टेरर फंडिंग पर इस रिपोर्ट से बढ़ी PAK की मुसीबत

टेरर फंडिंग पर अमेरिकी की रिपोर्ट के चलते पाकिस्तान की मुसीबतें और बढ़ गई हैं.
टेरर फंडिंग पर अमेरिकी की रिपोर्ट के चलते पाकिस्तान की मुसीबतें और बढ़ गई हैं.

वैश्विक आतंकवाद ( world terrorism) पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी संसद पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगा सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2019, 6:43 PM IST
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फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की तरफ ब्लैकलिस्ट किए जाने से बामुश्किल बचे पाकिस्तान (Pakistan) के लिए अमेरिका की एक टेरर फंडिंग रिपोर्ट ने एक और मुसीबत खड़ी कर दी है. टेरर फंडिंग को लेकर एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान आतंकवादी समूहों की फंडिंग रोकने में पूरी तरह से असफल रहा है. रिपोर्ट आने के बाद अमेरिका संसद पर पाकिस्तान के ऊपर कड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का दबाव बना है. आतंकवाद को लेकर अमेरिकी संसद के प्रस्ताव पर विदेश मंत्रालय ने 2018 के आधार पर वार्षिक रिपोर्ट जारी की है.

वैश्विक आतंकवाद पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी संसद पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगा सकती है. गौरतलब है कि इससे पहले वैश्विक टेरर फंडिंग पर निगरानी करने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान पर आतंकवादी समूहों पर कार्रवाई करने के लिए चार महीने का समय दिया है.

रिपोर्ट आने के बाद अमेरिका संसद पर पाकिस्तान के ऊपर कार्रवाई करने का दबाव बना है.




आतंकवादी समूहों पर पाक ने नहीं की कार्रवाई
अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर पल रहे आतंकवादी समूहों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. बल्कि सरकार इन आतंकवादी संगठनों के लिए धन जुटाने में मदद कर रही है. पाकिस्तान में खुले आम लश्कर-ए- तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे कई आंतकवादी संगठनों के लिए बिना रोक-टोक के आम लोगों से फंड इकट्ठा किया जा रहा है.

हाल ही में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को टेरर फंडिंग को रोकने के लिए 27 एक्शन प्वाइंट पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन इनमें से 22 प्वाइंट पर पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की. जबकि मात्र 5 प्वाइंट पर दिखावे के लिए आंशिक कदम उठाए थे. एफएटीएफ ने पाकिस्तान को शेष 22 प्वाइंट्स पर फरवरी 2020 तक ठोस कार्रवाई के लिए समय दिया है. अगर तय समय तक पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.

एफएटीएफ की 22 प्वाइंट पर पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की जबकि मात्र 5 प्वाइंट पर दिखावे के लिए आंशिक कदम उठाए


अमेरिकी संसद का पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव
टेरर फंडिंग पर रिपोर्ट आने के बाद अमेरिकी संसद का पाकिस्तान पर कार्रवाई के लिए दबाव रहेगा. हालांकि यह कहना मुश्किल है कि अमेरिकी सरकार इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती है. वहीं अमेरिकी मीडिया में भी इस रिपोर्ट पर कवरेज कम हो रही है, लेकिन इसकी चर्चा जरूर हो रही है.

अमेरिकी रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान ने तालिबान के साथ चल रही अमेरिका की शांति वार्ता में कोई मदद नही कर रहा है. अफगानिस्तान में सक्रिय तालिबान आतंकी समूह हक्कानी गुट को पाकिस्तान की मदद अभी भी जारी है. जिसको देखते हुए पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख में बदलाव आया है. अमेरिका के रुख में आए इस बदलाव के चलते भारत के साथ उसका संबंध काफी प्रगाढ़ हुए हैं.

फगानिस्तान में सक्रिय तालिबान आतंकी समूह हक्कानी गुट को पाकिस्तान की मदद अभी भी जारी है.


कश्मीर मसले पर भारत को मदद
अमेरिका के इस ताजा रुख से भारत को कश्मीर सहित अन्य आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में लाभ मिल रहा है. भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधानिक प्रावधान आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने और राज्य को दो यूनियन टेरिटरी में बदल दिया गया. पाकिस्तान द्वारा इस कदम पर हायतौबा करने के बावजूद अमेरिका भारत के साथ खड़ा नजर आया. लेकिन अफगानिस्तान और पाकिस्तान का परमाणु सम्पन्न होना अमेरिका के लिए एक बड़ी चिंता है.

पाकिस्तान के परमाणु हथियार कभी भी आतंकी समूहों के हाथ लग सकते हैं. जिसके चलते पाकिस्तान से संबंध बनाकर रखना अमेरिका की मजबूरी है. अमेरिका में पाकिस्तान को लेकर बने नकारात्मक नजरिए के कारण ही संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को लेकर इमरान खान के भाषण को जहां मुस्लिम देशों में बड़ी मीडिया कवरेज मिली लेकिन अमेरिका में इसको महत्व नहीं दिया गया. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की आतंक समर्थक नीति रही है. जिसके चलते कश्मीर पर आज पाकिस्तानी दावा कमजोर हुआ है.

पाकिस्तान की आतंक समर्थक नीति के चलते कश्मीर पर आज पाकिस्तानी दावा कमजोर हुआ है.


पाकिस्तान को अमेरिकी मदद की जरूरत
जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका विरोधी हैं. पाकिस्तान का हालिया झुकाव चीन और तुर्की देशों की तरफ देखा जा रहा है. पाकिस्तान की चीन के साथ गहरे सुरक्षा और आर्थिक रिश्ते हैं. चीन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज दिया है. साथ ही 50 अरब डॉलर से भी ज्यादा की लागत वाली चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

अमेरिका के बजाय अब पाकिस्तान चीन की तरफ मुड़ गया है.


बावजूद इसके पाकिस्तान को अमेरिकी मदद की जरूरत है. चीन से पाकिस्तान को उतनी आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है, जितना कि उसको जरूरत है. मजबूरन पाकिस्तान को आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की तरफ रुख करना पड़ रहा है. वहीं बगैर अमेरिका की मदद के पाकिस्तान को यहां से लोन नहीं मिल सकता है.

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