क्या हमारे सूर्य का कोई साथी था, जिसने सौरमंडल के बनने में की थी मदद?

क्या हमारे सूर्य का कोई साथी था, जिसने सौरमंडल के बनने में की थी मदद?
शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारे सूर्य का एक और साथी उसकी उत्पत्ति के समय रहा होगा जो अब दूर चला गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हमारे सौरमंडल (Solar System) के बाहर एक धूल के बादल (Cloud) की मौजूदगी व्याख्या करते समय वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारे सूर्य (Sun) के साथी होने पर ही ऐसे पिंडों का अस्तित्व संभव है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 4:41 PM IST
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हमारे खगोलविदों (Astronomers) को अंतरिक्ष में कई बार ऐसी घटनाएं (Events), प्रक्रियाएं या पिंड देखने को मिलते हैं जिनकी व्याख्या करते समय उन्हें कई बार अजीब से ही नतीजे देखने को मिलते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ जब ताजा शोध से पता चला कि हमारे सूर्य का कभी एक साथी रहा होगा और हमारे सौरमंडल के निर्माण में भी उसकी भूमिका रही होगी.

दो सूर्यों के युग्म
इस शोध में वैज्ञानिकों ने इस संभावना के बारे में पता लगाया है कि अपने शुरुआती दिनों में हमारा तारा यानि कि सूर्य एक युग्मक व्यवस्था (Binary System) का हिस्सा रहा होगा जिसमें सूर्य के अलावा उसी के भार का एक और तारा रहा होगा. यह तारा बहुत पहले गायब हो गया था और हो सकता है कि यह अभी हमारी मिल्की वे गैलेक्सी में कहीं और अब भी मौजूद हो, लेकिन दूर जाने से पहले उसने हमारे सौरमंडल पर प्रभाव जरूर छोड़ा होगा.

कैसे पता लगा कि हो सकता है ऐसा
दरअसल वैज्ञानिकों हमारे सौरमंडल में वैसे ही कुछ प्रभाव देखने को मिले हैं. अगर ये सारी बातें सच हुईं तो इसे हमारे सौरमंडल के किनारे पर ओर्ट (Oort) बादलों के पिंडों के निर्माण की व्याख्या की जा सकती है. इससे हमें उस नौवें ग्रह के बारे में भी हमे जानकारी मिल सकती है जो हमारे सौरमंडल के किनारे पर है और दिखाई नहीं दे रहा है.



कैसे हो सकती है इस मत की पुष्टि
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के द्वारा प्रस्तावित यह मत या सिद्धांत (Theory) एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल लैटर्स में प्रकाशित की गया है. इसमें कहा गया है कि इस सिद्धांत का परीक्षण भविष्य के टेलीस्कोप कर सकते हैं. क्योंकि सौरमंडल पर आज के निशान सूर्य के साथी तारे के इतिहास की मौजूदगी का संकेत होंगे.

Sun
सूर्य का यह साथी उसके जन्म के साथ था और कुछ दिनों बाद अलग हो गया होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


किसकी व्याख्या होगी इससे
दोनों तारे सूर्य की पैदाइश के समय मिल कर रहे होंगे या फिर कुछ तारों का समूह एक घने गैसीय बादल से एक ही समय में पैदा हुआ होगा. इस मत को देने वाले हार्वर्ड के छात्र आमिर सिराज का कहना है कि यदि दो तारों का समूह रहा होगा तो इससे ओर्ट के निर्माण की पुष्टि आसान होगी. इससे यह पता चल सकेगा कि कैसे हमारे सौरमंडल के निर्माण के समय छूटे धूल और गैस के बादल से ओर्ट का निर्माण हो पाया होगा. इस शोध में सिराज ने यूनिवर्सिटी के प्रोफसर एवी लोएब के साथ किया है.

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इस सिस्टम से हो सकता था ये
प्रोफेसर लोएब का कहना है, “बाइनरी सिस्टम अकेले तारे के मुकाबले चीजों को पकड़ने में ज्यादा कारगर होते हैं. यदि ओर्ट बादल वैसे ही बना है जैसा की अवलोकित किया गया है, तो इसका साफ मतलब है कि हमारे सूर्य का एक साथी रहा होगा जो उसी के भार के बराबर का रहा होगा. यह साथी बहुत पहले ही सूर्य का साथ छोड़ भी गया होगा.”

इन बादलों का पृथ्वी पर असर
ओर्ट बादल के पिंड बहुत दूर हैं, लेकिन उनका पृथ्वी के जीवन पर गहरा प्रभाव है. इसमें हमारे ग्रह पर पानी पहुंचाने में सक्षमता और डायनासोर का पृथ्वी से सफाया करने में भूमिका शामिल हैं.  इनका प्रभाव आज भी हो सकता है.

Solar System
ओर्ट बादलों के पिंड हमारे सौरमंडल के बाहरी किनारे पर स्थित है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


नौवें ग्रह की व्याख्या संभव
वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी प्रक्रिया से नौवें ग्रह, जिसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है, के निर्माण के बारे में भी पता चल सकता है. इतना ही नहीं ऐसे और भी संसार हो सकते हैं जो उस जगह या उसके पास पाए जा सकते हैं.

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वैज्ञानिकों को अगले साल शुरू में प्रक्षेपित होने वाली वीरे सी रूबिन ऑबजर्वेटरी से काफी उम्मीदें हैं. उनका मानना है कि यह ऑबजर्वेटरी नौवें ग्रह के अस्तित्व की गुत्थी को सुलाझाने में मददगार होगी और यह भी पता चल सकेगा कि वह कहां से आया है. इसके साथ ही इस बाइनरी मॉडल के सिद्धांत की भी सच्चाई का पता चल जाएगा.
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