लाइव टीवी

40 साल तक महाराष्ट्र से दिल्ली की सत्ता हिलाने वाले 'साहेब' अब लाचार हो गए हैं?

News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 1:37 PM IST
40 साल तक महाराष्ट्र से दिल्ली की सत्ता हिलाने वाले 'साहेब' अब लाचार हो गए हैं?
महाराष्ट्र की राजनीति में कहा जाता है कि शरद का सरनेम 'पवार' अंग्रेजी शब्द 'पावर' का समानार्थी है.

शरद पवार (Sharad Pawar) 1967 में 27 साल की उम्र में महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर पहुंचे थे और मात्र दस साल के भीतर वसंत दादा पाटिल (Vasantdada Patil) की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को हटाकर महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री (Youngest Chief Minister) बने थे. इस घटना के बाद 41 साल बीत चुके हैं लेकिन शरद पवार इतने कमजोर कभी नहीं दिखे जितने 23 नवंबर की सुबह दिखे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2019, 1:37 PM IST
  • Share this:
मुंबई. 1991 लोकसभा चुनाव (1991 General Elections) के ठीक पहले पीवी नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) राजनीति छोड़ने का मन बना चुके थे. स्वास्थ्य कारणों और उम्र की वजह से उन्हें लगने लगा था कि राजनीति अब उनके बस की नहीं रही. दरअसल सिर्फ स्वास्थ्य ही वजह ही नहीं थी. राजीव गांधी से दूरी भी बढ़ गई थी. दिल्ली में उनके लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं था. लेकिन चुनाव में पहले फेज की वोटिंग 20 मई को सम्पन्न ही हुई थी और 21 मई को तमिलनाडु में राजीव गांधी की हत्या हो गई. कांग्रेस में सन्नाटा पसर गया. चुनाव के बाद इस बात के लिए लॉबिंग होने लगी कि पीएम कौन होगा. तब सोनिया के करीबियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि नरसिम्हा राव इस पद के लिए बेहतरीन कैंडिडेट होंगे. लेकिन एक और नेता था जो उस समय प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल था. उसे लंबी रेस का घोड़ा कहा जा रहा था. वो थे महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार.

पीवी नरसिम्हा राव की बायोग्राफी हाफ लायन में लेखक विनय सीतापति ने लिखा है कि है जैसे ही नरसिम्हा राव को इस बात की जानकारी लगी उन्होंने पत्रकार संजय बारू को अपने पास बुलाया. उन्होंने संजय से राजनीतिक स्थितियां जानने की कोशिश की. तब नरसिम्हा राव ने कहा कि महाराष्ट्र से भी आवाज उठ रही है. संजय बारू ने जब पूछा कि वो नेता कौन है तो नरसिम्हा राव ने जवाब दिया कि ये बात तुम्हें अपने मराठी संपादक से पूछनी चाहिए. नरसिम्हा राव का इशारा शरद पवार की तरफ था.

इस बात की तस्दीक अपनी ऑटोबायोग्राफी On My Terms: From the Grassroots to the Corridors of Power में शरद पवार ने भी किया है. किताब में उन्होंने लिखा है-दस जनपथ के स्वघोषित समर्थकों ने आपसी बातचीत में सोनिया गांधी को समझाना शुरू कर दिया था कि शरद पवार को प्रधानमंत्री बनाना परिवार के हित में नहीं है. इसका कारण मेरी युवा उम्र थी. तब इस समर्थकों ने कहा था कि वो (शरद पवार) लंबी रेस का घोड़ा है. शरद पवार का इशारा गांधी परिवार के नजदीकी रहे माखन लाल फोतेदार, आरके धवन, अर्जुन सिंह और वी जॉर्ज की तरफ था.

शरद पवार ने कहा था कि सोनिया के नजदीकियों ने उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया. पीवी नरसिम्हा राव पर भरोसा जताया गया था.
शरद पवार ने कहा था कि सोनिया के नजदीकियों ने उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया. पीवी नरसिम्हा राव पर भरोसा जताया गया था.


