जानिए क्या है ई-फार्मेसी, कोरोना के दौरान कैसे आपके काम आ सकती है ये

जानिए क्या है ई-फार्मेसी, कोरोना के दौरान कैसे आपके काम आ सकती है ये
कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन में ऑनलाइन दवा खरीदी का ट्रेंड तेजी से बढ़ा (Photo-pixabay)

कोरोना वायरस (coronavirus) के कारण लगे लॉकडाउन (lockdown) में ऑनलाइन दवा (online medicine) खरीदी का ट्रेंड तेजी से बढ़ा. ग्राहकों की सुविधानुसार घर पहुंच सेवा के कारण इसमें बढ़त आई है. जानिए, क्या है ई-फार्मेसी (e pharmacy) और कैसे काम करती है.

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देशव्यापी लॉकडाउन के चार चरण पूरे होने के बाद बंदी में धीरे-धीरे ढिलाई दी जा रही है. हालांकि कोरोना इंफेक्शन अब भी तेजी से फैल रहा है. यही वजह है कि लोग वही सर्विस लेना चाह रहे हैं जो होम डिलीवरी कर सकें ताकि ग्राहक को बाहर न जाना पड़े. ई-फार्मेसी ऐसी ही एक सर्विस है. इससे लोगों को लोगों को इंटरनेट के जरिए सस्ती दवाएं मिल रही हैं.

ई-फार्मेसी वो नई तरह की दुकान है, जिसकी साइट या एप पर जाकर जब आप दवा बुक करेंगे तो आपको सस्ते में, सप्ताह के सातों दिन और किसी भी समय घर पर दवा पहुंचा देंगे. पारंपरिक दवा विक्रेताओं के लिए ये स्थिति मुसीबत खड़ा करने वाली है. ना केवल उनके कारोबार पर इसका असर पड़ रहा है बल्कि उनका कहना है कि ई फार्मेसी द्वारा भेजी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर कैसे भरोसा किया जा सकता है.

हालांकि ऑनलाइन फार्मेसी के कोई तय नियम नहीं हैं. अभी ये अपने शुरुआती दिनों में है. कई नियमों के लिए इन्हें रेगुलेट किया जा रहा है. इसमें ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स रुल्स 1945 के साथ द ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट 1940 भी शामिल है. फिलहाल कोरोना के दौर में ई फार्मेसी के बिजनेस में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है. इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में एक ऑनलाइन फार्मेसी के संचालक धर्मिल सेठ बताते हैं कि दवाओं की बिक्री 100% हो चुकी है. इसमें सर्दी-खांसी, बुखार की दवाएं सबसे ऊपर हैं. यही वजह है कि बहुत सी इंटरनेट फार्मेसी स्टार्टअप अपने नई नियुक्तियां तक कर रहे हैं, जबकि लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर जगहों पर नौकरी में कटौती दिख रही है.



बहुत सी इंटरनेट फार्मेसी स्टार्टअप अपने नई नियुक्तियां तक कर रहे हैं (Photo-pixabay)




केंद्र सरकार ने पिछले साल 28 अगस्त को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रुल्स 1945 के तहत एक गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें बताया गया है कि कोई कैसे ई-फार्मेसी का काम शुरू कर सकता है, कैसे उसे पंजीकरण करना होगा, कैसे दवा बेचनी होगी. फिलहाल देश में दो दर्जन से ज्यादा बड़ी कंपनियां ई-फार्मेसी के क्षेत्र में कारोबार कर रही हैं, उनका कहना है कि वो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रुल्स 1945 की शर्तों के आधार पर ही काम करती हैं.

क्या हैं ई फार्मेसी के नियम
- डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बगैर दवा बिक्री नहीं
- शेड्यूल एक्स ड्रग्स की बिक्री नहीं
- तापरोधी कवर में पंजीकृत फॉर्मासिस्ट की निगरानी में पैकिंग
- हर बिक्री का वैध बिल
- हर ई-फॉर्मेसी पोर्टल को बगैर रजिस्टर्ड कराए दवाएं नहीं बेची जा सकेंगी
- जो भी शख्स ई-फॉर्मेसी के बिजनेस में आना चाहेगी, उसे केंद्रीय लाइसेंसिंग अथारिटी के फार्म 18 पर
- केंद्रीय सरकार के आनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा. पंजीकरण शुल्क 50 हजार रुपए
- आवेदन करने वाले को इंफार्मेशन टेक्नॉलॉजी एक्ट 2000 को मानना होगा
- हर रोगी के विवरण को गोपनीय रखना होगा
- नई ई-फार्मेसी फर्म को केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन के साथ रजिस्टर्ड कराना होगा
- समय समय पर ई-फार्मेसी की जांच केंद्रीय लाइसेंसिंग अथारिटी की टीम करेगी
- ई-फार्मेसी रजिस्ट्रेशन तीन साल के ही वैद्य होगा, इसके बाद इसका नवीनीकरण कराना होगा
- सभी ई-फार्मेसी को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन चलने वाले कॉल सेंटर रखने होंगे ताकि दवाओं की डिलीवरी समय से हो सके.

कीमतों में अंतर
ये तो तय है कि ई-फॉर्मेसी से दवाएं पारंपरिक दुकानों की तुलना में ज्यादा सस्ती मिलती हैं. यहां आमतौर पर दवाओं में 20 से लेकर 30-35 फीसदी छूट मिल जाती है. इसके अलावा यहां दवा खरीदने छूट के साथ कैश बैक जैसे ऑफर भी मिलते हैं, जिसके कारण ग्राहक इसे पसंद करने लगे हैं. साथ ही ग्राहक की सुविधानुसार समय पर दवा की डिलीवरी भी इसकी बढ़ती लोकप्रियता की एक वजह है. वैसे फिलहाल तो कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए लोग ऑनलाइन दवा मंगवा रहे हैं.

कई वजहों से ई-फर्मेसी से दवाएं पारंपरिक दुकानों की तुलना में ज्यादा सस्ती मिलती हैं (Photo-pixabay)


ई फॉर्मेसी पर दवाएं क्यों सस्ती
- माना जाता है ऑनलाइन कारोबारियों की लागत कम होती है
- ये बड़ी कंपनियों से सीधे सौदा करती हैं, जिससे उन्हें ज़्यादा डिस्काउंट मिलता है, वो फायदा ग्राहकों को दिया जाता है
- कई ई-फार्मेसी जेनेरिक दवा का भी विकल्प देते हैं जो ब्रांड की तुलना में सस्ता होता है

खतरे क्या हैं
नियमों के अभाव में देश में अवैध ऑनलाइन फार्मेसी बढ़ रही हैं. पिछले साल महाराष्ट्र में सरकार ने एक दर्जन से ज्यादा ऑनलाइन फॉर्मेसी पर छापे डाले और दो करोड़ से ज्यादा की दवाइयां जब्त कीं, जिनमें मिलावट मानी जा रही थी, हालांकि मामले पर बाद में कोई रिपोर्ट नहीं आई.

क्या ऑनलाइन फार्मेसी का भी कोई संगठन है
पहले इंडियन इंटरनेट फॉर्मेसी एसोसिएशन (आईआईपीए) नाम से एक संगठन बनाया गया था, जिसका नाम बदलकर अब डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स (डीएचपी) कर दिया गया है. ये मूलतः ग्राहकों में विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कंपनियों में सुधार की अपील या जांच करता रहता है.

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