Antarctica के नीचे समुद्र ने खोले हमारी जलवायु के भविष्य के राज

Antarctica के नीचे समुद्र ने खोले हमारी जलवायु के भविष्य के राज
अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की चट्टानों के नीचे लंबे समय में होने वाले जलवायु परिवर्तन के संकेत मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ताजा शोध में अंटार्कटिका (Antarctica) की सबसे बड़ी समुद्री चट्टान (Ocean Cavity) के नीचे की प्रक्रियाओं ने भविष्य में हमारी जलावयु (Climate) में होने वाले बड़े परिवर्तनों के बारे में बताया है.

  • Share this:
सभी को पता है कि अंटार्कटिका (Antarctica) के आसपास महासागरीय गुफाएं (Occean Caivities) हैं इनके अस्तित्व से तो सब वाकिफ हैं, लेकिन इनका अवलोकन नहीं हुआ है. अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे महासागर में कैसी गतिविधि होती है. और कैसे बर्फ की बड़ी चट्टानें लहरों के साथ ऊपर नीचे होते हैं इसका हाल ही में अध्ययन किया गया है जिससे हमारी पृथ्वी की जलवायु (Climate) के बारे में काफी कुछ पता चला है.

बर्फ की चट्टानों की भूमिका
ये बर्फ की चट्टानें इस महाद्वीप पर मौजूद बर्फ को मजबूती प्रदान करती हैं और भविष्य में होने वाले समुद्र तल के ऊपर नीचे होने में अहम भूमिका निभाती हैं. द कनवर्शेसन में प्रकाशित इस अध्ययन के शोधकर्ताओं ने इस बात की पड़ताल की है कि समुद्री धाराओं की पिघलते अंटार्कटिका में क्या भूमिका है.

जलवायु परिवर्तन का असर अटार्कटिका पर सबसे ज्यादा
माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा बुरा असर अंटार्कटिका की बर्फ पर हुआ है और ये तेजी से पिघल रही है जिससे उसके आसपास के समुद्र का जलस्तर बढ़ने लगा है. अंटार्कटिका में रॉस आइस शेल्फ पृथ्वी की सबसे बड़ी बर्फ की तैरती चट्टान हैं. इसका क्षेत्रफल 480,000 वर्ग किलोमीटर है. यह चट्टान जो समुद्री गुफा छुपाती है, वहा अंटार्कटिका के समुद्री तट से 700 किमी दक्षिण की ओर जाती है और उसका बहुत सारा हिस्सा अभी तक देखा नहीं जा सका है. शोधकर्ताओं का कहना है कि वे जानते हैं की बर्फ नीचे से पिघलती है और गर्म महासागर के कारण यह होता है. लेकिन दुनिया के पास इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि बर्फ के नीचे पानी का मिश्रण कैसे होता है. अभी तक जलवायु संबंधी जितने भी मॉडल्स बनाए गए हैं उनमें इस पहलू को नजरअंदाज किया गया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि उनके जुटाए गए आंकड़े इस मामले में मददगार साबित होंगे.



Antarctica
पूरा दक्षिणी ध्रुव तीन गुना ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


दूसरी बार हुआ ऐसा अध्ययन
रॉस आइस शेल्फ का अध्ययन अभी तक केवल साल 1970 में एक अभियान ने किया गया था जो अजीब नतीजों के साथ लौटा था. तमाम तकनीकी सीमाओं के बावजूद उस अभियान में पाया गया था कि यह महासगारीय गुफा स्थिर नहीं नहीं हैं. इसमें कई तरह के पानी की सतहें हैं जिनमें तापमान और क्षारीयता की मात्रा अलग-अलग है.

बाकी दुनिया के मुकाबले तीन गुना ज्यादा रफ्तार से गर्म हो रहा है दक्षिणी ध्रुव

पहले नहीं हुए थे ऐसे अध्ययन
इसके बाद के अध्ययन या तो किनारे पर किए गए हैं  या फिर काफी ऊपर से किए गए हैं. उनसे यह तो पता चला है कि कैसे वह सिस्टम काम करता है, लेकिन शोधकर्ताओं को इसे अच्छे से समझने के लिए सैकड़ों मीटर गहराई में जाकर जानकारियां हासिल करनी पड़ी. 2017 में उन्होंने गर्म पानी क जेट का उपयोग करते हुए समुद्र के आंकड़े हासिल किए और वहां उपकरण छोड़ दिए जो सैटेलाइट के जरिए अब भी आंकड़े दे रहे हैं. यहां शोधकर्ताओं ने एक नदी और समुद्र के मिलन वाली बड़े मुहाने जैसी महासागरीय घटनाएं देखी जहां पूरी तरह से गर्म समुद्री जल महासागर की सतह पर आ रहा था जिसके ऊपर बर्फ का पिघला पानी था.

Antarcitica
अब तक के अध्ययन बताते हैं कि अंटार्कटिका में बर्फ तेजी से पिघल रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


हवा से तो होता है बचाव, लेकिन पानी से नहीं
सागरीय गुफा के ऊपर जो बहुत ही ठंडी हवा आती है उससे अंटार्कटिका की बर्फ तो बचा लेती है, लेकिन समुद्र के भीतर जो गर्म जलधाराएं आकर मिलती हैं उसके कुछ नहीं रोक पाता है. इसके अलावा लहरों की ऊपर नीचे की गतिविधियों के कारण पानी की सतह भी आपस में मिलती हैं और उनका कुछ हिस्सा भी मिलता है.

पानी की वजह से आते हैं भूकंप और सुनामी, शोध में पता चला कैसे

क्या होंगे नतीजे
रोज होने वाली यह घटना लंबे समय के लिए (करीब सैंकड़ों साल तक) प्रभाव डालती हैं. शोधकर्तां का मानना है कि उनके आंकड़े लंबे समय के होने वाले बदलाव को जानने में मददगार हो सकते हैं. मिसाल के तौर पर इससे पहले इस आइस शेल्फ के किनारे पर हुए अध्ययन से पता चला है कि कैविटी में पानी का एक हिस्सा एक से छह साल तक इस गुफा में रह सकताहै. लेकिन नए आंकड़े कहते हैं कि इस मामले में समग्र तरीके से ही नहीं सोचा जाना चाहिए. इन बर्फ की चट्टानों की अहमियत अगले कुछ सौ सालों में समुद्र तल का स्तर ऊंचा करने में अहम योगदान देगी. इसशोध से पता चला है कि अगर वायुमंडल में तापमान 2 डिग्री भी बढ़ा तो अंटार्कटिका की बर्फ की बड़ी चट्टानें पिघल जाएंगी और साल 2300 तक समुद्र तल का स्तर 3 मीटर ऊपर तक उठ जाएगा
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading