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पाकिस्तान में आने वाला है बहुत बड़ा सियासी भूचाल

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 9:14 PM IST
पाकिस्तान में आने वाला है बहुत बड़ा सियासी भूचाल
पाकिस्‍तान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बड़ा सियासी भूचाल आ सकता है

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमर जावेद बाजवा के तीन साल के विस्तार को रद्द करके ऐसा धमाका किया है कि लग रहा है कि वहां बहुत सियासी भूचाल आने वाला है. जिसका असर इमरान की गद्दी पर ही पड़ेगा

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  • Last Updated: November 26, 2019, 9:14 PM IST
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पाकिस्तान (Pakistan) के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले ने इमरान खान (Imran Khan) की नींद उड़ा दी है. उन्हें प्रधानमंत्री की गद्दी हिलती हुई महसूस होने लगी है. बेशक अदालती आदेश के बाद वो खुद को चौराहे पर ही पा रहे हैं. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा ने आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar javed bajwa) के तीन साल के विस्तार को रोक दिया है.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर अपने साहसिक फैसलों के लिए जानी जाती है. उसने फैसले में दो टूक कहा है कि आर्मी चीफ जनरल बाजवा को जिस तरह इमरान खान सरकार ने तीन साल का विस्तार दिया है. वो ना केवल गलत बल्कि कानूनों का उल्लंघन भी. लिहाजा इस लागू नहीं किया जा सकता. कोर्ट के रुख से लग रहा है कि अब जनरल बाजवा को विस्तार मिल पाना मुश्किल होगा.

जब बीते अगस्त में इमरान खान सरकार ने जनरल बाजवा को तीन साल का एक साथ विस्तार दिया था तो इसकी प्रतिक्रिया विपक्षी दलों के बीच काफी तीखी हुई थी. ये भी कहा गया था कि इमरान ऐसा करके सेना के ढांचे और सेनाओं के अफसरों के प्रोमोशन को प्रभावित कर रहे हैं. ये भी माना गया कि उनके इस फैसले से सेना के उच्चाधिकारी आमतौर पर खुश नहीं थे.

बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. इससे तीन दिन पहले आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इमरान सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि अब वो क्या करें. जनरल बाजवा के बारे में माना जाता है कि इमरान की ताजपोशी में उनकी भूमिका खास रही थी. साथ ही वो लगातार इमरान सरकार का बचाव भी कर रहे थे.

अगर बाजवा को विस्तार नहीं मिल सका तो नया सेना प्रमुख इमरान के लिए शायद ही इतना मददगार साबित हो. अब तक तो इमरान ये माने हुए थे कि बाजवा को तीन साल का विस्तार देने से उनका कार्यकाल भी आराम से निकल जाएगा. लेकिन अब नए हालात बन सकते हैं. पाकिस्तान की सियासत में बड़ा भूचाल भी आ सकता है.



बदल सकती है पाकिस्तान की राजनीति
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इस फैसले ने पाकिस्तान की पूरी राजनीति को ही बदल दिया. विपक्ष को नई जान मिल गई लगती है. इमरान के खिलाफ 31 मार्च को निकले फ्रीडम मार्च के बाद यूं भी इमरान की नींद उड़ी हुई है. इस मोर्चे में बड़े पैमाने पर जनता ने हिस्सेदारी की. इमरान की तहरीक ए इंसाफ पार्टी के अलावा सभी दलों ने इस रैली को अपना समर्थन भी दिया था.

आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान का बुरा हाल है. महंगाई लगातार बढ़ रही है. व्यापारियों से लेकर आम लोगों तक में इमरान सरकार के प्रदर्शन पर नाराजगी है.

किस तरह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा
अब जान लेते हैं कि आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी चीफ के एक्सटेंशन मामले में इतना कड़ा फैसला दिया. ये तो जगजाहिर है कि पाकिस्तान की असली ताकत सरकार से ज्यादा सेना के पास है.

ज्यूरिस्ट फाउंडेशन ने कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में इमरान सरकार के फैसले के खिलाफ अपील की थी. ये फाउंडेशन देश का जाना-माना ऐसा संगठन है, जो तमाम मुद्दे उठाने में आगे रहता है. अक्सर वो कई मामलों में कोर्ट में भी पहुंचता रहा है.

जब इस फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी चीफ के विस्तार मामले में तमाम गड़बड़ियों की ओर ध्यान दिलाते हुए अपील की तो कोर्ट ने फाउंडेशन के आवेदन को खारिज कर दिया लेकिन फिर खुद इस पर सुओ मोतो लेते हुए सारे कागज तलब कर लिये.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी चीफ के विस्तार को लेकर जो फैसला दिया है, वो इमरान सरकार की चूलें हिला सकता है


नोटिफिकेशन में गड़बड़झाला
दस्तावेजों से पता चला कि आर्मी चीफ को तीन साल के विस्तार का नोटिफिकेशन 19 अगस्त को जारी किया गया जबकि खुद प्रधानमंत्री ने इस पर 22 अगस्त को साइन किये.  सरकार के वकील का तर्क था कि प्रधानमंत्री ने नोटिफिकेशन पर तब साइन किये जबकि कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी.

हालांकि हकीकत ये भी है कि पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट में मौजूद 25 सदस्यों में केवल 11 ने ही इस पर मंजूरी देते हुए दस्तखत किया. बाकी 14 ने तो इस पर साइन ही नहीं किया.

सुप्रीमकोर्ट ने इसे भी गंभीर माना. 14 सदस्यों द्वारा नोटिफिकेशन पर साइन नहीं करने पर सवाल उठाए. हालांकि इसका मतलब ये भी है कि इमरान की सरकार में खुद अंदरूनी तौर पर मतभेद की स्थिति है तभी कैबिनेट के आधे सदस्यों ने भी इसमें दस्तखत नहीं किए.

सुप्रीम कोर्ट ने जनरल बाजवा को तीन साल के विस्तार देने के इमरान सरकार के फैसले को कानूनी तौर पर भी सही नहीं माना है


कोर्ट ने सवाल उठाया 
कोर्ट ने ये भी कहा है कि पाकिस्तान के संविधान में किसी सैन्य अधिकारी के रिटायरमेंट के बाद सेना में उसके फिर अपाइंटमेंट या फिर एक्सटेंशन की स्थिति स्पष्टता नहीं है. ना ही किसी को लंबे समय के लिए इस तरह विस्तार दिया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अटार्नी जनरल रिटायर हो रहे आर्मी चीफ को विस्तार देने की कोई वाजिब कानून वजह भी नहीं पेश कर पाए.

कुछ मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला अगर इमरान सरकार के नोटिफिकेशन के खिलाफ गया तो यकीन इमरान चारों ओर से खुद घिरा पाएंगे. विपक्ष भी उन्हें घेरेगा. सेना कोई रियायत नहीं करने वाली और जनता तो नाराज बैठी ही है.

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First published: November 26, 2019, 9:04 PM IST
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