जानें अब तक क्यों समझे नहीं जा सके हैं 'MODI' के कई दस्तावेज़!

देश की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लहर की चर्चा है तो महाराष्ट्र में एक नई 'MODI' लहर चल रही है. इस नई 'MODI' लहर से जुड़ा एक एप 10 हज़ार बार से ज़्यादा डाउनलोड किया जा चुका है. जानें क्या है ये नई 'MODI' लहर.

News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 2:05 PM IST
जानें अब तक क्यों समझे नहीं जा सके हैं 'MODI' के कई दस्तावेज़!
प्रतीकात्मक तस्वीर.
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Updated: July 8, 2019, 2:05 PM IST
एक तरफ देश के राजनीतिक गलियारों में मोदी लहर की चर्चा जारी है, तो दूसरी ओर एक नए तरह की 'MODI लहर' सोशल मीडिया पर चल रही है. अगर आपको पता चले कि वॉट्सएप पर एक ग्रुप है, जिसका नाम है 'MODI 11' तो आप क्या समझेंगे? शायद यही कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसी खास चर्चा से जुड़ा कोई समूह है. लेकिन, नहीं ये ग्रुप अस्ल में, एक ट्यूटोरियल ग्रुप है, जो वॉट्सएप के ज़रिए छात्र खोज रहा है और ट्यूशन दे रहा है. तो फिर इस समूह का नाम MODI 11 क्यों है? जानें क्या है ये अलग तरह की MODI लहर.

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चलिए, एक क्लू से अंदाज़ा लगाइए. सोशल मीडिया पर इस तरह के समूहों से ज़्यादातर मराठीभाषी जुड़े हुए हैं या मराठी के प्रति आकर्षित लोग. इस क्लू से आप अगर इस अंदाज़े तक पहुंच गए हैं कि ये ग्रुप मराठी भाषा से किसी तरह जुड़ा है, तो आप काफी हद तक सही हैं. अस्ल में, मराठी पिछले काफी अरसे से देवनागरी लिपि में लिखी जा रही है, लेकिन करीब 700 साल पहले मराठी इस लिपि में नहीं लिखी जाती थी. वो पुरानी लिपि थी MODI लिपि या स्क्रिप्ट. इसका सही उच्चारण भी मोदी नहीं बल्कि मोडी है, लेकिन रोमन में लिखने के कारण कम जानकार लोग इसे मोदी लिपि भी कह जाते हैं.

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वॉट्सएप के ज़रिए बढ़ा मोडी लिपि का क्रेज़
सोशल मीडिया के ज़रिए मोडी लिपि सीखने सिखाने का सिलसिला धीरे धीरे ज़ोर पकड़ रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक एक से ज़्यादा ऐसे वॉट्सएप समूह सक्रिय हैं, जहां इस लिपि के ट्यूटोरियल दिए जा रहे हैं और इन्हें आप भी जॉइन कर सकते हैं. करीब 800 रुपये इस लिपि को सीखने के बेसिक कोर्स की फीस है. नासिक बेस्ड सरकारी मान्यता प्राप्त मोडी टीचर हैं सोजवल सैली, जो इस लिपि के बारे में ​प्रशिक्षण दे रहे हैं. एक और वॉट्सएप समूह 'मोडी लिपि शिखा' भी सक्रिय है, जो इस लिपि में टा​इपिंग के बारे में जानकारी देता है. इस एप को 2016 से अब तक 10 हज़ार बार डाउनलोड किया जा चुका है.

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क्यों है इस लिपि की ज़रूरत?
तकरीबन 1260 ईस्वी के आसपास यादव वंश के समय के दौरान मोडी लिपि की शुरूआत होना बताया जाता है. ये भी तथ्य है कि इस लिपि में मराठी भाषा लिखने का सिलसिला 20वीं सदी तक चलता रहा. इसके बाद देवनागरी लिपि ने मोडी लिपि का स्थान ले लिया और अब मोडी लिपि में कोई महत्वपूर्ण आधिकारिक लेखन नहीं होता. लेकिन, इसे सीखने की ज़रूरत इसलिए है क्योंकि मोडी लिपि में लिखे करोड़ों दस्तावेज़ ऐसे हैं, जिन्हें अब तक डीकोड नहीं किया जा सका है.

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मोडी लिपि को संरक्षित किए जाने की कोशिशें जारी हैं. चित्र: विकिपीडिया


खबर के मुताबिक पुणे और तंजोर के कई इलाकों में ऐसे दस्तावेज़ सुरक्षित रखे हुए हैं. इनके डीकोड न हो पाने की वजह ये है कि महाराष्ट्र में मोडी लिपि के जानकारों की संख्या 10 से भी कम है और इनमें से भी ज़्यादातर 70 की उम्र पार कर चुके हैं. दूसरी ओर, अब इन दस्तावेज़ों को डिजिटाइज़ किए जाने की कोशिशें भी की जा रही हैं.

कैसी है मोडी लिपि?
मोडी शब्द अस्ल में, मराठी शब्द मोडणे से बना है, तो इसका अर्थ तोड़ने या मोड़ने से निकाला जाता है. देखा जाए तो इस लिपि में लेखन के समय देवनागरी के स्टाइल को ही थोड़ा मोड़कर या तोड़कर इस लिपि में शब्द व्युत्पत्ति होती है. आद्यकालीन, यादवकालीन, बहमनीकालीन, शिवकालीन, पेशवेकालीन और ब्रिटिशकालीन, समय के साथ मोडी लिपि का विकास हुआ था. पेशवा समय के दौरान मोडी लिपि में खास स्टाइलों का सूत्रपात हुआ था, जिन्हें चिटनीसी, बिलावलकरी, महादेवपंथी और रानाडी नाम से जाना जाता है. इस लिपि के बारे में विकिपीडिया और इस लिपि की आधिकारिक वेबसाइट पर तमाम जानकारियां मौजूद हैं.

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First published: July 8, 2019, 1:22 PM IST
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