Nurse Day 2021 : भारत के अस्पतालों के बारे में क्या कहा था फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने

फ्लोरेंस नाइटिंगेल बहुत धनी घर से थीं लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन ऐसी सेवा में लगाया, जो मानवता के लिए सबसे बड़ी कही जाएगी.

फ्लोरेंस नाइटिंगेल बहुत धनी घर से थीं लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन ऐसी सेवा में लगाया, जो मानवता के लिए सबसे बड़ी कही जाएगी.

Nurse Day 2021 : आज इंटरनेशनल नर्स डे है. जिसे हर साल दुनियाभर को पहली बार नर्सिंग के पेशे से परिचित कराने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल की याद में मनाया जाता है. उनके योगदान से पूरी दुनिया में नर्सों को पहचान मिलीं. नाइटिंगेल का खास ध्यान भारत और वहां के अस्पतालों की ओर भी रहा.

  • Share this:

आज इंटरनेशनल नर्सिंग डे है. यानि वो दिन जो फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्मदिन है, जिसने पहली बार लोगों को नर्सिंग के महत्व से रू-ब-रू कराया. युद्ध के मैदान से वो घायलों को उठवाती थीं. फिर अस्पताल ले जाकर उनकी सेवा करती थीं. असल में वो गणित की जीनियस थीं. उन्होंने भारत के अस्पतालों और पानी की सफाई पर भी बहुत जोर दिया. बल्कि वो इस संबंध में बाद में लगातार भारत से रिपोर्ट मंगाकर उस पर अपने सुझाव देतीं थीं.

फ्लोरेंस की वजह से ही ब्रिटेन में नर्सिंग के पेशे और अस्पतालों का रंग रूप बदला. उनका जन्म इटली के फ्लोरेंस में हुआ. इसी के चलते उन्हें फ्लोरेंस नाइटिंगल नाम मिला. वो ब्रिटेन के एक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक़ रखती थी. फ्लोरेंस नाइटिंगेल का बचपन ब्रिटेन के पार्थेनोप इलाक़े में पिता की सामंती जागीर में बीता था.

बचपन से ही जीनियस और गजब की मेमोरी

सामंती परिवार से ताल्लुक़ रखने की वजह से फ्लोरेंस नाइटिंगेल और उसकी बहनों को घर पर तालीम दी गई थी. वो बचपन से ही जीनियस थीं. उनकी मेमोरी गजब की थी. गणित में उनकी दिलचस्पी बेतरह थी.
1837 में नाइटिंगेल परिवार अपनी बेटियों को यूरोप के सफ़र पर ले कर गया. एक बार उनके पेरेंट्स बच्चों के साथ पानी के जहाज पर घूमने निकले. वो कई जगह गए.

इस दौरान नाइटिंगल ने कई शहर और उनका जीवन देखा. सफर के आखिर में उन्होंने ऐलान किया कि ईश्वर ने उन्हें अब मानवता की सेवा का आदेश दिया है.

Youtube Video



शादी नहीं की

फ्लोरेंस नाइटिंगेल ख़ूबसूरत थीं, पढ़ी-लिखी, क़ाबिल और समझदार थीं. मां-बाप दौलतमंद थे. उनके लिए शादी के बहुत से रिश्ते आए लेकिन उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. 1844 में फ्लोरेंस ने तय किया कि उन्हें नर्सिंग के पेशे में जाकर लोगों की सेवा करनी है.

प्रेम संबंध लंबा चला लेकिन टूट गया

हालांकि उनका एक लंबा प्रेम संबंध भी बना, जो टूट गया. इसके बाद उन्होंने रोम और पेरिस के अस्पतालों के दौरे करने शुरू किए. जर्मनी जाकर नर्सिंग की ट्रेनिंग ली. 1853 में फ्लोरेंस को लंदन के हार्ले स्ट्रीट अस्पताल में नर्सिंग की प्रमुख बन गईं.

अस्पताल में लोगों की तीमारदारी करतीं फ्लोरेंस नाइटिंगेल और उनकी टीम

पहली बार इस तरह की सैनिकों की तीमारदारी

1853 में क्रीमिया का युद्ध शुरू हो गया था. ब्रिटिश सैनिक अस्पतालों में घायल होकर बुरी स्थिति में थे. उनकी सही तरीके से तीमारदारी नहीं हो पा रही थी. लिहाजा फ्लोरेंस कई नर्सों के साथ वहां पहुंची. उन्होंने सैनिकों की सेवा शुरू की.हालांकि काफी सैनिकों की मौत हुई लेकिन फ्लोरेंस ने उनके भोजन से लेकर स्वच्छता और तीमारदारी में बड़ा योगदान दिया, जो लोगो को महसूस भी हुआ. उनकी इस सेवा से एक अंतर जरूर दिखा कि सैनिकों के मौत की संख्या घटने लगी.

नर्सिंग के पेशे का महत्व दिखाया

इसका फायदा ये हुआ कि फ्लोरेंस के काम की वजह से नर्सिंग के पेशे को काफ़ी सम्मान की नज़र से देखा जाने लगा. अस्पतालों में साफ़-सफ़ाई पर ज़ोर दिया जाने लगा. फ्लोरेंस को लोग जानने लगे. हालांकि वो जितनी मेहनत कर रही थीं, उससे उनकी सेहत गिरने लगी. उन्होंने ब्रिटेन के लोगों को एक बात और समझाई कि लोग बीमारी के दौरान कैसे एक-दूसरे के मददगार बन सकते है.

भारत के अस्पतालों की बेहतरी और पानी की स्वच्छता को लेकर नाइटिंगेल ने काफी काम किया

किस तरह की भारत की मदद

फ्लोरेंस नाइटिंगेल भारत में भी ब्रिटिश सैनिकों की सेहत को बेहतर करने के मिशन से जुड़ी थीं. फ्लोरेंस का ज़ोर भारत में साफ़ पानी की सप्लाई बढ़ाने पर भी था. फ्लोरेंस को भारत के हालात के बारे में 1906 तक रिपोर्ट भेजी जाती रही थी. इसमें उन्होंने बहुत कुछ सुधार भी कराया. इस लिहाज से भारत भी फ्लोरेंस नाइटिंगेल का क़र्ज़दार है.

मजबूत इरादों वाली महिला

लंबी उम्र और सेवा के लंबे करियर के बाद 1910 में फ्लोरेंस नाइटिंगेल का 90 साल की उम्र में देहांत हो गया. इसमें कोई शक नहीं कि वो मज़बूत इरादों वाली महिला थी. अपनी सेवा भावना की वजह से वो दुनिया की तमाम औरतों के लिए मिसाल बन गई. गणित और सांख्यिकी का उसका ज्ञान सैन्य अस्पतालों और आम लोगों की सेहत की देख-भाल करने वाले सिस्टम को सुधारने में बहुत कारगर साबित हुआ.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज