प्रशांत महासागर के नीचे मिले करोड़ों साल पुरानी 'नई' चट्टानें

इन चट्टानों (Rocks) का प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में मिलने की खास वजह है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इन चट्टानों (Rocks) का प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में मिलने की खास वजह है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) की पैसिफिक रिम (Pacific Rim) में वैज्ञानिकों को ऐसी नई बेसाल्ट चट्टान (Basalt) मिली है जो अब तक मिली चट्टानों से पूरी तरह से अलग है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 5:59 PM IST
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पृथ्वी (Earth) में आज भी बहुत से रहस्य छिपे हैं. कई बार भले ही लगे के हम बहुत कुछ जान गए हैं, लेकिन नई खोजें इंसान को चौंकाती रहती हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नए तरह के पत्थर (Rock) की खोज की है जिसने उन्हें चौंकाया है. यह खोज अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने प्रशांत महासगार (Pacific Ocean) के नीचे एक किलोमीटर के गड्ढे में की है. जब वैज्ञानिकों ने इन पत्थरों को निकाला और उनका रासायनिक और खनिज विश्लेषण किया तो पाया कि ये पत्थर उन सभी पत्थरों से अलग हैं जो अब तक ज्ञात हैं.

कितने पुराने हैं ये पत्थर

वैज्ञानिकों को विश्वास है कि यह चट्टान और पत्थर केवल कुछ लाख साल पहले पैसिफिक रिम के पास बने होंगे जो प्रशांत महासागर के पास का गोल इलाका है. माना जा रहा है कि ये पत्थर उस मशहूर ज्वालामुखी क्रियाओं वाले काल में बने होंगे जिसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं. विश्लेषण के बाद यह पाया गया कि ये पत्थर करीब 4.9 करोड़ साल पहले के बने हैं.

क्यों अलग तरह की बनी ये चट्टानें
इस रिंग में यानि प्रशांत महासागर के इस ज्वालामुखी सक्रिय इलाके में स्थित इस रिंग में बहुत ही गर्म हालात होने की वजह से एक अलग ही तरह की चट्टान बन गई. समुद्र से मिलने प्रमाण सुझाते हैं कि जितना पहले समझा जा रहा था, वह आग इस बहुत ही गर्म और व्यापक थी जिनसे ये चट्टानें बनी हैं.

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यह चट्टान (Rock) बहुत ही ज्यादा गर्म लावे (Lava) से बनी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


एक अलग ही प्रकार की बेसाल्ट चट्टानें



इस अध्ययन के नतीजे हाल ही में नेचर कम्यूनिकेशन्स में प्रकाशित हुए हैं जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स ने शोधकर्ताओं ने किया है. प्रेस रिलीज में वैज्ञानिकों ने कहा, “ जो पत्थर हमें मिले हैं वे उन चट्टाने से बहुत अलग हैं जिनके बारे में अब तक हमें पता था. यहां तक कि वे पृथ्वी की ज्ञात बेसाल्ट और चंद्रमा के बेसाल्ट जितना फर्क ही दिखाई दे रहा है.”

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क्या होती हैं ये चट्टानें

बेसाल्ट चट्टाने तब बनती हैं जब लावा तेजी से ठंडा होता है, यहां तक कि वे सक्रिय ज्वालामुखी में भी बनती हैं. इनकी विशेषताएं उस तापमान और दबाव पर निर्भर करती हैं जिनसे ये बनती हैं. लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि रिंग ऑफ फायर में हुए बड़े बदलावों के कारण यहां अलग ही किस्म की बेसाल्ट चट्टानों का निर्माण हुआ है.

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प्रशांत रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire) इलाके में होने से इस चट्टान के लावा का तापमान बहुत ही ज्यादा गर्म था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


मैंटल से आया था लावा

शोधकर्ताओं का कहना है कि भले ही 4.9 करोड़ साल एक लंबा समय लगता हो, लेकिन भूगर्भीय मामलों में यह बहुत लंबा समय नहीं हैं, पृथ्वी की बहुत सारी चट्टानें इससे भी ज्यादा पुरानी हैं. इस खोज से यह भी पता चलता है कि महासागर के तल में हुए प्रस्फोट में पृथ्वी की मैंटल से लावा आया था. जो बहुत ही ज्यादा गर्म और तादात में कहीं ज्यादा था.

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इस रिपोर्ट के सहलेखक और लीड्स यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायर्नमेंट के इंस्टीट्यूटऑफ जियोफिजिक्स एंड टेक्टोनिक्स के डॉ इवान सावोव का कहना है कि  आज के हम लोग अंतरिक्ष की खोजों की तारीफ में लगे हैं, उनकी खोज बताती है कि पृथ्वी पर अब भी बहुत खोजा जाना बाकी है.
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