पर उस परमाणु हथियार नियंत्रण संधि पर हस्ताक्षर करने की बात कर रहा है, जो उसके और रूस के बीच पहले से ही है.

    Nuclear Triad
    अमेरिकी कांग्रेस में अपनी सालाना रिपोर्ट पेश करने हुए पेंटागन ने चिंताजनक बात बताई- सांकेतिक फोटो


    अमेरिका और रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने 31 साल पहले इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे. ये संधि इन दोनों को जमीन से मार करने वाली ऐसी मिसाइलें बनाने से रोकती है जो परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम हों और जिनकी मारक क्षमता 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर तक हो. अब अमेरिका एक तरफ तो चीन पर इसे साइन करने का दबाव बना रहा है तो दूसरी तरफ रूस की भी शिकायत कर रहा है.

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    असल में रूस संधि के बाद भी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है. ऐसे में अमेरिका को डर है कि वो पीछे छूट जाएगा. या उसे कोई खतरा हो सकता है. यही वजह है कि वो अपने, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय हथियार नियंत्रण समझौते की बात कर रहा है ताकि चीन को खतरा बनने से पहले रोका जा सके.

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    वैसे बता दें कि रूस और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर वेपन को लेकर एक संधि पहले से ही टूट चुकी है. इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि के टूटने के पीछे अमेरिका ने रूस को दोषी ठहराते हुए कहा कि वो लगातार चुपके से हथियार बना रहा था. और ऐसे में इस संधि को कोई मतलब नहीं था.

    Nuclear Triad
    चीन का मकसद साल 2050 तक पीपल्स लिबरेशन आर्मी को दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य ताकत बनाना है- सांकेतिक फोटो


    अब बात करते हैं उस ट्रायड ताकत की, जो अमेरिका और रूस के पास है, और चीन भी जिसकी ओर बढ़ रहा है. स्टॉकहोम के इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सिप्री की साल 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अभी भी सबसे अधिक परमाणु हथियार संपन्न देशों की सूची में टॉप पर है. उसके पास 6375 न्यूक्लियर बम हैं. अमेरिका के पास 5800 बम हैं. इसके बाद चीन का नंबर आता है. सिप्री के मुताबिक उसके पास 320 न्यूक्लियर हथियार हैं. हालांकि इन संख्याओं को लेकर कई मतभेद हैं और अलग-अलग संस्थाओं का अलग-अलग कहना है.

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    जो भी हो, इतना तो पक्का है कि चीन बहुत तेजी से अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को आधुनिक बना रहा है और संख्या बढ़ रही है. खुद चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि चीन जल्दी ही अपने परमाणु हथियारों को 1000 तक पहुंचा देगा. चीन का मकसद साल 2050 तक पीपल्स लिबरेशन आर्मी को दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य ताकत बनाना है. यहां वर्ल्ड क्लास आर्मी से मतलब वो सेना है जो दुनिया के किसी भी हिस्से से और किसी भी जरिए से अपनी ताकत दिखा सके.

    इधर अमेरिका के टोकने पर चीन का कहना है कि जब खुद अमेरिका के पास उससे कई गुना ज्यादा परमाणु ताकत है तो उसे चीन को रोकने का हक नहीं है. लेकिन जिस तरह से चीन देशों और यहां तक कि साउथ चाइना सी पर भी अपना दावा कर रहा है, ऐसे में अमेरिका के साथ अब यूरोपीय देश भी आ गए हैं कि चीन को परमाणु हथियार बनाने से रोकना होगा.

    Tags: China, India China Border Tension, India-china face-off, India-China LAC dispute

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