केशुभाई ने गुजरात में बीजेपी को जमाया, सीएम बने लेकिन फिर विद्रोह भी किया

एक जमाने में गुजरात बीजेपी के सबसे दमदार नेता थे केशुभाई पटेल लेकिन फिर उनके सितारे ढलते चले गए.
एक जमाने में गुजरात बीजेपी के सबसे दमदार नेता थे केशुभाई पटेल लेकिन फिर उनके सितारे ढलते चले गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 2:18 PM IST
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एकजमाने में बीजेपी को गुजरात में जमाने वाले और राज्य के सबसे ताकतवर क्षत्रप माने जाने वाले केशुभाई पटेल का सितारा सूबे की सियासत में खासा बुंलद था. वो राज्य में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री थे. माना जाता था कि गुजरात में बगैर उनकी मर्जी के बीजेपी में पत्ता भी नहीं खड़क सकता. कुछ लोग उन्हें सियासत में गुजरात में बीजेपी का लौहपुरुष भी कहते थे लेकिन उनका सितारा ऐसा ढला कि फिर बिल्कुल ही हाशिए पर चले गए.

ये 1995 की बात है. इससे पहले गुजरात में आमतौर पर कांग्रेस की ही सरकार बनती आ रही थी. बस दो-एक बार जनता पार्टी या जनता मोर्चा ने वहां सरकार बनाई थी. लेकिन 90 के दशक के बाद बीजेपी गुजरात में अपनी जडे़ं जमाने लगी थी. जिस बीजेपी नेता का वहां सबसे ज्यादा असर था, वह थे केशुभाई पटेल.

भारीभरकम पर्सनालिटी वाले केशुभाई की जहां राज्य के असरदार पटेलों में जबरदस्त पकड़ थी, वहीं उन्हें मजबूत संगठनकर्ता और जनता के बीच लोकप्रिय नेता माना जाता था.



संघ में थीं केशुभाई की जड़ें 
जब 1980 के दशक में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की स्थापना हुई तो वो उसके शुरुआती सदस्यों में थे. उनकी जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में थीं. 1945 में ही वो संघ से जुड़ गए थे. बाद में लंबे समय तक प्रचारक रहे. उन्होंने जमीनी स्तर पर बहुत काम किया. जब देश में 1975 में आपातकाल लगा तो वो जेल भी गए.

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जनसंघ और बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे
1960 में जब जनसंघ की स्थापना हुई तो वो उसके संस्थापक सदस्यों में थे. 1975 में जब पहली बार कांग्रेस को राज्य की सत्ता से बाहर होना पड़ा, तब वो उस जनता मोर्चा में शामिल थे, जिसने तब सरकार बनाई थी. ये मोर्चा जनसंघ और कांग्रेस (ओ) ने मिलकर बनाया था.

इसके बाद वो गुजरात में दो बार जब जनता दल और जनता मोर्चा की सरकार बनी तो वो उसमें शामिल रहे. वो कई बार विधानसभा के लिए चुने गए तो 1977 में लोकसभा के लिए चुने गए.

गुजरात में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री 
1995 के चुनावों में जब बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में जीत के बाद सरकार बनाई तो केशुभाई निर्विवाद तौर पर सबसे ताकतवर और शक्तिशाली नेता के रूप में उभरकर सामने आए. वो राज्य में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने. आज भी लोग मानते हैं कि केशुभाई की भूमिका राज्य में बीजेपी को जमाने में सबसे ज्यादा रही.

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07 महीने बाद ही विद्रोह हो गया
लेकिन केशुभाई मुश्किल से 07 महीने ही मुख्यमंत्री रह पाए. इसके बाद उन्हें बागडोर सुरेश मेहता को देनी पड़ी. उनके खिलाफ बीजेपी के ही शंकरसिंह बाघेला गुट ने विद्रोह कर दिया था. 1998 के विधानसभा चुनावों में केशुभाई पटेल की अगुआई में बीजेपी पुनः सत्ता में लौट आई और वह फिर 4 मार्च 1998 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने.

फिर बीजेपी में किनारे होने लगे
2 अक्टूबर 2001 को पटेल ने अपने ख़राब स्वास्थ्य के कारण मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि इसकी वजह ये बताई गई कि उनके खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और खराब प्रशासन के आरोप थे. लिहाजा बीजेपी आलाकमान ने उन्हें पद से हटाने का फैसला कर लिया था. तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने.

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फिर बीजेपी से अलग होकर नई पार्टी बनाई
इसके बाद केशुभाई के सितारे गुजरात में बीजेपी की राजनीति में ढलते चले गए. वो सूबे की राजनीति में किनारे होने लगे. उनका दबदबा खत्म होता सा लगा. ऐसे में जब 2012 में बीजेपी छोड़कर गुजरात परिवर्तन पार्टी का गठन किया, तो लोगों को लग रहा था कि वो शायद ऐसा करके बीजेपी का नुकसान कर सकते हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बाद में उन्हें अपनी इस पार्टी का भारतीय जनता पार्टी में विलय करना पड़ा. वर्ष 2014 से वो सक्रिय राजनीति से करीब करीब किनारे हो चुके थे.
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