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वो आर्मी, जिससे छूट रहे पाकिस्तानी सेना के छक्के

बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी बलूचिस्तान की आजादी की मांग कर रही है
बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी बलूचिस्तान की आजादी की मांग कर रही है

पाकिस्तान के पश्चिमी राज्य बलूचिस्तान में बलूच लिब्रेशन आर्मी ने पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह छेड़ रखा है. अरसे से इनकी मांग बलूचिस्तान की आजादी रही है.

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पाकिस्तान हमेशा से कश्मीर में दहशतगर्दी को हवा देता रहा है. कश्मीर में आतंकवाद के फैलने पीछे पाकिस्तान का हाथ रहा है. वक्त-वक्त पर इसके सबूत भी मिलते रहे हैं. दुनिया भर में आतंकवाद को पालने के लिए पाकिस्तान की फजीहत हो चुकी है लेकिन फिर भी वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आता. उसी का नतीजा है कि पाकिस्तान खुद अपने यहां पल रही एक सेना से परेशान है. पाकिस्तान की सरकार, वहां की सेना, वहां की कानून-व्यवस्था की नाक में दम करने वाली उस सेना का नाम है बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी.

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बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने पाकिस्तान की सारी हेकड़ी निकाल दी है. पाकिस्तान के कब्जे वाले राज्य बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाली इस आर्मी ने सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ रखा है. पाकिस्तानी सरकार और सेना जितना बलूचिस्तान और वहां की आवाम को जितना दबाने, सताने और अत्याचार के काम करती है, उतना ही ताकत से बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी उसका विरोध करती है. पिछले दिनों बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने पाकिस्तान को सीधी धमकी दी कि अब वो आत्मरक्षा की नीति पर नहीं बल्कि आक्रमण की नीति पर चलेंगे. पाकिस्तानी शहर इस्लामाबाद और लाहौर में सीधे हमले होंगे.



क्या चाहती है बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ?
पाकिस्तान के पश्चिम इलाके का राज्य है बलूचिस्तान. इसकी राजधानी क्वेटा है. बलूचिस्तान के लोग 1944 से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं. 1947 में बलूचिस्तान को जबरन पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया. तभी से बलूच लोगों का पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना से संघर्ष चल रहा है. पाकिस्तान की सरकार और वहां की आर्मी इस विरोध को बेदर्दी से कुचलती रही. इसी के प्रतिरोध में 70 के दशक में बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी का गठन हुआ. जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार के खिलाफ बलूच लोगों ने सशस्त्र विद्रोह कर दिया. लेकिन इसके बाद सैन्य तानाशाह जियाउल हक के पाकिस्तान पर कब्जे बाद बलूच लोगों का विद्रोह काफी हद तक शांत हो गया.

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पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान के लोगों पर बुरी तरह से अत्याचार कर रही है


बलूचिस्तान में क्या है विवाद का मसला

पाकिस्तान के कब्जे वाला बलूचिस्तान प्राकृतिक तौर पर काफी संपन्न इलाका है. यहां की धरती खनिज संपदा से भरी पड़ी है. पाकिस्तान यहां की खनिज संपदा का दोहन करके पैसे बना रहा है लेकिन बलूचिस्तान के विकास की तरफ कभी ध्यान नहीं देता. यहां के लोग अब भी बेहद गरीबी में जी रहे हैं. जबकि यहां तेल, गैस, तांबे और सोने जैसे कुदरती संपदा की भरमार है. बलूच लोग सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पाकिस्तान के बाकी हिस्सों से काफी अलग हैं. वो खुद को पंजाबियों के हाथों शोसित मानते हैं. पाकिस्तान की आर्मी वहां के लोगों को अपना निशाना बनाती रहती है. जिसका बलूच विरोध करते हैं.

पाकिस्तान के बाद अब अमेरिका ने भी लगाया है बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी पर बैन

बलूचिस्तान के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना ने उनकी जिंदगी नर्क बना रखी है. ऐसे बदतर हालात से निकलने के लिए पाकिस्तान पर हमले करना जरूरी है. वो बांग्लादेश की तरह बलूचिस्तान की आजादी की मांग कर रहा है. इस दिशा में वो भारत की तरफ आशा की नजरों से देखता है. बीएलए के सशस्त्र विद्रोह की वजह से पाकिस्तान ने उस पर बैन लगा रखा है. पिछले दिनों पाकिस्तान के प्रभाव में आकर अमेरिका ने भी बीएलए को प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित कर दिया. यूएस के विदेश मंत्रालय का कहना है कि बीएलए पाकिस्तान की आर्मी और आम नागरिकों पर हमले करता है. बीएलए के सशस्त्र विद्रोह करने वाला अलगाववादी संगठन है.

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बलूचिस्तान में चीन ग्वादर पोर्ट बना रहा है जिसका बीएलए विरोध कर रही है


बीएलए पर क्या है भारत का रूख

भारत ने बलूचिस्तान की दिक्कत पर संयमित रूख रखा है. बलूचिस्तान की तरफ से लड़ने वाले कमांडर फर्जी नाम पते से भारत का मेडिकल ट्रीटमेंट लेते रहे हैं. पाकिस्तान आरोप लगाता है कि भारत बलूचिस्तान में सशस्त्र विद्रोह में मदद कर रहा है. भारत बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर चिंता जताता आया है. जिस तरह से बलूच लोगों को वहां की आर्मी की हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है, उस पर भारत ने चिंता जताई है. लेकिन पाकिस्तान को इसी बात से मिर्ची लग जाती है.

कूटनीतिक तौर पर बलूचिस्तान के मसले पर भारत का स्टैंड काफी मायने रखता है. पिछले 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर बलूचिस्तान के लोगों का धन्यवाद दिया था. इससे भारत की विदेश नीति में बदलाव के तौर पर देखा गया था.

बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी के ज्यादातर नेता निर्वासित जीवन जी रहे हैं. पाकिस्तान उन्हें परेशान करता रहा है. हालांकि इसके बावजूद बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी के हौसले पस्त नहीं पड़े हैं. इस आर्मी के जवानों ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की कसम खा रखी है.

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