शरद पवार लिखते हैं, ' उन्होंने सोनिया गांधी को समझा दिया था कि नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाना ठीक है क्योंकि वो उम्र दराज हैं और उनकी स्थिति मजबूत नहीं है. अर्जुन सिंह खुद प्रधानमंत्री बनना चाहते थे और उन्हें उम्मीद थी कि वो जल्दी ही नरसिम्हा राव के उत्तराधिकारी बनेंगे. और एक बार सोनिया गांधी ने पीवी नरसिम्हा राव को लाने की हामी भर दी तो हवा का रुख मेरे लिए बिल्कुल उल्टा हो गया.'

वो शायद आखिरी मौका था जब शरद पवार पीएम पद के काफी नजदीक थे. हालांकि इसके बाद भी उन्होंने कई बार देश की सर्वोच्च राजनीतिक कुर्सी पर बैठने के प्रयास किए. महाराष्ट्र की राजनीति में कहा जाता है कि शरद का सरनेम 'पवार' अंग्रेजी शब्द 'पावर' का समानार्थी है.

शरद पवार 1967 में 27 साल की उम्र में महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर पहुंचे थे और मात्र दस साल के भीतर वसंत दादा पाटिल की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को हटाकर महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे. इस घटना के बाद 41 बीत चुके हैं लेकिन शरद पवार इतने कमजोर कभी नहीं दिखे जितने 23 नवंबर की सुबह दिखे. देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथग्रहण के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी. जिस राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को शरद पवार ने खड़ा किया उसके विधायक टूट कर अलग निकल रहे हैं और उन्हें खबर तक नहीं है. उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने बयान दिया है कि पार्टी और परिवार दोनों ही टूट गए हैं.
Loading...

मुख्यमंत्री बनने के बाद की कहानी
1978 में मुख्यमंत्री बनने के लिए शरद पवार ने तब जनता पार्टी का साथ लिया था. लेकिन दो साल बाद ही इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस आई ने राज्य की सत्ता पर विजय पाई और अब्दुल रहमान अंतुले राज्य के मुख्यमंत्री बने. शदर पवार अपनी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस (समाजवादी) के अध्यक्ष बन गए. 1984 में वो पहली बारामती से सांसद बने. इसके बाद 1985 में विधायक का चुनाव भी जीते और उनकी पार्टी ने राज्यभर में 54 सीटें जीती थीं. शरद पवार ने विपक्ष के नेता बने थे.

फिर कांग्रेस में लौटे
1987 में शरद पवार एक बार फिर कांग्रेस पार्टी में वापस लौट गए. तब उन्होंने इसका कारण बताया था-महाराष्ट्र में कांग्रेस की संस्कृति को बचाना जरूरी है. उनका इशारा तेजी से बढ़ती हुई शिवसेना की तरफ था. कुछ समय बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे शंकर राव चह्ववाण को केंद्र में मंत्री बनाया और शरद पवार एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो गए. तब शरद पवार के सामने शिवसेना के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने की चुनौती थी. 1990 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बीजेपी-शिवसेना गठबंधन से तगड़ी चुनौती मिली और पार्टी की कुल 141 सीटें ही आईं. 12 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से शरद पवार फिर मुख्यमंत्री बन गए थे.

राजीव गांधी की हत्या ने कांग्रेस को सकते में डाल दिया था.
राजीव गांधी की हत्या ने कांग्रेस को सकते में डाल दिया था.


राजीव गांधी की हत्या और केंद्र का रुख
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद शरद पवार ने पीएम कैंडिडेट बनने के लिए काफी प्रयास किए थे. इनका उल्लेख उन्होंने खुद अपनी ऑटोबायोग्राफी में किया है. लेकिन पार्टी ने नरसिम्हा राव को चुना. नरसिम्हा राव ने शरद पवार को अपनी कैबिनेट में देश के रक्षा मंत्रालय का जिम्मा सौंपा. लेकिन 1993 में हुए मुंबई दंगों की वजह से सुधाकर राव नाइक को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और राज्य की स्थिति नियंत्रण में करने के लिए शरद पवार चौथी बार मुख्यमंत्री बने.

