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Opinion : सियासी दलों के लिए यूं ही अहम नहीं है महाराष्ट्र

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 12:45 PM IST
Opinion : सियासी दलों के लिए यूं ही अहम नहीं है महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, जो देश की आर्थिक राजधानी कहलाती है

आखिर क्या बात है कि महाराष्ट्र की सत्ता किसी भी दल के लिए अहम है. महाराष्ट्र कमाई के मामले में देश में सबसे आगे रहने वाला सूबा है. ये यूपी के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा और राज्यसभा सांसद चुनकर केंद्र में भेजता है. इसी राज्य में वो शहर भी है जो देश की आर्थिक राजधानी कहलाता है

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  • Last Updated: November 26, 2019, 12:45 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार यानी 27 नवंबर को महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहा है. पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर उठा-पटक जारी है. आखिर महाराष्ट्र सियासी दलों के लिए क्यों अहम है. इसकी कुछ वजहें तो हैं ही.

महाराष्ट्र के बारे में कहा जाता है कि जो पार्टी वहां सरकार बनाती है, वो उत्तर प्रदेश की तरह राष्ट्रीय पटल पर अहम भूमिका भी निभाती है. कई मायनों में इस राज्य का जवाब नहीं.

50 और 60 के दशक में जब देश में राज्यों का पुर्नगठन हो रहा था, तब एक मई 1960 को इसका गठन हुआ. महाराष्ट्र छह राज्यों को छूता ही नहीं है बल्कि कहीं ना कहीं इन राज्यों के सीमाई इलाकों की राजनीति और संस्कृति पर भी असर डालता है. जब महाराष्ट्र बन रहा था तो इसमें कुछ इलाके हैदराबाद के आए और कुछ कर्नाटक के. गोवा और गुजरात के कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां महाराष्ट्र की छाप दिखती है. मसलन कोंकण और सौराष्ट्र.

कहा जा सकता है कि महाराष्ट्र की राजनीति का अगर सीधा असर आर्थिक और सियासी तौर पर केंद्र पर होता है तो पड़ोसी राज्यों पर भी. जिस तरह केंद्र की राजनीति पर दबदबा रखने के लिए कोई भी पार्टी पहले उत्तर प्रदेश की ओर निगाह दौड़ाती है. उसी तरह की अहमियत महाराष्ट्र की भी है.

उत्तर प्रदेश अगर लोकसभा के लिए सबसे ज्यादा 80 सांसद चुनकर भेजता है तो महाराष्ट्र इस मामले में 48 सीटों के साथ नंबर दो की पोजीशन पर है. राज्यसभा में सीटों के मामले में भी महाराष्ट्र नंबर दो की पोजीशन पर है. यहां से यूपी (31 सीट) के बाद सबसे ज्यादा 19 सीटें हैं. तो समझा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र की सत्ता में रहना किसी भी सियासी दल के लिए क्यों जरूरी है. अगर भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में काबिज है, तो उसके लिए जितना जरूरी उत्तर प्रदेश है तो उतना ही जरूरी महाराष्ट्र भी.

महाराष्ट्र यूपी के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा और राज्यसभा सांसद चुनकर केंद्र में भेजता है


महाराष्ट्र यूं तो आबादी के लिहाज से  देश का दूसरा बड़ा राज्य है तो क्षेत्रफल के मामले में तीसरा बड़ा राज्य. उसका कुल क्षेत्रफल (307.713 वर्ग किलोमीटर) राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद है. लेकिन अगर बात राजस्व या कमाई की आती है तो ये सूबा सबसे ऊपर है. इस राज्य की इकोनॉमी देश की सबसे बड़ी इकोनॉमी है. जो सकल घरेलू उत्पाद में 24.11 लाख करोड़ का योगदान देती है. इसी तरह इस राज्य की प्रति कैपिटा इनकम भी सबसे ज्यादा है.कौन सियासी पार्टी नहीं चाहेगी कि वो देश के सबसे धनी और कमाऊ राज्य की सत्ता में बैठे, जो राष्ट्रीय इकोनॉमी में सबसे ज्यादा योगदान दे रहा हो. आंकड़े कहते हैं कि महाराष्ट्र का योगदान देश की इकोनॉमी में करीब 15 फीसदी का है. ये राज्य देश का सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य भी है. जहां सबसे ज्यादा विदेशी निवेश भी है.

