ऑपरेशन ब्लू स्टार: सेना का Rtd लेफ्टीनेंट जनरल था भिंडरवाला का सैनिक सलाहकार

ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) 3 से 8 जून 1984 के दौरान चलाया गया था.  (फाइल फोटो)

ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) 3 से 8 जून 1984 के दौरान चलाया गया था. (फाइल फोटो)

खुद लेफ्टीनेंट जनरल केएस बराड ने अपनी किताब ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच’ में सुबेग सिंह की मोर्चाबंदी हथियारों के इंतजाम का खुलासा किया है.

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नई दिल्ली. 5 जून की देर रात पंजाब के अमृतसर में शुरू हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) 7 जून तक चला था. हालांकि अंदर बैठे लोगों के हथियारों का आकलन कर ऑपरेशन शुरू करने वाली सेना (Army) को ऑपरेशन के इतना लम्बा खिंचने की कोई उम्मीद नहीं थी. लेकिन ऑपरेशन के शुरू होते ही अंदर पहला कदम रखने पर जिस तरह के हमले का सामना सेना को करना पड़ा, उसने उसे दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया. सेना को इस तरह की मोर्चेबंदी की कतई उम्मीद नहीं थी. ऑपरेशन को लीड कर रहे लेफ्टीनेंट जनरल (Lieutenant General ) कुलदीप सिंह बराड को एहसास हो गया था कि इस मोर्चेबंदी के पीछे जनरैल सिंह भिंडरवाला के सैनिक सलाहकार सेना के ही रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल सुबेग सिंह का हाथ है.

यह थी रिटायर्ड लेफ्टीनेंट जनरल सुबेग सिंह की मोर्चाबंदी

‘ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच’ किताब में लेफ्टीनेंट जनरल केएस बराड ने खुलासा करते हुए बताया है, “हरिमंदिर से लगे 17 मकानों पर कब्जा कर मोर्चे लगा लिए गए थे. दो ऊंचे बुर्ज और लंगर के निकट पानी की टंकी पर मोर्चेबंदी की गई थी. मुख्य घंटाघर वाले रास्ते पर नजर रखने के लिए होटल टैंपल व्यू पर और अखाड़ा ब्राह्म बूटा पर भी मोर्चा लगाया गया था.

लंगर की छत पर मोर्चाबंदी की गई थी. इसके साथ ही बिल्डिगों की खिड़कियों पर इतनी बारीकी से मोर्चे लगाए गए थे कि रेत से भी बोरियों को चुनकर उनके बीच गोली चलाने के लिए हल्की सी दरार छोड़ी गई थी. संगमरमर के पक्के फर्श को काटकर भी गोली चलाने के लिए मोर्चे बनाए गए थे. कुछ तहखाने भी तैयार किए गए थे.
जनरैल सिंह भिंडरवाला, अमरीक सिंह समेत कुछ दूसरे और खुद अपने लिए भी सुबेग सिंह ने अकाल तख्त के पास छिपे थे. मोर्चाबंदी के लिहाज से यह बेहद अहम जगह थी.”

सेना को नहीं था इतने हथियारों का अंदाजा

लेफ्टीनेंट जनरल केएस बराड अपनी किताब में लिखते हैं, “हमारे पास जो जानकारी थी उसके मुताबिक अंदर बैठे लोगों के पास कुछ 12 बोर की बंदूकें और देशी हथियार थे. लेकिन यह सूचना गलत थी यह हमें अंदर गोलीबारी के दौरान ही हो गया था. हमें अपना वो वादा तोड़ना पड़ा जो हमने अंदर घुसने से पहले किया था कि गोलियां कम से कम चलाएंगे, नुकसान भी कम से कम होने देंगे. लेकिन जो हथियार बरामद किए गए, उससे हमारे साथ-साथ दूसरों की भी आंखें खुली की खुली रह गईं.”



बरामद हुए हथियार

7.62 एमएम की हल्की मशीनगन 41

7.62 एमएम की एसएलआर 84

7.62 एमएम चीनी रायफल 52

असारडिट रायफल (सभी तरह की) 28

303 रायफल 399

कार्बाइन 41

5.56 एमएम सब मशीन गन 49

पिस्तौल-रिवाल्वर (टकसाली नमूने के) 84

पिस्तौल (देशी) 67

12 बोर की गन 78

रॉकेट चालक ग्रेनेड लांचर (एंटी टैंक गन) 2.

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