कांग्रेस अध्यक्ष बनने की होड़
1997 में शरद पवार ने पार्टी में सीताराम केसरी को चैलेंज किया था. लेकिन सीताराम केसरी पार्टी अध्यक्ष बनने में सफल रहे. 1998 में हुए मध्यावधि चुनाव में शरद पवार न सिर्फ अपनी सीट बारामती बचाने में सफल रहे बल्कि कांग्रेस को अच्छी-खासी सीटें दिलवाईं. सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी के साथ मिलकर कांग्रेस को राज्य से कुल 37 सीटें हासिल हुईं और शरद पवार लोकसभा में विपक्ष के नेता बने. 1999 में शरद पवार, पीए संगामा और तारिक अनवर ने मांग की कि कांग्रेस का अध्यक्ष किसी भारतीय को बनना चाहिए न कि किसी बाहरी व्यक्ति को. ये लड़ाई सीधी सोनिया गांधी के खिलाफ थी जो सीताराम केसरी को हटाकर कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं. इसके जवाब मे्ं पार्टी ने तीनों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. और इसी के बाद बनी आज की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP.

1999 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव
हालांकि कांग्रेस से अलग हटकर पवार ने नई पार्टी बना ली थी लेकिन विधानसभा चुनाव दोनों ने साथ मिलकर लड़ा. एजेंडा था बीजेपी-शिवसेना का सत्ता से दूर रखना. गठबंधन की सरकार तो बनी लेकिन फिर पवार राज्य की राजनीति में वापस नहीं गए. विलास राव देशमुख मुख्यमंत्री बने और छगन भुजबल उपमुख्यमंत्री.

यूपीए 1 और यूपीए 2
साल 2004 में यूपीए की सरकार बनने के बाद शरद पवार ने यूपीए ज्वाइन किया और देश के कृषि मंत्री बने. 2009 में जब यूपीए की सरकार दोबारा तब भी उन्होंने अपना मंत्रालय वापस लिया. कृषि मंत्री के तौर पर भी उनका कार्यकाल विवादित रहा लेकिन पवार ने सत्ता और पार्टी दोनों पर अपनी पकड़ बनाए रखी.

file

2014 के बाद की राजनीति और कमजोर होती पकड़
2014 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा दोनों ही चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी. राज्य में बीजेपी शिवसेना की सरकार बनी. लेकिन जब 2019 के राज्य विधानसभा चुनावों का समय आया तो ऐसा लगा जैसे पार्टी में भगदड़ मची हुई है. कई एनसीपी नेताओं ने बीजेपी और शिवसेना का दामन थाम लिया. चुनाव के पहले एनसीपी की हालत बेहद पतली हो गई थी हालांकि खुद शरद पवार इससे इनकार करते रहे. नतीजे आने के बाद के राजनीतिक हालात में शरद पवार चाणक्य साबित होते दिख तो रहे थे लेकिन ऐन मौके पर उनकी भतीजे अजित पवार ने उन्हें गच्चा दे दिया. अब शरद पवार इस पर निराश हैं और कह रहे हैं कि ये सब उनकी जानकारी में नहीं हुआ. शरद पवार देखकर महाराष्ट्र और देश की राजनीति में देखने वाले जरूर सोच रहे होंगे कि पार्टी और पावर पर शायद उनकी पकड़ अब ढीली हो गई है.
ये भी पढ़ें:

'मंडल के मसीहा' वीपी सिंह के खिलाफ मुलायम ने लड़ी थी राजनीतिक वजूद की लड़ाई

पाकिस्तान का वो कौन सा हिस्सा है, जिसने फिर उठाई आजादी की मांग

कौन है वो ब्रिटिश प्रिंस, जो जनता की नजरों में हीरो से हुआ जीरो

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 23, 2019, 1:16 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...