Explained: कैसे बिजली की मदद से घर पर बनाई जा सकती है ऑक्सीजन?

डॉक्टर तय करता है कि किसी बीमारी के मरीज को हर मिनट कितनी ऑक्सीजन की जरूरत, कब होती है (Photo- news18 English via Reuters)

डॉक्टर तय करता है कि किसी बीमारी के मरीज को हर मिनट कितनी ऑक्सीजन की जरूरत, कब होती है (Photo- news18 English via Reuters)

कोरोना संक्रमित की स्थिति गंभीर होने पर उसे ऑक्सीजन (Oxygen for coronavirus patients) की जरूरत होती है. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के दौरान इसके विकल्प खोजे जा रहे हैं. इन्हीं में से एक है स्टैंडर्ड ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर (Standard oxygen concentrator), जो बिजली से ऑक्सीजन तैयार करने में मदद करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 10:46 AM IST
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बेकाबू होते कोरोना संक्रमण के बीच देश के विभिन्‍न राज्‍यों से मेडिकल ऑक्सीजन की कमी (medical oxygen shortage) की शिकायतें आ रही हैं. मरीजों के इसकी कमी से दम तोड़ने जैसे खबरें झकझोर रही हैं. वैसे तो वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन ही सांस लेने के लिए पर्याप्त है लेकिन कोरोना संक्रमण गंभीर होने पर फेफड़ों पर असर होता है, जिससे हवा में मौजूद ऑक्सीजन की बजाए मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत होती है. अब ऑक्सीजन के विकल्पों पर बात हो रही है.

किन्हें चाहिए मेडिकल ऑक्सीजन

सबसे पहले तो जानते हैं कि किन्हें ऑक्सीजन की जरूरत होती या हो सकती है. इनमें अस्थमा, क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस, कन्जेस्टिन हार्ट फेल, सिस्टिक फाइब्रोसिस, लंग कैंसर, निमोनिया, पल्मोनरी फाइब्रोसिस या स्लीप एप्निया जैसी बीमारियां शामिल हैं.

oxygen cylinder coronavirus
कोरोना के गंभीर मरीज को हवा में मौजूद ऑक्सीजन की बजाए मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत होती है (Photo- news18 English via AP)

कितनी ऑक्सीजन ली जानी चाहिए

ये डॉक्टर तय करता है कि किसी बीमारी के मरीज को हर मिनट कितनी ऑक्सीजन की जरूरत, कब होती है. कई लोगों को सोने के दौरान ऑक्सीजन थैरेपी चाहिए होती है, जैसे स्लीप एप्निया के मरीज को, जिसकी सांस सोते हुए बाधित रहती है. कईयों को व्यायाम करते हुए इसकी जरूरत होती है, वहीं कई लोग चौबीसों घंटे ऑक्सीजन पर रखे जाते हैं.

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कैसी होती है स्टैंडर्ड ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर

इस बीच ऑक्सीजन सिलेंडर के विकल्पों पर भी बात हो रही है, मिसाल के तौर पर ऑक्सजीन कंसन्ट्रेटर. इसे स्टैंडर्ड ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर (Standard oxygen concentrator) भी कहा जाता है. इस मशीन में मोटर होती है और ये बिजली से चलती है. या फिर इसे बैटरी से भी चलाया जा सकता है. ये हवा से ऑक्सीजन लेती है और बाकी गैसों को बाहर निकाल देती है. मशीन लगभग 50 पाउंड वजनी है और चलाने के लिए इसमें नीचे की ओर चक्के लगे होते हैं.

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ऑक्सीजन को मरीज के शरीर तक ले जाने के लिए भी कुछ चीजें चाहिए- सांकेतिक फोटो


चाहिए कौन से उपकरण

ये कंसन्ट्रेटर ठीक ऑक्सीजन सिलेंडर की तर्ज पर काम करते हैं और नाक के केनुला या मास्क की मदद से मरीज को सीधे ऑक्सीजन दी जा सकती है. हालांकि जहां ऑक्सीजन सिलेंडर में एक नियत मात्रा में ऑक्सीजन होती है, वहीं कंसन्ट्रेटर में लगातार हवा के जरिए ऑक्सीजन तैयार करके, तब मरीज को दी जा सकती है. अगर बिजली चली जाए और मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत हो तो इसे बैटरी से भी भरा जा सकता है.

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पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर

एक अन्य मशीन होती है, जिसे पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर (Portable oxygen concentrator) कहते हैं. ये तब काफी बढ़िया चॉइस है, जब आपको कोई काम करना हो और इसे कैरी भी करना हो. इसका वजन 3 से 20 पाउंड तक होता है, जिससे ये उठाया जा सके. कई मॉडल ऐसे भी आ रहे हैं, जिसे कार में प्लग-इन करके चार्ज किया जा सके. ऐसे में घर से बाहर रहते हुए भी ऑक्सीजन दी या ली जा सकेगी.

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जहां एक ओर ऑक्सीजन लेने के लिए ये विकल्प हैं तो ऑक्सीजन को मरीज के शरीर तक ले जाने के लिए भी कुछ चीजें चाहिए.



  • इनमें से एक है नेजल केनुला. ये प्लास्टिक की नली होती है, जिसके दोनों सिरे जोड़े जाने लायक होते हैं. ये मरीज की नाक में फिट होता है और दूसरा सिरा ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली चीज से जोड़ा जाता है. नेजस केनुला के जरिए मरीज को लगातार आराम से ऑक्सीजन मिल पाती है. लेकिन इसका एक नुकसान ये है कि नाक में हल्का सूखापन आ जाता है.


  • फेस मास्क भी एक विकल्प है. ये मुंह और नाक को कवर कर लेता है. ये तब जरूरी होता है, जब शरीर को हाई लेवल ऑक्सीजन चाहिए हो. इसके साथ परेशानी ये है कि इसे पहनकर ठीक तरह से बोला या खाया नहीं जा सकता.


  • इन दो विकल्पों के अलावा ट्रांसट्रैक्चियल कैथेलर के जरिए भी शरीर को ऑक्सीजन दी जा सकती है. इसमें एक नली गले में लगाई जाती है. इसका फायदा ये है कि इससे ऑक्सीजन सीधे-सीधे एयरवे में जाती है इसलिए इसकी कम मात्रा की जरूरत पड़ती है. लेकिन नुकसान ये है कि इससे गले में संक्रमण का खतरा रहता है.



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