चीन की देखादेखी PAK ने भी बनाए डिटेंशन कैंप, जानिए, क्या चलता है भीतर

पाकिस्तान में डी-रेडिकलाइजेशन कैंप के नाम पर बलूचों को यातनाएं दी जा रही हैं

पाकिस्तान में डी-रेडिकलाइजेशन कैंप के नाम पर बलूचों को यातनाएं दी जा रही हैं

पाकिस्तान सरकार कथित तौर पर कट्टर बलूच लोगों में नरमी लाने के लिए ये डिटेंशन कैंप (Pakistan running detention camps in Baluchistan) चला रही है. इसे उन्होंने डी-रेडिकलाइजेशन कैंप नाम दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 10:11 PM IST
  • Share this:
चीन में धर्म को लेकर प्रताड़ना नई बात नहीं. उइगर मुसलमानों का मुद्दा लगातार सुर्खियों में है कि कैसे वहां लाखों मुस्लिम डिटेंशन कैंपों में बंद (Uighur Muslims in China detention camps) हैं. अब चीन के दोस्त पाकिस्तान की भी करतूत सामने आई है. वहां बलूचिस्तान की आजादी मांगने वालों को प्रताड़नाएं दी जा रही हैं. यहां तक कि चीन की ही तर्ज पर पाकिस्तान में बलूचों के लिए डिटेंशन कैंप (Pakistan running detention camps in Baluchistan) बने हुए हैं. यहां उनका ब्रेन वॉश करने के लिए भयंकर टॉर्चर किया जाता है. जानिए, क्या हैं पाकिस्तान के डिटेंशन कैपों के हालात.

क्या है पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच मुद्दा
पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है बलूचिस्तान, जहां दशकों से पाकिस्तान से आजादी की मांग उठती रही है. असल में बलूच लोगों का मानना है कि भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान ने सिंध और पंजाब प्रातों का तो विकास किया लेकिन बलूचिस्तान पर कभी ध्यान नहीं दिया. नतीजा ये रहा कि बलूच शिक्षा, रोजगार और हेल्थ तक में काफी पीछे रहे. यही देखते हुए सत्तर के दशक में बलूच आजादी की मांग काफी तेज हो गई. इसे दबाने के लिए पाकिस्तान की तत्कालीन भुट्टो सरकार ने आक्रामक तरीका अपनाया. पाक सेना वहां आम बलूच नागरिकों को भी मारने लगी.

पाकिस्तान ने सिंध और पंजाब प्रातों का तो विकास किया लेकिन बलूचिस्तान पर कभी ध्यान नहीं दिया

माना जाता है कि सेना और बलूच लड़ाकों के बीच हुए संघर्ष में साल 1973 में लगभग 8 हजार बलूच नागरिक-लड़ाकों की मौत हो गई थी. वहीं पाकिस्तान के करीब 500 सैनिक मारे गए. इसके बाद मामला खुले तौर पर तो ठंडा पड़ गया लेकिन बलूच लोगों के भीतर गुस्सा भड़कता गया.



ये भी पढ़ें: क्या है भारत और जापान के बीच वो समझौता, जो China पर ढाएगा कहर

Youtube Video


बलूच लड़ाके अब क्या कर रहे हैं
असल में बलूचिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है लेकिन इसका इस्तेमाल पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों के लिए हो रहा है और खुद बलूचिस्तान उपेक्षा का शिकार रहा. अब आजादी के लिए वहां गुरिल्ला हमले का रास्ता अपनाया जा रहा है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) बलोच अलगाववादियों का सबसे बड़ा संगठन है. ये लगातार पाक पर बलूचिस्तान को अलग करने की मांग करता आया है. इसके अलावा कई और भी अलगाववादी संगठन हैं जो बलूच आजादी के लिए लोगों को एकजुट कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: जंग छिड़ जाए तो उत्तर कोरिया कितना खतरनाक हो सकता है?   

यही देखकर घबराया पाकिस्तान अब अलग ही तरीका अपना रहा है. वो बलूच नागरिकों को डिटेंशन कैंपों में रखकर उन्हें पाकिस्तान के लिए वफादार बनाने की मुहिम चला चुका है. संडे गार्डियन की एक रिपोर्ट में एक अलगाववादी के हवाले से बताया गया कि ये डिटेंशन कैंप लगभग 4 सालों से चलाए जा रहे हैं.

सत्तर के दशक से बलूचिस्तान में आजादी की मांग तेज हो गई


चल रहे डिटेंशन कैंप
बलूचिस्तान के ही नुक्षी जिले में ऐसे दो कैंप होने की बात सामने आई. जी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा ने इन डिटेंशन कैंपों की योजना तैयार की थी. इसके बाद बावजा की देखरेख में ही ये कैंप तैयार हुए. बता दें कि ये अधिकारी वही है, जिनका नाम हाल ही में करप्शन के मामले में उछला.

ये भी पढ़ें: आम है रूस में विरोधियों को जहर देना, 120 विपक्षियों को हुई मारने की कोशिश      

क्या होता है इन कैंपों के भीतर
इन डिटेंशन कैंपों में बलूच लड़ाके ही नहीं, बल्कि आम लोग भी रखे जाते हैं, जो बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करते हैं. वहां उन्हें कम से कम तीन महीने तक रखा जाता है और ब्रेन वॉश प्रोग्राम चलता है. पाकिस्तान के धार्मिक संगठन के नेता बलूचों को पाकिस्तान के लिए वफादारी का पाठ सिखाते हैं. बात न मानने पर धार्मिक और सांस्कृतिक सबक की तरह दिखने वाले ये पाठ अलग रूप ले लेते हैं और मारपीट और दूसरी तरह की यातनाएं दी जाने लगती हैं.

पाकिस्तानी सेना और बलूच लड़ाकों के बीच लगातार संघर्ष होता रहता है


पाक का क्या है कहना
सैटेलाइट इमेज में ऐसे डिटेंशन कैंपों की तस्वीरें भी आ चुकी हैं. तब पाक सरकार ने पहली बार मुंह खोलते हुए इन डिटेंशन कैंपों के बारे में कहा कि ये असल में ‘de-radicalisation camps’ हैं. सरकार के मुताबिक इन कैंपों में भटके हुए लोगों को शिक्षा देकर सरकार के साथ मिलकर चलने की ट्रेनिंग मिलती है. कुल मिलाकर पाकिस्तान की सरकार यहां किसी भी तरह के मानवाधिकार उल्लंघन से इनकार करती है. हालांकि इन कैंपों में किसी बाहरी व्यक्ति या मीडिया को भी जाने की इजाजत नहीं.

ये भी पढ़ें: कौन से देश अब भी Corona वैक्सीन का फॉर्मूला चुराने में लगे हैं? 

बलूच आजादी की मांग करने वाले नेता, जो दूसरे देशों में बस गए हैं, वे इन कैंपों की बदहाली और भयंकर हिंसा की बात करते रहे हैं. इंटरनेशनल मीडिया में इसकी चर्चा हाल में होने लगी है. मिसाल के तौर पर संडे गार्डियन की खबर के मुताबिक इन कैपों में हजारों विद्रोहियों और आम नागरिकों को कैद कर रखा गया है और बदलाव के नाम पर उन्हें काफी यातना दी जाती है. लोगों को घरों से उठाकर कैंप में डाल दिया जाता है. अगर कोई इसे रिपोर्ट करना चाहे तो वो भी गायब हो जाता है. खुद Reporters Without Borders ने साल 2017 में कुबूला था कि पाकिस्तान में इन कैंपों को रिपोर्ट करने की सख्त मनाही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज