INX मीडिया केस में ऐसे फंसे पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम

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Updated: August 21, 2019, 2:37 PM IST
INX मीडिया केस में ऐसे फंसे पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम
पी चिदंबरम सुप्रीम कोर्ट से राहत की आस में हैं

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) का सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) से बचना आसान नहीं होगा. वो सुप्रीम कोर्ट से राहत की तलाश में हैं, लेकिन 2007 का मामला पिछले 2 वर्षों में काफी आगे बढ़ चुका है...

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पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) पर सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) का मजबूत घेरा कस चुका है. आईएनएक्स मीडिया केस (INX Media Case) में सीबीआई और ईडी दोनों चिदंबरम की तलाश कर रही है. दिल्ली हाईकोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज हो चुकी है. ईडी ने उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया है, यानी अगर वो देश छोड़कर जाने की कोशिश करते हैं तो एयरपोर्ट पर पकड़ लिए जाएंगे.

देश के पूर्व वित्त और गृहमंत्री अपनी गिरफ्तारी से बचने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं. लेकिन बचने की कोई आसान सूरत नहीं दिखाई पड़ रही. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से रहे पी चिदंबरम के लिए सबसे मुश्किल वक्त आ पड़ा है.

वित्त मंत्री से लेकर गृहमंत्री बनने का सफर
तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में जन्में पी चिदंबरम का ताल्लुक रसूखदार परिवार से रहा है. उनके नाना राजा सर अन्नामलाई चेट्टियार अमीर व्यापारी थे. चिदंबरम ने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की है. उसके बाद उन्होंने हॉर्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए की डिग्री ली है. अस्सी के दशक में चिदंबरम ने मद्रास हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस भी की है.

1984 में वो पहली बार शिवगंगा सीट से लोकसभा सांसद चुने गए. पहली जीत के बाद ही राजीव गांधी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में जगह दी और वो कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री में जूनियर मिनिस्टर बनाए गए. नरसिम्हाव राव की सरकार में भी वो मंत्री रहे. जब भी केंद्र में कांग्रेस या उसकी गठबंधन की सरकार रही पी चिदंबरम ने अहम मंत्रालय को संभाला.

मई 2004 से लेकर 2014 तक पी चिदंबरम वित्त मंत्री रहे. बीच के सिर्फ तीन साढ़े तीन साल के लिए उन्होंने गृहमंत्रालय का पद संभाला. नवंबर 2008 में हुए मुंबई ब्लास्ट के बाद शिवराज पाटिल को गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. जिसके बाद उस नाजुक दौर में पी चिदंबरम गृहमंत्री बनाए गए. जुलाई 2012 में उन्हें फिर से वित्त मंत्री बनाया गया.

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कांग्रेस की हर सरकार में चिदंबरम ने अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली

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2017 में लगा घोटाले का दाग
आईएनएक्स मामला 2007 का है. उस वक्त पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे. 15 मई 2017 को सीबीआई ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की. चिदंबरम पर आरोप लगा कि उनके वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया वेंचर में गलत तरीके से एफडीआई आई. आईएनएक्स मीडिया ग्रुप में 305 करोड़ का फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट हुआ था. इस मामले में चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का नाम भी सामने आया.

ऐसे हुआ आईएनएक्स मीडिया में एफडीआई घोटाला
पूरा मामला आईएनएक्स मीडिया वेंचर में फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) के अप्रूवल के बिना फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट का है. एफआईपीबी की 18 मई 2007 को हुई बोर्ड मीटिंग में आईएनएक्स मीडिया के आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में निवेश को मंजूरी नहीं दी थी. आरोप है कि इसके बाद एफआईपीबी के अप्रूवल को मैन्यूपुलेट किया गया. आईएनएक्स मीडिया ने आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में 305 करोड़ का निवेश किया, जबकि इसके लिए एफआईपीबी का अप्रूवल नहीं था.

इसके महीनों बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हरकत में आई. एफआईपीबी, जो वित्त मंत्रालय के अधीन है, से इस बारे में जवाब-तलब किया गया. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने निवेश के बारे में और एफडीआई को किस आधार पर मंजूरी दी गई, इस बारे में जानकारी मांगी.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से दबाव बढ़ने पर एफपीआईबी ने आईएनएक्स मीडिया से इस बारे में जवाब-तलब किया, जिसके बाद आईएनएक्स मीडिया ने कार्ति चिदंबरम की सेवाएं लीं. सीबीआई का आरोप है कि मामले को सुलझाने के लिए कार्ति चिदंबरम ने तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ अपने रिश्तों का गलत इस्तेमाल किया. सीबीआई का कहना है कि कार्ति चिदंबरम ने एफआईपीबी के कुछ ब्यूरोक्रैट्स की मदद ली.

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2007 का है आईएनएक्स केस में एफडीआई घोटाले का मामला


चिदंबरम के साथ उनके बेटे कार्ति पर भी कसेगा शिकंजा

सूत्रों के मुताबिक, कार्ति की कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की सलाह पर आईएनएक्स मीडिया ने 26 जून 2008 को इस बारे में सफाई दी. कंपनी का कहना था कि निवेश शेयर में हुए मुनाफे की शक्ल में किया गया था. सीबीआई का आरोप है कि इसके बाद कार्ति चिदंबरम के प्रभाव की वजह से एफआईपीबी के अधिकारियों ने इस ओर से आंखें मूंद लिया. इतना ही नहीं एफआईपीबी के कुछ अधिकारियों ने आईएनएक्स मीडिया को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया.

एफआईपीबी ने आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड को फ्रेश अप्रूवल पाने के लिए फिर से अप्लाई करने को कहा. एफआईपीबी ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट की सलाह को भी अनदेखा कर दिया. रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने इस मामले की जांच की सिफारिश की थी और कहा था कि एफडीआई में नियमों की अनदेखी की गई है और एफआईपीबी के अप्रूवल के बिना निवेश हुआ है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में मुख्य साजिशकर्ता माना है. पी चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए कंपनी को एफडीआई क्लीयरेंस दी गई थी. पी चिदंबरम का इस आरोप से पीछा छुड़ाना आसान नहीं रह गया है.

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First published: August 21, 2019, 1:19 PM IST
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