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पीओके से चीन के लिए चली बस सेवा क्यों बढ़ा रही है भारत की चिंता

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Updated: November 13, 2018, 3:29 PM IST
पीओके से चीन के लिए चली बस सेवा क्यों बढ़ा रही है भारत की चिंता
पाकिस्तान से चीन बस सेवा का रुट

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में किस तरह बढ़ रही हैं चीन की गतिविधियां

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  • Last Updated: November 13, 2018, 3:29 PM IST
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पाकिस्तान और चीन के बीच बस सेवा शुरू हो गई है. ये बस सेवा लाहौर से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगिट से होते हुए चीन के सुदूर पश्चिम प्रांत जिनजियांग के काशगर तक जाएगी. भारत ने पीओके से शुरू होने वाली इस बस सेवा का विरोध किया था लेकिन इसके बाद भी चीन ने इस विरोध को खारिज कर दिया. ये बस सेवा ये बताती कि चीन किस तरह अपनी ताकत के नशे में अकड़ रहा है.
दरअसल 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच एक सीमा समझौता हुआ था. उसके अनुसार चीन ने पाक अधिकृत कश्मीर को एक विशेष हिस्सा माना था.

उसने भारत को भरोसा दिया था कि पाकिस्तान का उसका ये समझौता केवल पाकिस्तान के क्षेत्रों तक मान्य रहेगा. लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन लगातार पाकिस्तान की शह पर इस समझौते को धता बताकर पीओके में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है. इस क्षेत्र पर भारत हमेशा से अपना दावा करता आया है.

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कितने घंटे की बस यात्रा 
लाहौर से गिलगिट होते हुए शुरू हुई ये बस सेवा कारोकोरम मार्ग से गुजरेगी. ये बस सेवा कुल 30 घंटों की होगी. इसमें पांच स्टाप होंगे. 15 सीटर ये लग्जरी बस सेवा हफ्ते में चार दिन चलेगी. इसका प्रति यात्री टिकट 13 हजार रुपए है जबकि आने जाने का किराया 23 हजार होगा. पाकिस्तान के एक प्राइवेट बस आपरेटर ने ये बस चला रहा है.

पीओके में पाकिस्तान सैनिक के साथ चीनी सेना की जवान

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चीन ने बस सेवा के लिए तर्क दिया है कि इससे सीपीईसी प्रोजेक्ट को मदद मिल सकेगी और चीन-पाकिस्तान व्यापार को बढावा मिलेगा. दरअसल सीपीईसी प्रोजेक्ट के तहत चीन पाकिस्तान के साथ रेल और सड़क संपर्क बेहतर कर रहा है. लेकिन जानकार मानते हैं कि चीन जिस तरह पीओके में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, वो भारत के लिए चिंता का विषय है.

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क्यों है पाकिस्तान अधिकृत का महत्व
ये भी सही है कि चीन को अगर सड़क मार्ग से कुछ भी पाकिस्तान को पहुंचाना है तो उसका एकमात्र लिंक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ही होगा, जिसका क्षेत्र गिलगिट बाल्टीस्तान है. लिहाजा चीन - पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) यही से गुजर रहा है. इसमें चीन करीब 50 बिलियन डॉलर की रकम निवेश भी कर चुका है.
- चीन की मंशा सीपीईसी के जरिए बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक सड़क मार्ग विकसित कर अपने सामान को वहां तक पहुंचाना है.

पीओके में चीन द्वारा बनाया जा रहा कराट पॉवर प्रोजेक्ट


किस तरह पीओके में गतिविधि बढ़ा रहा है
- अपने प्रोजेक्ट्स की हिफाजत के बहाने यहां उसके सैनिकों का इजाफा हो रहा है. इस पूरे इलाके में कई हजार चीनी सैनिकों को मौजूदगी बताई जा रही है.
- इस एरिया के जरिए वो पॉलटिको डिप्लोमेसी का खेल खेल रहा है. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन ने इस क्षेत्र में अपना कोई भौगोलिक एजेंडा बनाया हुआ है.
- इस एरिया में उसने निवेश बढाया है

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- चीन के कई प्रोजेक्ट्स गिलगिट बाल्टीस्तान में हैं, इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉवर प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. झेलम नदी पर दो बिलियन डॉलर की लागत से एक चीनी कंपनी पॉवर प्रोजेक्ट बना रही है, जो 30 सालों तक चीनी कंपनी के नियंत्रण में रहेगा.


- सीपीईसी प्रोजेक्ट्स के तहत पाकसितान ने यहां अपनी तीन अतिरिक्त टुकड़ियां बढाई हैं .
- इस एरिया से चीन से आने वाली सीधी सड़क तो काराकोरम मार्ग के जरिए तो गुजरेगी ही साथ ही रेलवे लिंक भी स्थापित किया जा रहा है.

पीओके को चीन से जोड़ने वाला काराकोरम हाई-वे


काराकोरम मार्ग पर चीनी प्रोजेक्ट्स
वर्ष 2006 में चीन की सरकारी कंपनी एसेट ऑफ सुपरविजन एंड एडमिनिस्ट्रेटिव कमीशन और पाकिस्तान के द नेशनल हाईवे अथारिटी के बीच एक समझौता हुआ.
ये समझौता काराकोरम मार्ग को 30 मीटर और चौड़ा करने के लिए था. इससे इसकी आपरेशनल क्षमता तिगुनी हो जाएगी और हर मौसम में इस पर मिलिट्री और हैवी व्हीकल आवाजाही हो सकेगी.


- जुलाई 2010 में फिर पाकिस्तान के नेशनल हाईवे अथारिटी ने चाइना रोड एंड ब्रिज कारपोरेशन के साथ एक समझौता किया. ये काराकोरम हाईवे प्रोजेक्ट फेज-2 के लिए था. इसके तहत इसे चीन थाकोट ब्रिज से जोड़ने और संपर्क हाईवे जगलोट-स्काई रोड को चौड़ा करने की बात है.

पीओके तक चीन का रेल लिंक
एबोटाबाद (हवेलियन) से लेकर चीनी सीमा पर खुंजरेब दर्रे तक 411 मील का रेल संपर्क बनाया जा रहा है.

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First published: November 13, 2018, 2:19 PM IST
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