Aadhaar : प्लान से कानून और विवाद की कहानी, पढ़ें आगे क्या है चुनौतियां?

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Updated: September 26, 2018, 12:10 PM IST
Aadhaar : प्लान से कानून और विवाद की कहानी, पढ़ें आगे क्या है चुनौतियां?
एक प्रोजेक्ट के तौर पर आधार की शुरुआत 2009 में हुई थी.

आधार से जुड़े केस सुप्रीम कोर्ट में पिछले 6 सालों से पेंडिंग थे. जिसमें अब तक अलग-अलग वक्त पर कुल 26 जज इस मामले में सुनवाई कर चुके हैं.

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बहुचर्चित आधार मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. इससे साफ हो गया है कि सरकार की इस फ्लैगशिप स्कीम को लागू किया जाना अनिवार्य है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 10 मई को इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. बता दें कि इस मामले की अंतिम सुनवाई इस साल 17 जनवरी से 10 मई तक चली. इस दौरान 38 अलग-अलग दिनों में इसकी सुनवाई हुई. जिन मामलों में सुनवाई हुई उसमें सारी ही रिट पेटिशन, ट्रांसफर पेटिशन और एप्लिकेशन के अलावा पांच अवमानना याचिकाएं भी थीं.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इन सवालों के जवाब दिए-

आधार संवैधानिक रूप से अनिवार्य, इन चीजों के लिए रहेगा अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

1. क्या राज्य अपने नागरिकों को उनकी बायोमीट्रिक जानकारी शेयर करने के लिए बाध्य कर सकता है? क्या यह नागरिकों की प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं होगा?

2. आधार जिस तरह से नागरिकों की बायोमीट्रिक जानकारियां इकट्ठा कर रहा है क्या इतनी जानकारियां राज्य को एक सर्विलांस स्टेट में बदल सकती हैं?

3. क्या सरकारों को गैर-आधार कार्ड वाले लोगों को अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दायरे से बाहर करने का हक है? क्या आधार वाकई लोककल्याणकारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है?

4. आधार प्रोजेक्ट के लिए बड़े स्तर पर इकट्ठा किए गए डेटा क्या पूरी तरह से सुरक्षित है?
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कुछ ऐसा रहा है आधार का इतिहास
आधार की शुरुआत 2009 में हुई थी. इसके कर्ता-धर्ता थे नंदन निलेकणी. जिन्होंने तत्कालीन UPA सरकार को आधार की योजना सुझाई थी. आधार को तब एक साइड प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था. और यह योजना आयोग के अंतर्गत आता था.

2016 में वर्तमान NDA सरकार ने बिल पास करके UIDAI का गठन किया. इसका पूरा नाम है, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया. इस तरह से आधार को कानूनी अधिकार मिल गया. इस बिल को एक मनी बिल के तौर पर पास किया गया था. ताकि उस वक्त सरकार के पास इसे राज्यसभा में जरूरी बहुमत न होने के बावजूद भी इस बिल के पास न होने में कोई समस्या न आए.

आधार से जुड़े केस सुप्रीम कोर्ट में पिछले 6 सालों से पेंडिंग थे. जिसमें अब तक अलग-अलग वक्त पर कुल 26 जज इस मामले में सुनवाई कर चुके हैं. इन मामलों में हाईकोर्ट के पूर्व जज केएस पुट्टास्वामी की याचिका सहित करीब 31 याचिकाएं दायर की गई थीं. 10 मई की सुनवाई में अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को जानकारी दी थी कि 1973 के ऐतिहासिक केशवानंद भारती मामले के बाद सुनवाई में लगे दिनों के संदर्भ में यह 'दूसरा सबसे लंबा' मामला बन गया है.

आधार पर शुरुआत से ही उठ रहे थे सवाल
सिविल सोसाइटी ने इसका शुरुआत से ही विरोध किया था. उन्होंने आधार के ऊपर प्रश्न खड़े किए थे. उनका यह भी कहना था कि इसे कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा? बता दें शुरुआत में आधार कानून नहीं था, जैसा ऊपर लिखा है इसे कानून 2016 में बनाया गया. तब आधार पर उठने वाले दूसरे सवाल थे -

  1. आधार का प्रयोग किस तरह से होगा?

  2.  सरकार नागरिकों का बेहद पर्सनल माना जाने वाला बायोमीट्रिक डेटा क्यों इकट्ठा कर रही है?

  3. उनका कहना था कि आधार को ऐसे नहीं शुरू करना चाहिए. अगर सरकार ऐसा कोई प्रोजेक्ट शुरू कर रही है तो उसे बाकायदा उसके लिए कानून बनाना चाहिए.


कई बार आधार की गड़बड़ियों की बात भी सामने आई
आधार अपनी शुरुआत से ही किसी न किसी कॉन्ट्रोवर्सी में फंसा रहा है. सबसे हालिया वाकया एक पैच का है जिसके जरिए लोग कथित तौर पर कुछ पैसे खर्च कर एक कोड जनरेट कर आधार में नई जानकारियां जोड़ रहे थे. इसके पहले भी आधार डेटा की सिक्योरिटी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. इसके अलावा आधार की सुरक्षा, उससे जुड़ी जानकारी शेयर करने आदि से जुड़ी बातें भी ख़बरों में आती रही हैं. एक अख़बार ने यह दावा भी किया था कि कुछ वाट्सएप ग्रुप मात्र 500 रुपयों में लोगों की आधार जानकारी बेच रहे हैं.

कुछ लोककल्याणकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य है आधार
2015 में 9 जजों की एक बेंच ने इस मामले की सुनवाई शुरू की कि क्या नागरिकों के पास गोपनीयता यानी प्राइवेसी का अधिकार है? इस मामले में 2017 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से फैसला आया कि लोककल्याणकारी कार्यक्रमों को छोड़कार बाकी चीजों के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता. जिन वेलफेयर स्कीम में आधार अनिवार्य है, वे हैं -
1. PDS
2. LPG सब्सिडी
3. पेंशन

विशेषज्ञ आधार नंबर के बजाए चाहते हैं पंचिग बेस्ड कार्ड सेवा
न्यूज 18 से एक विशेष बातचीत में  ज्यां द्रेज ने OTP बेस्ड आधार सेवा को झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों की दूरस्थ जगहों के लिए फेल बताया था. उन्होंने इससे जुड़े कई आंकड़े पेश करते हुये सुझाया था कि उनके लिए किसी पंचिंग कार्ड जैसी व्यवस्था की जानी चाहिये. ताकि उन्हें खराब नेटवर्क, खराब इंटरनेट या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फेल होने की स्थिति में भी राशन पाने से वंचित न होना पड़े.

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First published: September 26, 2018, 12:00 PM IST
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