36 जिलों वाले महाराष्ट्र में साक्षरता का अनुपात करीब 83 फीसदी है. यहां राजनीतिक तौर पर जागरूकता भी अच्छी खासी है. मुख्य तौर पर विदर्भ, कोंकण, मराठवाड़ा में बंटे महाराष्ट्र की राजनीति में अलग इलाकों में अलग दलों का सियासी प्रभुत्व देखा गया है. लेकिन पिछले दस बरसों में यहां की राजनीति तेजी से बदली है. लेकिन हालिया चुनावों में जो तस्वीर आई, उसने सभी पार्टियों के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है. अब सबके सामने सवाल है कि वो किस तरह से वो महाराष्ट्र की सत्ता में काबिज हो पाएं. सबके राजनीतिक निहितार्थ और हित भी अलग हैं.

महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज होने के निहितार्थ और हित दोनों अलग सियासी दलों के लिए अलग हैं लेकिन यहां की सत्ता देश की राजनीति में उन्हें एक खास जगह जरूर देती है


अगर भाजपा को महाराष्ट्र के जरिए केंद्र में खुद को मजबूत रखना है तो पकड़ ढीली नहीं पड़ने देनी है. शिवसेना को लगता है कि अब उसके लिए राज्य की राजनीति में नंबर दो से नंबर एक पर जाने का समय आ गया है. शरद पवार को ये सूबा राष्ट्रीय राजनीति में मजबूती देता है. वह जानते हैं कि यहां उनकी जमीन कमजोर हो रही है, जिसे बचाए रखना है. कांग्रेस के लिए भी यह समय महाराष्ट्र में पैर टिकाने का है, जहां वो नंबर एक से चार पर खिसक चुकी है.

ये भी कहा जाता है कि देश की राजधानी दिल्ली जरूर है, जहां से सियासी सत्ता देश को चलाती है लेकिन आर्थिक राजधानी मुंबई है. कहा जा सकता है कि देश की असली नब्ज यहीं हैं. मुंबई देश का सबसे बड़ा शहर है, जो इकोनॉमी के साथ मनोरंजन और फैशन की भी राजधानी है. ये देश में दूसरे जगहों से 6.16 फीसदी ज्यादा योगदान इकोनॉमी में करता है. इस शहर की कुल इकोनॉमी 2016 में 368 बिलियन डॉलर आंकी गई. रोजगार से लेकर इनकम टैक्स कलेक्शन, कस्टम ड्यूटी, एक्साइज कलेक्शन में इसका योगदान सबसे ज्यादा है.

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है. आर्थिक तौर पर हर स्तर पर इसका योगदान देश में सबसे ज्यादा है. ये शहर सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार भी देता है


भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली दस बड़ी कंपनियों के मुख्यालय इसी शहर में हैं. दुनियाभर के तकरीबन सभी बड़े बैंकों की शाखाएं देश के किसी और जिले में हो या ना हों लेकिन मुंबई में जरूर हैं. यहां की प्रति व्यक्ति आय भी देश में सबसे ज्यादा आंकी गई है.

कृषि इकोनॉमी की बात करें तो भी महाराष्ट्र का रुतबा कम नहीं. चीनी, कपास और प्याज उत्पादन के मामले में ये हमेशा देश में ड्राइविंग सीट पर ही नहीं होता बल्कि इनमें दामों में तनिक भी हलचल देश में हमेशा से महसूस की जाती रही है.

समझा जा सकता है कि महाराष्ट्र की अहमियत किसी भी दल के लिए क्यों मायने रखती है. क्यों यहां की सत्ता पर हर दल बैठने को लालायित रहता है. यहां की सत्ता क्यों किसी भी दल की सेहत के लिए उससे कहीं ज्यादा अहम है, जितना बाहर से हम देख और समझ सकते हैं.

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First published: November 25, 2019, 3:47 PM IST
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