आज ही के दिन इजराइल ने आजाद घोषित किया था खुद को

इजराइल (Israel) की आजादी की घोषणा के बाद ही उसका पड़ोसियों से संघर्ष शुरू हो गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

14 मई 1948 को इजराइल (Israel) ने खुद को आजाद (Independent country) घोषित किया था. इसके लिए और इस दिन बाद उसका लंबा संघर्ष रहा, आज वह खुद को एक बहुत ताकतवर देश बना चुका है.

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    इस समय एक बार फिर से इजराइल-फिलीस्तीन विवाद (Israel Philistine Dispute) चर्चा में हैं. इजराइल (Israel) देश बनने के पीछे एक बहुत बड़ा और लंबा संघर्ष छिपा है. 14 मई 1948 को ही इजराल ने खुद को एक आजाद देश (Independent country) घोषित किया था और तब से आज तक वह अपने अस्तित्व के रक्षा कर रहा है और उसे चुनौती देने वाली ताकतें चारों ओर से उसे घेरे हैं.
    यहूदियों का एक देश
    इजराइल का निर्माण अपने आप में एक अनोखा इतिहास है. 19वीं सदी के अंत इजराइल देश की परिकल्पना जन्मी जब पूरी दुनिया में यहूदियों का अपना खुद का कोई देश नहीं था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इजराइल ने खुद को एक देश घोषित किया और अपने दुश्मनों को ना केवल हराया बल्कि यह भी साबित किया कि वह एक मजबूत राष्ट्र है.

    अरब और यहूदी
    द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मध्य पूर्व में हजारों यहूदी शरणार्थी इजराइल में शरण मांग रहे थे. ब्रिटेन ने ऐसा हल निकलने का प्रयास किया जिस पर अरब और यहूदी दोनों ही समुदायों सहमत हो सकें. संयुक्त राष्ट्रसंघ ने फिलीस्तीन के विभाजन की घोषणा की जिसमें एक अरब और एक यहूदी राष्ट्र के होने के बात थी. इस घोषणा को 29 नवंबर 1947 मान्यता दी गई. लेकिन अरब समुदाय को यह घोषणा सही नहीं लगी और इससे गृह युद्ध की स्थिति बन गई.

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    आजादी के 73 साल बाद भी इजराइल (Israel) के दुशमनों से निजात नहीं मिली है.


    आजाद होते ही युद्ध
    14 मई 1948 को डाविड बेन गुरियॉन ने मध्य पूर्व में स्वतंत्र राज्य इस्राएल की स्थापना की घोषणा की. वे यहूदियों के इस नए देश के पहले प्रधानमंत्री भी बने. लेकिन इस घोषणा के तुरंत बाद ही सीरिया, लीबिया और इराक ने इजराइल पर हमला कर दिया जो इजराइल अरब युद्ध की शुरुआत बना. इस युद्ध में साऊदी अरब, मिस्र और यमन भी शामिल हो गए. एक साल बाद युद्ध विराम के बाद जोर्डन और इजराइल के बीच नई सीमा रेखा बनाई गई जिसे हरी रेखा कहा गया और गाजा पट्टी पर मिस्र का अधिकार हो गया. इजराइल को 11 मई 1949 को संयुक्त राष्ट्र से मान्यता मिली.

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    हमेशा ही दुश्मनों का सामना
    इजलाइल को हमेशा ही दुश्मनों का सामना करना पड़ा आजादी के बाद उसके बार बार युद्ध में खींचा गया. उसके नागरिकों पर हमले हुए लेकिन फिर भी इस देश ने दुशमनों के हमेशा ही दांत खट्टे किए. इजराइल की जासूसी संस्था मोसाद दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी मानी जाती है. जिसने कई नामुमकिन लगने वाली वारदातों को अंजाम दिया है.

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    यरुशलम (Jerusalem) में दुनिया के तीन धर्म- यहूदी, इस्लाम, और ईसाई धर्म के पवित्र स्थल हैं. (फाइल फोटो)


    तीन देशों के पवित्र स्थल
    इजराइल की राजधानी येरुशलम दुनिया के तीन धर्मों का प्रमुख तीर्थ स्थल है जिनको मानने वाले पूरी दुनिया में. इसे इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्म के लोग बहुत पवित्र जगह मानते हैं. येरुशलम प्राचीन यहूदी राज्य का केन्द्र और राजधानी रहा है. माना जाता है कि यहीं यहूदियों का परमपवित्र सोलोमन मन्दिर हुआ करता था, जिसे रोमनों ने नष्ट कर दिया था. ये शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है और यहीं से हज़रत मुहम्मद जन्नत गए थे.

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    आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से संघर्ष कर रही है. इजराइल के सभी नागरिकों को टीके लगने वाले हैं और वह कोरोना संक्रमण से पूरी तरह से मुक्त होने की ओर है. इस देश के हर नागरिक में का भाव केवल एक भावना ही नहीं, बल्कि एक मजबूत अनुशासन है जो हर तरह की मुसीबतों से लड़ने को तैयार रहता है.