बेशकीमती रत्न मिलने के बाद भी क्यों नहीं है इंटरनेशनल मार्केट में पाकिस्तान की पूछ?

बेशकीमती रत्न मिलने के बाद भी क्यों नहीं है इंटरनेशनल मार्केट में पाकिस्तान की पूछ?
यहां हर तरह के बहुमूल्य रत्नों की खदानें हैं लेकिन तब भी इंटरनेशनल मार्केट में इसका उतना नाम नहीं (Photo-pixabay)

कीमती पत्थरों (precious gemstone) के मामले में पाकिस्तान (Pakistan) दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा देश हैं. इसके बाद भी इंटरनेशनल मार्केट में इसका उतना नाम नहीं. आखिर क्या है इसकी वजह?

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फिलहाल कोरोना की वजह से बुरी तरह से डगमगाए पाकिस्तान में कई ऐसी चीजें हैं, जो अब तक विदेशी बाजार में नहीं आई हैं. मिसाल के तौर पर यहां पर ढेर सारे बहुमूल्य रत्न होते हैं, जो दूसरे कई देशों से ज्यादा उम्दा क्वालिटी के हैं. यहां उत्तर-पश्चिम के खैबरपख्तूनख्वा, बलोचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में सबसे ज्यादा रत्न पाए जाते हैं. ये जानकारी खुद पाकिस्तान की मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल रिर्सोसेज ने दी थी. पाकिस्तान के रूबी, पन्ना और नीलम को दुनिया के सबसे उम्दा रत्नों में गिना जाता है. इन तमाम खूबियों के बाद भी पाकिस्तान में कीमती पत्थरों का व्यापार बड़े बाजार में अपनी पहुंच नहीं बना पा रहा.

साल 1979 में पाकिस्तान में कीमती रत्नों को बढ़ावा देने के लिए यहां जेमस्टोन कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान बना. हालांकि तकरीबन 18 ही सालों के भीतर ये बंद हो गया. अब इसमें कई संगठन काम कर रहे हैं. इनमें पाकिस्तान रत्न एंड ज्वैलरी डेवलपमेंट कंपनी (PGJDC) और ऑल पाकिस्तान कमर्शियल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ रफ एंड अनपॉलिश्ड प्रिशियस एंड सेमी प्रिशियस स्टोन्स (APCEA) दो बड़े नाम हैं.

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हर साल पेशावर में रत्नों की बड़ी प्रदर्शनी लगती है. ये सिलसिला साल 1994 से ही चला आ रहा है. लेकिन इस शो में न तो इंटरनेशनल खरीददारों को आमंत्रित किया जाता है और न ही इसका इस तरह से विज्ञापन होता है कि ये देश के ही रत्न व्यापारियों तक ठीक से पहुंचे. यही वजह है कि अब तक इस बारे में कम ही लोग जानते हैं.



कराची का दक्षिणी बंदरगाह पहले पाकिस्तान में रत्नों का सबसे बड़ा बाजार था (Photo-pixabay)


कराची का दक्षिणी बंदरगाह पहले पाकिस्तान में रत्नों का सबसे बड़ा बाजार था. बाद में अस्सी के दशक में अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के बाद कराची का महत्व घटा और इसकी जगह पेशावर ने ले ली. अफगानिस्तान और पाकिस्तान एक-दूसरे से 2400 किलोमीटर के लगभग बॉर्डर शेयर करते हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान के पेशावर में ही अफगानिस्तान के रत्न भी बिकने के लिए आते हैं. यानी पाकिस्तान में रत्नों का भंडार और बढ़ गया है. रत्नों की पहचान और उनकी शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए पाकिस्तान सरकार के देश के कई राज्यों में जेम आइडेंटिफिकेशन लैब बनवाए. इनमें लाहौर, कराची, पेशावर, क्वेटा, गिलगित, मुज़फ्फराबाद और सरगोधा शहर मुख्य हैं. लाहौर, कराची और पेशावर में निजी लैब भी हैं, जहां रत्नों की शुद्दता और कांट-छांट होती है.

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पाकिस्तान के हिंदुकुश, हिमालय और काराकोरम में दूसरे खनिजों के साथ रत्न भी पाए जाते हैं. खनन विशेषज्ञों का मानना है कि स्वात के पास 70 मिलियन कैरट से भी ज्यादा पन्ना रत्न का भंडार है. इसी तरह से खैबरपख्तूनख्वा के दूसरे बड़े शहर मरदान में बहुमूल्य गुलाबी पुखराज का भंडार है. कोहिस्तान में 10 मिलियन कैरट के आसपास पेरिडॉट रत्न है, जिसे मनी-स्टोन भी कहा जाता है.

पाकिस्तान के स्टेट बैंक का मानना है कि लोग रत्नों के सेक्टर पर पैसे लगाना कम पसंद करते हैं (Photo-pixabay)


स्वात के पुखराज को दुनिया के सबसे शुद्ध और कीमती रत्नों में गिना जाता है. इसके कुछ ग्राम की कीमत करोड़ तक चली जाती है. इसके बाद भी रत्नों के इंटरनेशनल मार्केट में पाकिस्तान के पुखराज की उतनी मांग नहीं, जितनी श्रीलंका और तंजानिया के पत्थरों की है. इसकी कई वजहें हैं. जैसे यहां रत्नों को तराशने के मामले में लोग पुरानी तकनीकों पर निर्भर हैं. ये वक्त भी ज्यादा लेता है और रिजल्ट भी उतने अच्छे नहीं होते. शिन्हुआ वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक 50 प्रतिशत से ज्यादा जेम स्टोन खराब हो जाते हैं. खुद पाकिस्तान के स्टेट बैंक का मानना है कि लोग रत्नों के सेक्टर पर पैसे लगाना कम पसंद करते हैं, जबकि कोशिश करें तो इससे अच्छी रिवेन्यू आ सकती है.

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हाल ही में ट्रेड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि रत्नों और आभूषणों के एक्सपोर्ट से पाकिस्तान को सालाना 3.7 बिलियन डॉलर तक मिलता है. लोकल रत्न पारखियों के अनुसार दूसरे एशियन देशों की तुलना में ये काफी कम है, जबकि पाकिस्तान में रत्नों का भंडार है. जैसे पाकिस्तान का सबसे बड़ा और अकेला मार्केट पेशावर है. यहां रत्न बेचने वाले पुरानी तकनीकों से पत्थर काटते हैं और उसे प्रदर्शनी में रखते हैं. बेढंगे शेप में होने की वजह से उनपर इंटरनेशनल खरीददारों की नजर नहीं पड़ती. यही वजह है कि पाकिस्तान के रत्न विक्रेता कच्चा माल ही दूसरे देशों को बेचने लगे हैं. दूसरे देश उन्हें खरीदकर और तराशकर भारी कीमत पर यूरोप और बाकी जगहों पर बेचते हैं.
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