Pok में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा, छला महसूस करते हैं लोग

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: September 11, 2019, 10:38 PM IST
Pok में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा, छला महसूस करते हैं लोग
शनिवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आजादी की मांग को लेकर निकली बड़ी रैली

पाकिस्तान (Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) में असंतोष का माहौल करीब उसी तरह है, जिस तरह कभी पूर्वी पाकिस्तान में था, जहां पाकिस्तानी भेदभाव और सेनाओं के दमन की प्रतिक्रिया बांग्लादेश के तौर पर नए राष्ट्र के रूप में सामने आई.

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चार दिन पहले पाकिस्तान (Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) में बहुत बड़ी रैली निकली. रैली में मौजूद हजारों भीड़ पाकिस्तान से आजादी के नारे लगा रही थी. उनके हाथों में बैनर और पोस्टर्स थे, जो उनकी आजादी से संबंधित मांग को जाहिर कर रहे थे. रैली पर पुलिस ने जमकर बल प्रयोग किया. आंसू गैस के गोले छोड़े. काफी लोग घायल हो गए. 25 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की गई. पीओके में ऐसे विरोध प्रदर्शन लगातार होते रहते हैं. 70 साल पहले सीक्रेट "कराची एग्रीमेंट" के जरिए पाकिस्तान ने पीओके पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया था, जिसके बारे में लंबे समय तक यहां के लोगों को मालूम नहीं हो सका कि इस सीक्रेट एग्रीमेंट है क्या. इस करार के बाद से पाकिस्तान के भेदभाव भरे रवैये और दमन से यहां के लोग खुद को ठगा हुआ पाते हैं.



दरअसल, 1949 में पाकिस्तान सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कांफ्रेंस के प्रमुख चौधरी गुलाम अब्बास और पीओके के फाउंडर प्रेसीडेंट सरदार इब्राहिम खान के बीच एक करार हुआ. जो कई दशकों तक सीक्रेट ही रहा. हस्ताक्षर करने वालों के अलावा किसी को नहीं मालूम था कि इसमें क्या प्रावधान थे. इस करार के बाद पाकिस्तान का शिकंजा पीओके पर कसने लगा.

साथ ही पीओके की अवाम को महसूस होने लगा कि उनके साथ छल हुआ है. पाकिस्तान ने बड़ा धोखा किया है. बाद के बरसों में पाकिस्तान के रवैये के चलते पीओके के बड़े नेताओं को विदेश जाकर शरण लेनी पड़ी. ये नेता अब यूरोप या अमेरिका में रह रहे हैं. वहीं से अपने इलाके को पाकिस्तान से आजादी का आंदोलन चला रहे हैं.

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इसीलिए इस इलाके में नियमित तौर पर पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन होते रहते हैं. कई बार इन प्रदर्शनों में भारत समर्थक नारे लगते हैं और भारतीय झंडे भी लहराए जाते हैं. इन विरोध प्रदर्शनों में लगातार  पाकिस्तान से अलग होकर नया देश बनाने की मांग उठती है. हालांकि पाकिस्तान इसे पूरी ताकत से दबाता रहा है.

पीओके में अक्सर पाकिस्तान के खिलाफ रैलियां होती हैं. इसमें कई बार भारत के पक्ष में नारे और झंडे भी नजर आते हैं

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पीओके में मानवाधिकार और अन्य अधिकारों का हनन
पीओके में मानवाधिकार और अन्य अधिकारों का लगातार हनन होता रहा है. बड़े पैमाने पर पाकिस्तान का दमनचक्र भी चलता है. पिछले कुछ सालों में यहां पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा ज्यादा बढ़ा है. हालात बिल्कुल उस पूर्वी पाकिस्तान की तरह है, जो पाकिस्तान के दमन और भेदभाव का शिकार हुआ. फिर वहां गृह युद्ध जैसे हालात बने और फिर एक नए देश का जन्म हुआ, जिसे आज हम बांग्लादेश के रूप में जानते हैं.  पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लगातार बड़े पैमाने पर सेना का जमावड़ा बना रहता है.

खूबसूरत इलाका
पीओके का सबसे बड़ा इलाका गिलगिट बालटिस्तान है. ये पूरा इलाका बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है. हालांकि इसका फायदा इलाके के लोगों को नहीं मिल पाता. उलटे पाकिस्तान के साथ चीन भी इस इलाके में प्राकृतिक संसाधनों का विपुल तौर पर दोहन करने में लगा है. अक्सर यहां मोबाइल सर्विस और इंटरनेट बंद कर दिये जाते हैं.
प्रदर्शनकारी आमतौर पर जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के होते हैं, जो पीओके की प्रमुख सियासी पार्टी है. जेकेएलएफ के सीनियर नेता तौकीर गिलानी ने अल जजीरा से कहा- हमारी मुख्य मांग आजादी है.

