एक और एसिड अटैक, आप रोकेंगे Acid Attack या फिर सरकार रोकेगी?

एसिड अटैक की घटनाओं में नहीं हुई कमी
एसिड अटैक की घटनाओं में नहीं हुई कमी

ACID ATTACK: सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, तेजाब की बोतल बेचने वाले दुकानदार को रजिस्टर मैंटेन करना होगा जिसमें खरीददार का पूरा नाम और पता व किस कार्य के लिए तेजाब वह ले रहा है, ये भी बताना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 19, 2019, 12:21 PM IST
  • Share this:
हाराष्ट्र में 20 साल की एक लड़की पर दो लड़कों ने तेजाब फेंक दिया है. गोंदिया जिले में घटना हुई है. नागपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज से सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही इस लड़की पर एसिड अटैक तब किया गया जब वह बस का इंतजार कर रही थी. हमलावरों ने तेजाब फेंकते समय अपने चेहरे को कपड़े से ढंक रखा था. वे बाइक पर आए और एसि़ड फेंक कर चले गए. लड़की को पास के हॉस्पिटल में ले जाया गया लेकिन हालात इतने खराब थे कि उन्हें नागपुर रेफर कर दिया गया. अब बताइए, यह घटना सरकार रोकेगी, प्रशासन रोकेगा या फिर इसके लिए समाज का हिस्सा होने के नाते हम और आप भी सोचेंगे?

इसे भी पढ़ेंः बच्चे को जन्म देने से ठीक 9 दिन पहले पता चला कि वह प्रेग्नेंट थी

यह तो आपको पता ही होगा कि एसिड अटैक की एक के बाद एक होती घटनाओं के बाद 2013 में जो कानून पास हुआ उसके मुताबिक तेजाब की खरीद फरोख्त को लेकर नियम सख्त हो गए. लेकिन दिक्कत यह है कि इनका पालन नहीं हुआ. न ही तेजाब बेचने वालों ने किया और न ही इसे खरीदने वालों ने. और, प्रशासन और पुलिस ने किया ही नहीं. आज भी नियमों को ताक पर रखते हुए धड़ल्ले से तेजाब बिकता है. नियमों के पालन करने की जिम्मेदारी हम लोगों की है लेकिन जो लोग इसका पालन नहीं कर रहे, उन पर सख्ती बरतने का काम पुलिस का है.



क्या कहता है कानून...

  1. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, तेजाब की बोतल बेचने वाले दुकानदार को रजिस्टर मैंटेन करना होगा जिसमें खरीददार का पूरा नाम और पता व किस कार्य के लिए तेजाब वह ले रहा है, ये भी बताना होगा. नियम तो यह है कि समय-समय पर इन रजिस्टरों की पड़ताल मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी.

  2. साथ ही, दुकानों में तेजाब के स्टॉक की जानकारी भी स्थानीय प्रशासन को देने का प्रावधान है.

  3. कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 साल से कम है, को तेजाब नहीं बेचा जाएगा. तेजाब खरीदने वाले का फोटो आईडी सब्मिट करना जरूरी है.

  4. कई काम जैसे कि स्कूल की लैब आदि में जहां अधिक मात्रा में तेजाब की जरूरत होगी, वहां की खरीददारी के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी है.

  5. यहां बता दें कि सोने-चांदी को गलाकर गहने बनाने में, मेटल और वायर बनाने वाली फैक्ट्री में तेजाब का इस्तेमाल होता है. बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले किसी भी प्रकार के ऐसे क्लीनर में दो या चार परसेंट तक एसिड डला होता है. स्कूल या कॉलेजों या बड़े मॉल में साफ-सफाई के लिए एसिड का इस्तेमाल किया जाता है.

  6. बता दें कि तेजाब को विष अधिनियम 1919 के अंतर्गत रखा गया है. इसके लिए धारा छह में सजा का प्रावधान है. यह धारा राज्य के अधीन है और यह उसके ऊपर है कि सजा को वह किस हद तक कठोर बनाता है. इसे गैर जमानतीय भी वह बना सकता है.

  7. 2013 में संबंधित कानून में दो उपधारा 326-ए और 326-बी जोड़ी गईं. 326 ए में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति पर तेजाब फेंका है, उसे स्थाई या आंशिक रूप में किसी को नुकसान पहुंचाया है तो अपराध गैर-जमानती होगा.

  8. 326 ए के मुताबिक, अगर दोषी पाए गए तो कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा हो सकती है. जुर्माना भी लगाए जाने का प्रावधान है. जुर्माने की रकम पीड़ित को दिया जाने की बात कही गई है.

  9. 326 बी के मुताबिक, दोषी को जुर्माने के साथ- साथ कम से कम पांच साल तक की सजा हो सकती है. यह गैर जमानती है.

  10. कोई भी हॉस्पिटल किसी एसिड हमले के पीड़ित के इलाज से मना नहीं कर सकता. मुफ्त इलाज का मतलब पीड़ित के अस्पताल के अलग कमरे, खाने और दवाइयों के साथ-साथ सर्जरी का भी खर्च सरकार ही करेगी

  11. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश हैं कि पीड़ित को फौरन कम से कम तीन लाख रुपए की मदद मुहैया कराएंगे.

  12. एसिड अटैक के पीड़ित को सर्टिफिकेट देना भी हॉस्पिटल की जिम्मेदारी है ताकि भविष्य में उसे सारी सुविधाएं मिल सकें.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज