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इस नमक पर 'मेड इन इंडिया' लिखने से पाकिस्तान को लगी मिर्ची

सेंधा नमक बड़े टुकड़ों में भारत आता है और इसकी यहां पैकेजिंग और मार्केटिंग की जाती है

सेंधा नमक बड़े टुकड़ों में भारत आता है और इसकी यहां पैकेजिंग और मार्केटिंग की जाती है

गुलाबी रंग के हिमालयन साल्ट पर पाकिस्तान अपना दावा जता रहा है. ये वही नमक है, जिसे हम सेंधा नमक कहते हैं और इसे व्रत के ...अधिक पढ़ें

एक नमक जो भारत में सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे पवित्र नमक माना जाता है. जिसका  इस्तेमाल व्रत-त्योहारों में काफी ज्यादा होता है, उस पर पाकिस्तान विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान की संसद में मांग की जा रही है कि भारत को ये नमक भेजना बंद किया जाना चाहिए. भारत उनके इस नमक को "मेड इंन इंडिया" का ठप्पा लगाकर प्रोसेस और पैकेजिंग कर रहा है.

इस नमक को हिमालयन साल्ट भी कहा जाता है. इसे गुलाबी नमक भी कहते हैं, इसका रंग गुलाबीपन लिए होता है. भारत में हम इसे सेंधा नमक के तौर पर जानते हैं. ये आमतौर पर पाकिस्तान से भारत आता है. लंबे समय से भारत में इसका इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि इसका भारत आना अब पाकिस्तान में एक बड़ा मुद्दा बन रहा है.

माना जाता है कि इस नमक का जन्म लाखों साल पहले प्राकृतिक तौर पर हुआ. ये हिमालय के आसपास के इलाके में पाया गया, लिहाजा इसे हिमालयन नमक भी कहा जाता है. हालांकि दुनिया का 98 फीसदी ये नमक पाकिस्तान से बड़े-बड़े टुकड़ों में निर्यात होता है. सबसे ज्यादा इसकी खपत भारत में है.

पाकिस्तान में इसे खेवर नमक खदानों से निकाला जाता है, जो झेलम नदी की साल्ट रेंज कही जाने वाली पहाड़ियों की तलहटी में है.

पाकिस्तान को मेड इन ठप्पे से एतराज 
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर पाकिस्तान में एक स्टोरी वायरल हुई कि किस तरह से भारत इस नमक को पैकेज और प्रोसेस करते दुनियाभर में निर्यात कर रहा है. इन पर "मेड इन इंडिया"  का ठप्पा भी लगाया जा रहा है. पाकिस्तान को इस पर काफी ज्यादा एतराज है.
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ये नमक अब पाकिस्तानियों के लिए एक बड़ा मामला बन रहा है, जिसे वो देश के सम्मान और संप्रुभता से जोड़कर देख रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि इस गुलाबी नमक से जो काम वो कर सकते थे, वो लंबे समय से भारत कर रहा है. पाकिस्तान में तो पिछले दिनों ट्विटर पर इसे लेकर ट्रेंड भी चला. वहां सवाल उठ रहा है कि अगर ये नमक भारत में होता ही नहीं बल्कि पाकिस्तान से जाता है तो भारत के व्यापारी इसकी पैकेजिंग करके कैसे इस पर "मेड इन इंडिया" लिख सकते हैं.

चीन के लोकप्रिय अखबार साउथ मार्निंग चाइना पोस्ट में भी इस बारे में एक रिपोर्ट हाल में प्रकाशित हुई है. इसके अनुसार पाकिस्तान के कुछ नेताओं ने इस मुद्दे को पिछले दिनों वहां की नेशनल एसेंबली में उठाया.

उनका कहना था कि ये सुनिश्चित किया जाए कि दुनियाभर में प्रोसेस और पैकेट्स के रूप में ये नमक पाकिस्तान को बेचना चाहिए ना कि भारत को.

वैसे हकीकत ये है कि पाकिस्तान के नेता जिस नमक को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, उसकी कोई प्रोसेस यूनिट पाकिस्तान में नहीं है.

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पाकिस्तान में हिमालयन नमक, जिसे सेंधा नमक भी कहा जाता है, उसे इसी रूप में निकालकर भारत भेजा जाता है


वो गुफा जहां से ये नमक निकलता है
पाकिस्तान की जिस खेवर नमक की खदान से ये नमक निकाला जाता है वो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी गुफा भी है. ये विदेश से पाकिस्तान आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी रहती है. कहा जाता है कि ये गुफा करीब 110 किलोमीटर में फैली है, जिसका आधा हिस्सा पहाड़ के नीचे है.

