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पाकिस्तान में मंदिरों के खस्ता हाल की जांच के लिए बने आयोग ने क्या कहा

पाकिस्तान का प्रसिद्ध कटास राज मंदिर परिसर, जिसकी हालत दिनोंदिन खराब हो रही है.

पाकिस्तान का प्रसिद्ध कटास राज मंदिर परिसर, जिसकी हालत दिनोंदिन खराब हो रही है.

कुछ समय पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने देश में प्राचीन और पुरातत्व महत्व के हिंदू मंदिरों की स्थिति और रखरखाव के बारे में एक आयोग का गठन किया था. उसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इस रिपोर्ट में उसने माना है कि मंदिरों के रखरखाव को लेकर लापरवाही हो रही है. जानें आयोग ने और क्या कहा

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    पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में देश में प्राचीन हिंदू मंदिरों की खराब स्थिति पर मीडिया रिपोर्ट्स के बाद एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था. अब डॉक्टर शोएब सदल आयोग ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है. जिसमें उन्होंने माना है कि पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों के प्रति उपेक्षा दिखाई जा रही है. नतीजतन उनकी हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है. जानते हैं कि इस आयोग ने और क्या कहा. उसके किस तरह पाकिस्तान में प्राचीन और पुरातत्व की दृष्टि से महत्व वाले हिंदू धार्मिक स्थलों का दौरा किया.

    आयोग ने अपनी रिपोर्ट पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट को 05 फरवरी को सौंपी. रिपोर्ट में कहा गया कि हजरती ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड यानि इवाक्यु ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड (ETPB) ज्यादातर प्राचीन साइट्स पर अपना काम करने में नाकाम रहा है. ये सभी साइट्स धार्मिक महत्व की ज्यादा हैं.

    आयोग ने चकवाल के प्रसिद्ध चकवाल कटास राज मंदिर, मुल्तान के प्रह्लाद मंदिर के साथ अन्य मंदिरों का पिछले दिनों दौरा दिया. दरअसल पाकिस्तान में सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल हिंदुओं के ही हैं और उन दिनों उनका कोई पुरसाहाल नहीं है. न तो ट्रस्ट और न ही सरकार इस ओर कोई ध्यान देती है. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस ओर ध्यान देते हुए आयोग गठित किया.

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    इस एक सदस्यीय आयोग की मदद के लिए तीन और सहयोगी सदस्य भी इसमें शामिल किये गए, जो सांसद डॉक्टर रमेश वांकानी, साकिब जिलानी और डिप्टी अटार्नी जनरल थे. जिन्होंने तथ्य इकट्ठा करने में आयोग की मदद की.

    आयोग ने सवाल पूछा कि बलूचिस्तान के हिंगलाज भवानी मंदिर में हर साल बडे़ पैमाने पर लोग दर्शन के लिए आते हैं. ये प्राचीन भी है और बहुत ज्यादा मान्यताप्राप्त मंदिर भी, तब भी इसका रखरखाव क्यों नहीं किया जा रहा है.

    ट्रस्ट को कठघरे में खड़ा किया
    रिपोर्ट में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट सीधे ट्रस्ट को निर्देश दे कि वो इन धार्मिक स्थलों की मरम्मत और इनके बेहतर रखरखाव पर तुरंत काम शुरू करे. इसमें तेरी मंदिर को फिर से बनाने की सुझाव भी है, जिसे हाल में उपद्रवी भीड़ ने तोड़ दिया था.

    कई मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम होना है
    रिपोर्ट में करक तेरी मंदिर, कटास राज मंदिर (चकवाल), प्रहलाद मंदिर (मुल्तान) और हिंगलाज मंदिर (लासबेला) के जीर्णोद्धार के लिए काम शुरू करना भी शामिल है. पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू और सिख धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का काम इवाक्यु ट्रस्ट के तहत ही आता है लेकिन अब तक ये ट्रस्ट बिल्कुल ही निष्क्रिय रहा है.

    ये पाकिस्तान का प्राचीन प्रहलाद मंदिर है. जिसके परिसर को मेंटेन रखने का जिम्मा हजरती ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड का है लेकिन वो उस पर भी ध्यान नहीं देता.

    ट्रस्ट हमेशा टालमटोल करता रहा है
    ये आयोग अपनी कई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को जनवरी से अब तक सौंप चुका है. ये आखिरी रिपोर्ट थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्स्ट को निर्देश दिया है कि वो इन सभी स्थलों पर काम करके अपने काम की रिपोर्ट उसे जल्द से जल्द सौंपे.

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    हालांकि ट्रस्ट ने इस पर अब तक रिस्पांस नहीं दिया था. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद 25 जनवरी को ट्रस्ट ने कोर्ट के सामने रिस्पांस जरूर दिया लेकिन अब भी उसका रवैया टालमटोल वाला ज्यादा है.

    पाकिस्तान के हजरती ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड के पास करीब 400 हिंदू मंदिरों के रखरखाव का जिम्मा है लेकिन उसे नहीं मालूम कि 280 के आसपास हिंदू मंदिर कहां चले गए.

    287 हिंदू मंदिरों के भूमाफिया द्वारा जमींदोज होने की बात स्वीकारी
    ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट को जो पत्र भेजा है. उसके अनुसार पाकिस्तान में कुल 365 प्राचीन मंदिरों में केवल 13 का ही प्रबंधन उसका द्वारा किया जाता है जबकि 65 की जिम्मेदारी उसने हिंदू समुदाय को दे दी है जबकि 287 स्थलों को भूमाफिया द्वारा जमींदोज किया जा चुका है. हालांकि हैरानी वाली बात है कि नई तकनीक के बाद भी ट्रस्ट को अपनी संपत्तियों के बारे में जानकारी क्यों नहीं है.

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    ट्रस्ट के कामकाज पर आयोग ने सवाल उठाया
    आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाया है जबकि उसके कर्मचारी पूरे देश में हैं और बड़े पैमाने पर स्थलों का प्रबंधन करते हैं. रिपोर्ट कहती है कि बलूचिस्तान का हिंगलाज मंदिर विश्व प्रसिद्ध है. दुनियाभर से लोग यहां आते हैं लेकिन उसके प्रति भी रुख उपेक्षाजनक रहता है, उसकी देखभाल की ओर ध्यान नहीं दिया जाता.

    कटास राज भव्य मंदिर परिसरों में एक 
    रिपोर्ट कहती है कि कटास राज मंदिर भव्य प्राचीन मंदिर परिसरों में है लेकिन उसकी हालत भी दिनोंदिन खराब हो रही है. रिपोर्ट के अनुसार बंटवारे के बाद जब बड़े पैमाने पर हिंदू यहां से चले गए तो तमाम मंदिरों पर स्थानीय मुस्लिमों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया लेकिन इसके बाद भी ट्रस्ट का ध्यान उस ओर कभी नहीं गया.

    रिपोर्ट कहती है कि 1997 से कई बार हिंदू समुदाय खुद कुछ महत्व के मंदिरों को हाथ में लेकर उनके रखरखाव की बात करता रहा है लेकिन उस पर ट्रस्ट की भूमिका उचित नहीं रही है. उन्होंने कभी अवैध कब्जों पर भी ध्यान नहीं दिया. यहां तक अवैध कब्जों के बाद भी ट्रस्ट ने ऐसे लोगों के खिलाफ कभी एफआईआर दर्ज करके कार्रवाई नहीं की.

    गौरतलब है कि ट्रस्ट को कई मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए मोटा धन आवंटित किया गया था लेकिन उन पर भी काम नहीं हुआ.

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