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हमारी गैलेक्सी का सबसे बुजुर्ग तारा समूह: जानकारियों का है इसमें भंडार

अंतरिक्ष में डार्कमैटर की मौजूदगी पर यह प्रयोग खास तरह से धरती पर किया गया था.  (सांकेतिक तस्वीर)

अंतरिक्ष में डार्कमैटर की मौजूदगी पर यह प्रयोग खास तरह से धरती पर किया गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

खगोलविदों को हमारी गैलेक्सी (Galaxy) का सबसे बुजुर्ग तारा समूह मिला है. यह हमारे गैलेक्सी मिल्की वे (Milky Way)के केंद्र में स्थित है.

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नई दिल्ली: धरती के वैज्ञानिक सुदूर अंतरिक्ष का अध्ययन करते हुए कई सवालों के जवाब ढूंढते हैं. इसमें उन्हें कई बार कुछ अजीब घटना नजर आ जाती है तो कई बार कुछ नए सवालों के जवाब मिल जाते हैं. जितना अंनत यह अंतरिक्ष है उतनी ही अनंत जानकारियों से भी भरा पड़ा है. हाल ही में एक नई खोज ने वैज्ञानिकों को एक साथ कई जानकारी दी. उन्हें हमारी गैलेक्सी (Galaxy) के सबसे पुराने चीजें भी मिलीं.

सबसे उम्रदराज ग्लोबुलर क्लस्टर
चिली स्थित सेरो टोलोलो ऑबजर्वेटरी की NGC 6652 के स्पैट्रम के अध्ययन से पता चला है कि वह हमारी गैलेक्सी का सबसे पुराना खगोलीय पिंड है. अध्ययन से पता चला है कि यह NGC 6652.4.05957 ग्लोबुलर क्लस्टर 13.6 अरब साल पुराना है और इससे पुराना कोई भी पिंड अब तक हमारी गैलेक्सी में नहीं खोजा गया है. इस ग्लोबुलर क्लस्टर की उम्र की पुष्टि दूसरे आंकड़ो  से भी हो रही है.

क्या होते हैं ग्लोबुलर क्लस्टर
ग्लोबुलर क्लस्टर एक तारा समूह होता है जो किसी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित होता है. यह समूह सर्पिल (Spiral) आकार का होता है. इसमें तारे बहुत अधिक गुरुत्व बल से एक दूसरे से बंधे से रहते हैं. इसी गुरुत्व की वजह से उनका आकार सर्पिल होता है.

स्पैक्ट्रम का किया अध्ययन
ग्लोबुलर क्लस्टर हमारी पृथ्वी से हजारों प्रकाश वर्ष दूर होते हैं. उनके केवल सबसे ज्यादा चमकने वाले तारों का प्राकश ही हम तक पहुंच पाता है. एलुम्ना की कजान फेडरल यूनिवर्सिटी के मार्गरीटा शारीना ने कई साल पहले तारा समूह के स्पैक्ट्रम के शोध करना का इरादा किया.

40 ग्लोबुलर क्लस्टर का भी किया अध्ययन
मार्गरीटा ने एसोसिएट प्रोफेसर ब्लादिस्लाव शिमांस्की के साथ क्लस्टर के स्पैक्टम का मॉडल बनाने के लिए एक खास सॉफ्टवेयर पैकेज बनाया. दोनों ने 40 ग्लोबुलर क्लस्टर का अध्ययन किया और उनकी आधारभूत विशेषताओं का पता लगाया.



इस तारा समूह की उम्र 13.6 अरब साल है.


खास तत्वों की उपस्थिति का भी किया अध्ययन
इन्हीं में से एक गुण जिसका दोनों वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया वह था मैटेलिसिटी (Metallicity). खगोलविज्ञान और उससे संबंधित अन्य विज्ञानों में मेटल का मतलब हिलियम और हाइड्रोडन के अलावा वे सारे तत्व (Elements) होते हैं जो अंतरिक्ष में पाए जाते हैं. यानि खगोल विज्ञान में कार्बन, ऑक्सीजन नाइट्रोजन जैसे पदार्थ भी मैटल कहे जाते हैं.

तो क्या होती है यह मैटेलिसिटी
मैटेलिसिटी का सीधा अर्थ है कि किसी खोगलीय पिंड में हाइड्रोन और हीलियम के अलावा पाए जाने वाले तत्वों की कितनी बहुतायत है. मार्गरीटा और शिमांस्की ने इसका भी इन ग्लोबुलर क्लस्टर में अध्ययन किया. शिमांस्की का कहना है कि लंबे समय से वैज्ञानिक यह मानते थे कि गैलेक्सी का कोई पिंड जितना युवा होगा उसकी मैटेलिसिटी अधिक होगी. 20वीं सदी में यह मान्यता खत्म होने लगी थी. अपने शोध में दोनों वैज्ञानिकों ने पाया कि NGC 6652.4.05957 ग्लोबुलर क्लस्टर में मेटेलिसिटी असामान्य रूप से ज्यादा थी.

और आंकड़े भी दे सकेंगे कारगर जानकारी
शिमांस्की का कहना है कि उनकी जुटाई जानकारी से साफ है कि इन ग्लोबुलर क्लस्टर के बारे में जानने की अभी  काफी गुंजाइश है. दुनिया भर में टेलिस्कोप और ऑबजर्वेटरी से बहुत सारे आंकड़े जमा हो रहे हैं. ये जरूर इस बारे में बहुत कुछ बताने में मददगार होंगे.

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