इससे सालाना 3.5 लाख टन गुलाबी नमक का उत्पादन होता है. माना जाता है कि अगर इससे इसी रफ्तार से नमक का उत्पादन होता रहे, तब भी अगले 350 सालों तक इसमें नमक कम नहीं पड़ने वाला.

भारत तीसरा बड़ा नमक उत्पादक 
दुनिया में नमक कई रंगों में मिलता है. लेकिन नमक उत्पादन और निर्यात की बात करें तो पाकिस्तान दुनिया के दस बड़े नमक निर्यातकों में नहीं है. भारत दुनिया का तीसरा बड़ा नमक उत्पादक और निर्यातक देश है. दुनियाभर में नमक उत्पादन में केवल चीन और अमेरिका ही उससे आगे हैं.

भारत चार तरह के नमक का उत्पादन होता है. उसमें समुद्री नमक, झील के पानी से बना नमक और स्वाइल और राक साल्ट का उत्पादन शामिल है. देश में गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र, बंगाल, राजस्थान इसके बड़े उत्पादन केंद्र हैं. हिमालयन नमक जैसा राक साल्ट बड़े पैमाने पर हिमाचल के मंडी में भी मिलता है.

हिमालयन नमक की खासियत 
हिमालयन नमक का रंग गुलाबी इसलिए होता है,क्योंकि इसमें आयरन होता है, इसमें आम नमक की तुलना में प्राकृतिक गुण ज्यादा हैं, क्योंकि ये प्राकृतिक तौर पर मिलता है और इसे कृत्रिम तौर पर प्रोसेस करने की जरूरत नहीं पड़ती.

ये नमक से खाये गए खाने को ज्यादा पवित्र और शुद्ध माना जाता है, इसीलिए भारत में व्रत करने वाले लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. शुद्ध नमक के तौर पर भी इसके इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. ये सौंदर्य प्रसाधनों और त्वचा संबंधी रोगों में दवाई के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.

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हिमालयन नमक का रंग गुलाबी इसलिए होता है,क्योंकि इसमें आयरन होता है, इसमें आम नमक की तुलना में प्राकृतिक गुण ज्यादा हैं,


पाकिस्तान को मिर्ची की असल वजह 
पाकिस्तान को मिर्ची इसलिए भी लग रही है कि उसके देश से हिमालयन नमक का एक्सपोर्ट भारत की तुलना में ना केवल बहुत कम है बल्कि इससे वो बहुत कम विदेशी मुद्रा अर्जित करता है. वहीं भारत ना केवल बड़े नमक उत्पादकों में है बल्कि वो इसे बेहतरीन तरीके से प्रोसेस और पैकेजिंग करके दुनियाभर में इस मामले में धाक जमा चुका है.

पाकिस्तानी मीडिया में बड़े पैमाने पर पिछले दिनों ये खबरें प्रकाशित हुईं कि किस तरह पाकिस्तानी नमक बहुत सस्ती दर पर भारत जाता है. फिर  ऊंची दरों पर प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के साथ भारत से बाहरी देशों को. पाकिस्तान का आरोप है कि भारत इससे अरबों डॉलर अर्जित कर रहा है.

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पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि 1947 में भारत ने हमसे एक समझौता किया था कि ये नमक उसे अबाध तरीके से पाकिस्तान से भेजा जाता रहेगा


भारत में कहां हैं प्रोसेसिंग यूनिट्स
भारत में कोच्चि, मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली में हिमालयन नमक की बड़ी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट्स हैं. उनसे खाड़ी देशों से लेकर जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, कनाडा और पूरी दुनिया में इसे भेजा जाता है.

इस नमक को लेकर हुआ था समझौता 
पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि 1947 में बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच गुलाबी नमक को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसके तहत युद्ध हो या शांति ये नमक लगातार भारत को भेजा जाता रहेगा, इसी तरह भारत इस बात पर सहमत था कि वो अबाध तरीके से पानी की आपूर्ति करते रहेंगे. पाकिस्तान का दावा है कि 2016 में भारत ने उनसे 625 टन सेंधा नमक खरीदा. ये उसने 2.98 रुपये प्रति किलो की दर से लिया, जिसे उसने 125 रुपये प्रति किलो की दर से बाहर बेचा.

वैसे यहां ये बताना जरूरी है कि पाकिस्तान के अलावा ये नमक ऑस्ट्रेलिया, पेरू और कुछ हद तक भारत में भी मिलता है.

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Tags: Food business, History of Salt, Pakistan, Tata salt

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