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सपने में आया था स्पर्म बैंक का खयाल, आज 80 देशों को करते हैं सप्लाई

News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 2:59 PM IST
सपने में आया था स्पर्म बैंक का खयाल, आज 80 देशों को करते हैं सप्लाई
इस बैंक की स्थापना शोऊ ओले नाम के व्यक्ति ने की थी

सायरोस इंटरनेशनल (Cryos International) दुनिया के 80 देशों में स्पर्म भेजता है और अभी तक 27 हजार बच्चे यहां के स्पर्म के इस्तेमाल से जन्म ले चुके हैं.

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  • Last Updated: February 12, 2020, 2:59 PM IST
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साल 2012 में एक हिंदी फिल्म आई थी विकी डोनर (Vicky Donor). ये फिल्म स्पर्म डोनेशन (Sperm Donation) और स्पर्म बैंक (Sperm Bank) पर आधारित थी जिसने भारतीय दर्शकों और आम लोगों में स्पर्म डोनेशन को लेकर उत्सुकता पैदा की थी. इसके बाद मीडिया में फिल्म से प्रभावित होकर स्पर्म डोनेशन और इससे जुड़े कारोबार पर कई स्टोरी प्रकाशित की गईं. भारतीय रूढ़िवादी समाज में आज भी स्पर्म डोनेशन जैसी बाते हैं टैबू हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों में आईवीएफ जैसी उपचार पद्धति ने देश में जोर पकड़ा है.

स्पर्म बैंक तकरीबन हर देश में हैं लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा स्पर्म बैंक डेनमार्क में है. इसे सायरोस इंटरनेशनल के नाम से जाना जाता है. ब्रिटिश अखबार मिरर से बातचीत में इस बैंक ने एक बार कहा था कि हम सिर्फ अंटार्कटिका में स्पर्म नहीं भेजते क्योंकि पेंग्विन्स को इसकी जरूरत नहीं होती.

डेनमार्क के आरहस शहर में स्थित स्पर्म बैंक से जर्मनी, बेल्जियम, रोमानिया, सायप्रस, फिनलैंड, कोपेनहेगन, निदरलैंड और रूस सहित न जाने कितने देशों में प्रतिदिन स्पर्म की स्पलाई की जाती है. इस स्पर्म बैंक की स्थापना 1987 में की गई थी. 33 साल बीत जाने के बाद अब ये बहुत बड़ा आकार ले चुका है. सायरोस इंटरनेशनल दुनिया के 80 देशों में स्पर्म भेजता है और अभी तक 27 हजार बच्चे यहां से लिए गए स्पर्म का इस्तेमाल कर पैदा किए जा चुके हैं.

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30 पाउंड से 300 पाउंड तक होती है कीमत
इस बैंक से स्पर्म इस्तेमाल करने की कीमत 30 पाउंड से 300 पाउंड तक है. ये कीमतें डोनर की पहचान बताने या न बताने से लेकर देशों तक से तय होती है. यानी कोई स्पर्म अगर किसी ज्ञात डोनर का होगा तो उसकी कीमत ज्यादा होती है. साथ ही किस देश का स्पर्म है, ये भी कीमतें तय करता है.

5 से 10 प्रतिशत तक होता है यूके में इस्तेमालबैंक के मुताबिक साल भर में करीब 10 प्रतिशत तक स्पर्म डोनेशन का इस्तेमाल तो सिर्फ यूनाइटेड किंगडम द्वारा किया जाता है. सालभर के दौरान यूके में 300 बच्चे सायरोस के स्पर्म डोनेशन से ही पैदा होते हैं.

सपने में आया था ये बैंक खोलने का खयाल
इस बैंक की स्थापना शोऊ ओले नाम के व्यक्ति ने की थी. उन्होंने एक ब्रिटिश अखबार को दिए इंटरव्यू के दौरान बताया था कि उन्हें इसका सपना आया था. साल 1981 में उन्होंने ग्रेजुएशन किया ही था और इसी साल उन्हें स्पर्म बैंक बनाने का सपना आया.

एक आर्टिस्ट जो इस बैंक के लिए स्पर्म डोनर भी हैं उन्होंने कई बड़ी पेंटिंग्स बनाई हैं. ये पेंटिंग्स आपको गूगल पर स्पर्म की किसी भी दूसरी तस्वीर से मिलती-जुलती लगेंगी. ये पेंटिग्स सायरोस के दफ्तर में हर कमरे के बार लटकी हुई हैं. ये पेंटिंग्स शोऊ ओले ने ही बनवाई हैं.



सिंगल मदर की संख्या बढ़ी
सायरोस के क्लाइंट्स की संख्या में पिछले सालों में सिंगल मदर की संख्या बहुत तेजी के साथ बढ़ी है. ऐसी सफल महिलाओं जो करियर में तो सक्सेसफुल हैं लेकिन शादी नहीं करना चाहतीं तो सायरोस का सहारा ले रही हैं.

ज्यादातर स्टूडेंट्स डोनेट करते हैं स्पर्म
सायरोस में ज्यादातर स्पर्म डोनेटर आहरस के ही यूनिर्सिटी स्टूडेंट्स हैं. ओले का मानना है कि इन स्टूडेंट्स से स्पर्म डोनेशन करवाना आसान है.
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First published: February 12, 2020, 2:53 PM IST
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