Explained: क्या Corona से उबर चुके लोगों के लिए वैक्सीन की 1 डोज ही काफी है?

ताजा शोध में निकलकर आया कि कोरोना सर्वाइवर के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज का खास फायदा नहीं (Photo-  news18 English Reuters)

ताजा शोध में निकलकर आया कि कोरोना सर्वाइवर के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज का खास फायदा नहीं (Photo- news18 English Reuters)

अमेरिका की पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी (University of Pennsylvania) के ताजा शोध में निकलकर आया कि कोरोना सर्वाइवर के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज का खास फायदा नहीं. एक ही डोज में उनके भीतर पर्याप्त एंटीबॉडी (single dose of vaccine enough for Covid-19 survivors) बन जाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 9:10 AM IST
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कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार 39वें दिन बढ़ा है. रविवार को इसके संक्रमितों की संख्या पौने 3 लाख के पार हो गई. इस बीच टीकाकरण अभियान में भी तेजी आ चुकी है. वैक्सीनेशन का आंकड़ा 12 करोड़ से ऊपर जा चुका. विशेषज्ञ इस बीच एक नई बात लेकर आए हैं. कुछ एक्पर्ट्स ने स्टडी के आधार पर कहा कि एक बार कोरोना संक्रमण हो जाने के बाद कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक लेना ही काफी होता है. इस एक डोज में ही शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडी बन जाती है.

क्या कहता है शोध

अमेरिका की पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोध में ये बात निकलकर आई कि संक्रमित हो चुके लोगों के लिए वैक्सीन की पहली खुराक ही काफी होगी. इससे शरीर में रोग से लड़ने के लिए इतनी क्षमता आ जाएगी कि दूसरे डोज का खास फायदा नहीं. बता दें कि फिलहाल हमारे देश समेत पूरी दुनिया में जितनी भी कोरोना वैक्सीन्स बनी हैं, वो डबल डोज हैं. इसके तहत पहली वैक्सीन डोज लेने के निश्चित अंतराल के बाद दूसरी डोज लेना जरूरी है. इससे शरीर में बीमारी से लड़ने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडी बन जाती है.

One dose of vaccine enough for COVID19 survivors
वैक्सीन के कारगर तरीके से काम करने के लिए जरूरी है कि दोनों डोज के बीच समय का सही फासला हो - सांकेतिक फोटो (pixabay)

अगर दूसरा डोज नहीं लगवाया

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अगर आप नियत समय पर डोज नहीं लेते हैं तो वैक्सीन का वैसा असर नहीं होगा जैसा कि होना चाहिए. वैक्सीन के कारगर तरीके से काम करने के लिए यह भी जरूरी है कि दोनों डोज के बीच समय का सही फासला हो जैसा कि निर्धारित किया गया है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति दूसरा डोज समय पर नहीं लगवा पाता है तो समस्या हो सकती है.

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क्या मुश्किल है डबल डोज में 

हालांकि इसमें कई समस्याएं आ रही हैं. जैसे वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के लिए कई बार लोग समय पर नहीं पहुंच पाते या फिर वैक्सीन के स्टॉक में भी समस्या की बात की जा रही है. इसी बीच वैज्ञानिकों का नया शोध राहत लेकर आया है.

क्या किया गया रिसर्च में 

रिसर्च के लिए 44 लोगों की दो टीमें बनाई गईं. इसमें एक ग्रुप वो था, जो कोविड संक्रमण का शिकार नहीं हुआ था. इसे कोविड नाइव (COVID naive) कहा गया. इनके शरीर का ब्लड सैंपल दोनों डोज के दौरान, उससे पहले और बाद में लिया गया. इस दौरान देखा गया कि इनके शरीर में वैक्सीन की दोनों डोज जाने के बाद ही इनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय हुआ.

One dose of vaccine enough for COVID19 survivors
कई बार लोग समय पर नहीं पहुंच पाते या फिर वैक्सीन के स्टॉक में भी समस्या की बात की जा रही है (Photo- news19 creative)


कोविड सर्वाइवर के लिए ये नतीजे आए

दूसरी ओर दूसरे समूह में वे लोग थे, जो एक बार कोविड संक्रमण का शिकार हो चुके थे. इन्हें वैक्सीन की पहली डोज मिलने के बाद ही दिख गया कि शरीर में एंटीबॉडी उच्च स्तर पर हैं और अगर ये दोबारा वायरस के संपर्क में आएं तो इन्हें बीमारी का खतरा कम या नहीं के बराबर है.

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कैसे काम करती है कोई भी वैक्सीन 

ये परिणाम वैज्ञानिक पत्रिका साइंस इम्युनोलॉजी (Science Immunology) में छपा. इस बीच ये समझते चलें कि वैक्सीन हमारे शरीर में जाने पर 2 तरह के काम करती है.



  • पहला, इससे एंटीबॉडी बनती है, जिससे इम्युनिटी बढ़ती है.


  • दूसरा, इससे B- सेल्स तैयार होती हैं. ये एक तरह से याद रखने वाली कोशिकाएं हैं जो वायरस के संपर्क में आने पर शरीर को एंटीबॉडी की याद दिलाती हैं और प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है.




One dose of vaccine enough for COVID19 survivors
इस बीच लगातार वैक्सीन के तीसरे डोज की बात भी आ रही है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


बूस्टर डोज की भी बात हो रही है 

इस बीच लगातार वैक्सीन के तीसरे डोज की बात भी आ रही है. बात असल में ये है कि विशेषज्ञ कोरोना के मौजूदा टीकों की समयावधि के बारे में नहीं जानते. उन्हें आशंका है कि जल्द ही इस टीके से बनी एंटीबॉडी खत्म हो सकती हैं. ऐसे में बूस्टर शॉट बनाए जाने की तैयारी हो रही है. ये शॉट ठीक वैसा ही है, जैसे आपने कोई कोर्स कर लिया लेकि्न समय के साथ उसमें कई अपग्रेटेड चीजें आ गईं. तब अपनी जानकारी दुरुस्त रखने के लिए आपको भी वे जानकारियां जुटानी होती हैं. बूस्टर भी इसी फॉर्मूला पर काम करता है.

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म्यूटेशन में भी बूस्टर जरूरी

एक और स्थिति है, जिसमें बूस्टर जरूरी है. जैसे अगर वायरस म्यूटेट होने लगें यानी नया बदलाव पाकर वे ज्यादा घातक हो जाएं तो ऐसे में पुराने डोज से बनी एंटीबॉडी काम नहीं करती है. तब म्यूटेट हुए वायरस के मुताबिक पुराने फॉर्मूला में ही थोड़े बदलाव होते हैं और ये बूस्टर लेना जरूरी होता है.
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