पीओके का इलाका काफी खूबसूरत और उर्वरा इलाका है लेकिन इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन ना केवल पाकिस्तान बल्कि चीन भी कर रहा है


कभी शियाओं की बहुलता थी लेकिन अब डेमोग्राफी बदली
किसी जमाने में कश्मीर के इस इलाके में शियाओं की बहुलता थी, जो यहां के मूल वाशिंदे हैं. लेकिन पाकिस्तान ने चालाकी से बड़े पैमाने पर दूसरे इलाके से पाकिस्तानियों को लाकर यहां बसा दिया है. इससे शिया खफा रहते हैं. इसके चलते इलाके की डेमोग्राफी भी काफी हद तक बदल गई.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कहते हैं कि भारत ने कश्मीरियों पर नियंत्रण लगा रखा है लेकिन हकीकत ये है कि पीओके में पाकिस्तान का दबाव और दमन बहुत बड़े पैमाने पर हैं. इस साल के शुरू में भी जब जेकेएलफ ने पाकिस्तानी सेना को यहां हटाने के लिए अभियान छेड़ा तो बड़े पैमाने पर उनकी गिरफ्तारियां हुईं.

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विलय पत्र के अनुसार ये भारत का हिस्सा 
अगर तथ्यों की बात की जाए तो 22 अक्टूबर 1947 को जब पाकिस्तान सेना के समर्थन से कबायलियों ने कश्मीर पर हमला किया था, तब जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरिसिंह ने अपने राज्य के भारत में विलय का फैसला किया. इसके बाद भारतीय फौजें वहां पहुंचीं और उन्होंने कबायलियों के पैर उखाड़ दिये. तब कश्मीर की सबसे बड़ी सियासी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस ने भी कश्मीर के भारत में विलय का  पुरजोर समर्थन किया.
उस समय कबायली कश्मीर के एक बड़े इलाके पर काबिज रहे, जिसमें गिलगिट और बालटिस्तान शामिल थे, तब से यही स्थिति बनी हुई है. कश्मीर का कुछ इलाका पाकिस्तान के नियंत्रण में है जबकि विलय पत्र पर महाराजा के हस्ताक्षर के बाद ये पूरा राज्य भारत के अधीन होना चाहिए था.

गिलगित में भी पाकिस्तान से अलग होने की मांग को लेकर अक्सर बड़े प्रदर्शन होते रहते हैं


हर साल 22 अक्टूबर को पाकिस्तान के विरोध में प्रदर्शन और रैलियां 
हर साल 22 अक्टूबर को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के कब्जे के विरोध में बड़े पैमाने पर रैलियां निकलती हैं, जनसभाएं होती हैं और विरोध प्रदर्शन होते हैं. ये प्रदर्शन मुजफ्फराबाद, रावलकोट, कोठ, गिलगिट और हजीरा में होते हैं. शायद ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कोई जगह ऐसी बचती हो, जहां कश्मीर में पाकिस्तानी कब्जे का विरोध नहीं होता हो. तब बड़े पैमाने पर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे भी लगाए जाते हैं.

पीओके के नेताओं को विदेश भागना पड़ा
वैसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बहुत से बड़े नेता पाकिस्तान के दमन के चलते यहां से भागकर विदेश चले गए. वो वहां से अपना अभियान चलाते रहते हैं. हाल के बरसों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चीन ने कॉरीडोर बनाने की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शुरू किया है. इस इलाके में कई प्रोजेक्ट बना रहा है. साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित से हाल के बरसों में चीन तक के लिए कई लेन की शानदार चौड़ी सड़क तैयार हो चुकी है.
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जहां कहीं चीन के प्रोजेक्ट चल रहे हैं, वहां चाइनीज सेना उसकी सुरक्षा में तैनात रहती है. लोगों को शक है कि ये चीनी सेना यहां से वापस जाएगी. लिहाजा कहा जा सकता है कि पाकिस्तान ने बहुत चालाकी से इस इलाके में फायदे के लिए चीन की घुसपैठ करा दी है.

मीडिया को यहां से दूर रखा जाता है
यहां आमतौर पर मीडिया की पहुंच नहीं है. ना ही इंटरनेशनल मीडिया को इस इलाके में आने दिया जाता है. वैसे ये वो इलाका भी है, जहां पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर आतंकवादियों के कैंप बना रखे थे. बालाकोट इसी इलाके में था, जहां इस साल के शुरू में भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक कर बड़ी कार्रवाई की थी.

भारत को मिल सकता है असंतोष का फायदा
फिलहाल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में असंतोष की जो स्थिति है, उसका फायदा भारत को मिल सकता है. अगर कश्मीर में धारा 370 खत्म किए जाने के बाद नए उद्योग धंधे शुरू होते हैं और उनसे रोजगार के अवसर बढते हैं तो निश्चित तौर पर पीओके में भी पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष और गुस्सा भी बढ़ेगा.  भारत के पक्ष में एक नया माहौल तैयार हो सकता है. हालांकि भारत में लगातार मांग होती रही है कि सैन्य कार्रवाई करके इस इलाके को वापस कश्मीर में मिलाया जाए. ये कब तक होगा, ये तो पता नहीं लेकिन भारत को रणनीति तौर पर यहां अपना दखल और मौजूदगी दोनों बढाने का समय जरूर आ गया है.

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First published: September 11, 2019, 9:08 PM IST
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