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ओमिक्रॉन के बारे में वो 4 सवाल जिसे जानने के लिए जूझ रहे हैं वैज्ञानिक

ओमिक्रॉन के बारे में वो 4 सवाल जिसे जानने के लिए जूझ रहे हैं वैज्ञानिक

ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) के बारे में स्पष्ट जानकारी के लिए वैज्ञानिक अभी और ज्यादा आंकड़े  चाहते हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) के बारे में स्पष्ट जानकारी के लिए वैज्ञानिक अभी और ज्यादा आंकड़े चाहते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोरोना वायरस (Corona Virus) के खौफ से अभी पूरी दुनिया उबरी भी नहीं थी कि उसके ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) ने दहशत मचा दी है. अभी दुनिया के कई देशों ने विदेशी यात्राओं (Foreign Travelling) पर बैन लगा दिया है या यात्राओं के नियम बहुत ही ज्यादा कड़े कर दिए हैं. इसके अलावा उन लोगों पर नजर रखी जा रही है जो पिछले दो सप्ताह में विदेश या खास तौर दक्षिण अफ्रिका से आए हैं. इसके बारे मे सबकुछ अभी शुरुआती आधार पर ही पता चला है, फिर एतिहात पूरी बरती जा रही है. वैज्ञानिक इसके बारे में कुछ अहम सवालों के जवाब खोज रहे हैं.

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    कोरोना वायरस (Coronavirus) के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) की अब पूरी दुनिया (World) में दहशत फैलती दिखाई दे रही है. दुनिया के बहुत सी आबादी को टीका नहीं लगा है और अभी तक इस वेरिएंट के प्रभाव और टीकों की इस पर कारगरता की सही और पूरी जानकारी तक सामने नहीं आई है. लेकिन इसके बहुत तेजी से फैलने की क्षमता ने दुनिया के सभी देशों को एतिहाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है. वहीं वैज्ञानिक भी ओमिक्रॉम को लेकर चार प्रमुख सवालों क जवाब खोजने में लगे हैं.

    चिंता का कारण?
    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी कहा कि यह वेरिएंट चिंता का कारण जरूर है लेकिन यह घबराने की वजह नहीं हैं. इसके प्राथमिक प्रमाण इसके तेजी से फैलने की क्षमता के बारे में बताते है. अमेरिका के शीर्ष संक्रमण रोग चिकित्सक के तौर पर पहचाने जाने वाले डॉ एंथोनी फॉसी ने बाइडेन को बताया है कि विस्तृत जानकारी में आने में करीब दो सप्ताह का समय लगेगा. ऐसे में फिलहाल हर देश में बचाव और टीके पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

    सबसे बड़ा सवाल
    इस समय वैज्ञानिक ओमिक्रॉन वेरिएंट के बारे में चार प्रमुख बातें जानने में लगे हैं. इनमें सबसे पहला सवाल यही है कि क्या उनके देश में ओमिक्रॉन संक्रमण आ चुका है या नहीं. भारत में अभी तक किसी ऐसे मामले की पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिका का भी उन देशों की सूची में नाम नहीं आया है जहां इस तरह के संक्रमण मिले हैं. एक तरफ ओमिक्रॉन संक्रमण वाले देशों की संख्या में धीरे धीरे इजाफा हो रहा है, तो वहीं दूसरे देश भी पाबंदियों को गंभीरता से ले रहे हैं और जाचों में कोताही नहीं बरत रहे हैं.

    फैल तो पूरी दुनिया में रहा है
    अमेरिका की बात की जाए तो वहां सीडीसी को वहां अभी तक कोई भी ऐसा मामला दिखाई नहीं दिया है. लेकिन अमेरिका कोरोना वायरस सैम्पल की सीक्वेंसिंग में कई देशों की तुलना में काफी पीछे है. बिजनेस इंसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस बात की संभावना ज्यादा है कि यह वेरिएंट अमेरिका में आ चुका होगा. यह यूके, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल और हॉन्गकॉन्ग में पहले ही आ चुका है.

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    ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) के बारे में शुरुआती जानकारी सावधान रहने का इशारा कर रही है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्या ओमिक्रॉन डेल्टा से ज्यादा तेज फैलता है
    शुरुआती जानकारी तो यही कहती है कि यह बिलकुल सच है. इसकी कई वजह हैं.  सबसे बड़ा कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन का इसे खतरनाक कहना ही है और ऐसा कहते समय उसने यही कहा है कि यह बहुत तेजी से फैलता है. लेकिन प्रमाणिक तौर पर यह दावा अभी नहीं किया जा सकता है और समस्या ये है कि प्रमाणों का इंतजार भी नहीं किया जा सकता है. सीडीसी के मुताबिक डेल्टा में जहां 11-15 म्यूटेशन दिखाई दिए थे. अब तक ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में ही 30 से ज्यादा म्यूटेशन दिखे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से ओमिक्रॉन फैल रहा है यह सही भी लगता है.

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    क्या ओमिक्रॉन ज्यादा मारक है
    यह कहना जल्दबाजी हो सकती है. अभी तक की जानकारी बताती है कि ओमिक्रॉन हलकी बीमारी पैदा कर सकती है.  दक्षिण अफ्रिका में यह युवाओँ में ज्यादा दिखा है. चिंता की बात की यह है कि अभी तक माना जाता रहा कि युवाओं में कोविड संक्रमण कम दिखाई देता है या उनमें गंभीर बीमारी विकसित नहीं होती है. लेकिन दक्षिण अफ्रीका में केवल चौथाई युवाओं को ही टीका लगा पाया था. ऐसे में नतीजों पर पहुंचने के लिए अभी और आंकड़ों  की जरूरत है.

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    ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) पर वैक्सीन पूरी तरह अप्रभावी होगी ऐसा कतई नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्या ओमिक्रॉन वैक्सीन पर हावी हो सकता है
    इस पर भी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है. इसकी पुष्टि के लिए और समय और शोध की जरूरत होगी. स्पाइक प्रोटीन के अलावा ओमिक्रॉन में दूसरे तरह के म्यूटेशन भी हुए हैं. वैज्ञानिक म्यूटेशन के मामले में सबसे खराब म्यूटेशन के लिहाज से भी अध्ययन किया जा रहा है. वैक्सीनेशन के प्रभाव का नाकाम हो जाएगा, ऐसा दावा भी करने की स्थिति तो दूर दूर तक नहीं  दिखती. झगड़ा हमेशा कितने का ही था और यह अब भी कायम है.

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    फिलहाल एतिहात ही उपाय है. यही वजह से वैक्सीनेशन, आइसोलेशन, मास्क जैसे उपायों पर एक बार और जोर दिया जा रहा है. वैज्ञानिकों को और ज्यादा आंकड़े चाहिए जिसके लिए समय की जरूरत है. फिलहाल सावधानी ही काफी मददगार हो सकती है. वहीं वैज्ञानिक यह भी सलाह दे रहे हैं कि वैक्सीन को दोनों डोज भी लगे हों तो खुद को सुरक्षित नहीं मानने में ही भलाई है.

    Tags: Research, Science, World

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