क्यों PAK में बार-बार हिंदू संत की समाधि पर हमला होता रहा है?

पाकिस्तान में परमहंस स्वामी अद्वैतानंद की समाधि पर स्थानीय चरमपंथियों ने हमला कर दिया था (Photo- news18 English via AP)

पाकिस्तान में दिसंबर 2020 में हिंदू मंदिर (Hindu temples in Pakistan) समेत एक संत की समाधि को आग के हवाले कर दिया गया था. तब पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने बीच-बचाव किया था. वैसे हिंदू मंदिरों की दुर्दशा वहां नई बात नहीं. इससे पहले भी कई हिंदू मंदिर निशाने पर आते रहे हैं.

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    पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में साल 2020 के आखिर में परमहंस स्वामी अद्वैतानंद की समाधि पर स्थानीय चरमपंथियों ने हमला कर दिया था. इससे पहले भी समाधिस्थल और उसके पास बना मंदिर लगातार हमलों का शिकार होता रहा. अब पाकिस्तान सरकार ने जानकारी दी है कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सुलह हो चुकी है. हालांकि ये बात सोचने की है कि पाकिस्तान में हिंदू धर्मस्थलों क्यों लगातार हमलों का शिकार होते आए हैं.

    शुरुआती घटनाक्रम ये है कि खैबर पख्तूनख्वा के करक जिले में कट्टरपंथी लोगों ने एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की और पूरा मंदिर आग के हवाले कर दिया. ये दिसंबर के अंत की बात है. इससे पहले साल 1997 में इस समाधिस्थल को पूरी तरह से तोड़फोड़ दिया गया. इसके बाद हिंदुओं की मांग पर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में इसके पुर्ननिर्माण की इजाजत दे दी थी.

    मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले स्थानीय मुस्लिमों का कहना था कि समाधि की जगह उनके लिए घरों का निर्माण होना चाहिए. तोड़फोड़ की बात के बड़ा मुद्दा बनने पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंदिर दोबारा बनाने की इजाजत दी.

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    खैबर पख्तूनख्वा के करक जिले में कट्टरपंथी लोगों ने हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की थी


    लेकिन साथ ही उनकी शर्त भी थी. इसके मुताबिक हिंदू कभी भी टेरी में अपने धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं करेंगे. वे केवल जमा होकर प्रार्थना कर सकेंगे. समाधि पर उन्हें न तो बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करने की इजाजत होगी और न ही समाधि स्थल पर किसी बड़े निर्माण कार्य की मंज़ूरी दी जाएगी. इसके अलावा क्षेत्र में हिंदू समुदाय के लोग क्षेत्र में जमीन भी नहीं खरीद सकेंगे और उनका दायरा केवल समाधि स्थल तक ही सीमित रहेगा.

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    अब कुछ जानकारी उस संत के बारे में भी जानते चलें जिनके समा्धि स्थल पर दशकों से हमले होते आए हैं. श्री परमहंस महाराज नाम के इस संत के पूरी दुनिया में समर्थक हैं लेकिन भारत की बड़ी आबादी उनसे अनजान है. उनका पूरा नाम परमहंस स्वामी अद्वैतानंद था. साल 1846 में उनका जन्म बिहार के छपरा में हुआ.

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    परमहंस स्वामी अद्वैतानंद की समाधि खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में है


    लगभग 16 साल की उम्र में उन्होंने घर थोड़कर आध्यात्म की तलाश शुरू कर दी. संन्यास का प्रचार-प्रसार करते हुए स्वामी जी देशभर में घूम रही थे. इसी दौरान वे टेरी पहुंचे. ये देश विभाजन से पहले की बात है, जब टेरी भारत का ही हिस्सा हुआ करता था. उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी समाधि यहीं बनाने की इच्छा जताई थी. इसकी वजह ये बताई जाती है कि इसी जगह आकर उन्हें आध्यात्मक की अलौकिक ताकत का अहसास हुआ था.

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    लगभग 100 साल पहले जब वे टेरी पहुंचे थे तो यहां रहते हुए उनके लिए एक मंदिर बनाया गया. स्वामी जी की मृत्यु के बाद साल 1919 में उनकी समाधि वहीं बनाई गई और साथ में मंदिर भी रखा गया. हालांकि भारत विभाजन के बाद से लगातार इस समाधि पर विवाद होने लगा.

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    थाना बुल्ला खान में एक हिंदू आश्रम


    वैसे ये मंदिर अकेला नहीं, जिसपर कट्टरपंथी हमले होते हैं, बल्कि पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों की स्थिति लगातार खराब हो रही है. हाल ही में पेश की गई एक रिपोर्ट में ये बात कही गई है. इसके मुताबिक इमरान सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं. पाकिस्तानी मीडिया द डॉन की खबर के अनुसार एक सदस्यीय आयोग द्वारा तैयार की गई ये रिपोर्ट 5 फरवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई, जिसमें धार्मिक स्थलों की खस्ताहालत के बारे में बताया गया.

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    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैसे अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों के लिए जिम्मेदार इक्विटी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) अपने मकसद को पूरा नहीं कर सका. रिपोर्ट में कहा गया है कि ETPB के मुताबिक पाकिस्तान में कुल 365 हिंदू मंदिर हैं. इन 365 मंदिरों में से केवल 13 का प्रबंधन देख रहा है, वहीं 65 धार्मिक स्थलों की जिम्मेदारी खुद हिंदू समुदाय के पास है. बकौल ETPB इस वजह से वो इनके लिए जिम्मेदार नहीं है. जबकि बाकी 287 धार्मिक स्थल भूमाफिया के कब्जे में पड़े हुए हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट को दी गई रिपोर्ट में ETPB पर आरोप है कि उसने जानते हुए ही अल्पसंख्यकों के धर्मस्थलों को सहेजने में रुचि नहीं दिखाई और उसका ध्यान प्रवासी अल्पसंख्यकों की महंगी संपत्तियों पर कब्जा करने में रहा.

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