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    कैसे पता लगाया वैज्ञानिकों ने, बहुत ही गर्म होता जा रहा है ब्रह्माण्ड

    ब्रह्माण्ड (Universe) का औसत तापमन (Temperature) बहुत ज्यादा अधिक हो गया है.
    ब्रह्माण्ड (Universe) का औसत तापमन (Temperature) बहुत ज्यादा अधिक हो गया है.

    ब्रह्माण्ड (Universe) के पिछले 10 अरब साल के तापीय (Thermal) अध्ययन से शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि पूरे ब्रह्माण्ड का औसत तापमान बहुत ही ज्यादा है और यह तेजी से बढ़ता ही जा रहा है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 12, 2020, 7:51 AM IST
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    ब्रह्माण्ड (Universe) के बारे में हम कितना जानते हैं इस पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. पहले वह बात जो हमें ताजा शोध से पता चली है वह यह कि ब्रह्माण्ड बहुत ही ज्यादा गर्म (Hot) हो रहा है और यह प्रक्रिया पिछले 10 अरब साल से चल रही है. शोधकर्ताओं ने गैसों (Gases) से आ रहे प्रकाश का तापमान मापकर  पाया कि प्रक्रिया रुकने की अभी कोई संभावना नहीं है.

    बहुत ही ज्यादा गर्म है ब्रह्माण्ड
    यह बात उन सभी बातों के साथ कायम है कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है और इसकी दर भी बढ़ रही है. लेकिन फिर भी ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ कॉस्मोलॉजी एंड एस्ट्रोपार्टिकल फिजिक्स के अध्ययन के मताबिक हमारा ब्रह्माण्ड बहुत बहुत गर्म है. इस अध्ययन ने पिछले 10 अरब साल के तापीय इतिहास की पड़ताल की है. और तो और शोधकर्ताओं ने यहां तक पाया है कि आज ब्रह्माण का औसत तापमान 20 लाख डिग्री केल्विन तक पहुंच गया है जो करप 4 अरब डिग्री फेहरनहाइट है.

    नोबेल पुरस्कार विजेता का काम की पुष्टि
    ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ कॉस्मोलॉजी एंड एस्ट्रोपार्टिकल फिजिक्स के रिसर्च फेलो और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक यी क्यूआन चिआंग ने बताया, “हमारे नए मापन साल 2019 के नोबेल पुरस्कार विजेता जिम पीब्ल्स के कार्य का सीधा प्रमाण है जिन्होंने यह सिद्धांत दिया कि ब्रह्माण्ड में विशाल स्तर की संरचनाएं कैसे बनती हैं.



    खिंचाव और गर्मी
    चिआंग ने आगे बताया, “जैसे जैसे ब्रह्माण्ड विकसित होता है, गुरुत्व अंतरिक्ष में डार्क मैटर और गैस को एक साथ गैलेक्सी और गैल्क्सी समूहों में खींचता है. यह खिंचाव प्रचंड होता है कि और ज्यादा गैस जमा होती है और गर्म होती जाती है.

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    इस अध्ययन में दूर और पास के पिंडों (Objecet) का अध्ययन का अंतर अहम था.


    नई पद्धति का उपयोग
    इस अध्ययन के लिए  वैज्ञानिकों ने एक नई पद्धति का उपयोग किया जिससे वे पृथ्वी से दूर स्थित गैस का तापमान माप सकें. इसके बाद उन्होंने इन मापन को पृथ्वी और आज के पास स्थित गैस के तापमान के मापन से की.  चिआंग का कहना है किअब वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि समय के साथ गुरुत्व खगोलीय संरचनाओं के संकुचन के कारण ब्रह्माण्ड गर्म होता जा रहा है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है.

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    दो अभियानों के आंकड़े
    बाद में प्लैंक और द स्लोन डिजिटल स्काई सर्वे दोनों ही अभियानों से जुटाए गए आंकड़ों का अध्ययन किया और यह समझने का प्रयास किया कि समय के साथ ब्रह्माण्ड का तापमान कैसे बदला. दोनों अभियानों के आंकड़े मिलाकर वैज्ञानिकों ने पास और दूर की गर्म गैसों को रेडशिफ्ट के जरिए नापा. रेडशिफ्ट के जरिए खगोलभौतिक विज्ञानिक सुदूर अवलोकित पिंडों की खगोलीय उम्र का आंकलन करते हैं.

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    इस पूरी प्रक्रिया का पृथ्वी (Earth) पर बढ़ रही गर्मी से कोई लेना देना नहीं है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    दूर और पास का यह अंतर
    यहां रेडशिफ्ट की अवधारणा यहां काम करती है क्योंकि जो प्रकाश हम दूर के पिंडों के देखते हैं वह पृथ्वी के पास के पिंडों से आने वाले प्रकाश से पुराना होता है और लंबी दूरी  का सफर तय करते  हुए आती है. प्रकाश से तापमान का आंकलन कर वैज्ञानिक शुरुआती ब्रह्माणड की गैसों का औसत तापमान माप सके और साथ ही पास के यानि आज के ब्रह्माण्ड की गैसों का औसत तापमान भी माप सके.

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    चिआंग ने बताया कि ब्रह्माण्ड गर्म हो रहा है क्योंकि उसकी वजह गैलेक्सी की प्राकृतिक प्रक्रियाएं और संचरना का निर्माण है. इसका पृथ्वी पर गर्मी बढ़ने से कोई लेना नहीं हैं. ये दोनों प्रक्रियाएं अगल पैमानों पर होती हैं. उनका आपस में कोई संबंध नहीं है.
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