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भारत से चिट्ठियां आने-जाने पर पाकिस्तान ने क्यों लगा दी रोक

News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 10:23 PM IST
भारत से चिट्ठियां आने-जाने पर पाकिस्तान ने क्यों लगा दी रोक
पाकिस्तान ने बंद कर दिया है भारत से डाक सेवा को स्वीकार करना

बंटवारे और तीन लड़ाइयों के बाद भी भारत और पाकिस्तान के बीच डाक सेवा कभी बंद नहीं हुई लेकिन अबकी बार पाकिस्तान ने इसे बंद करने का काम किया है, जिसका असर दोनों देशों में रहने वाले लोगों के रिश्तों-नातों पर पड़ रहा है

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  • Last Updated: October 22, 2019, 10:23 PM IST
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जब भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) का बंटवारा हो रहा था. जगह-जगह दंगे और कोहराम की हालत थी, तब दोनों देशों के बीच डाक सेवा जारी थी. दोनों पड़ोसियों के बीच हुए तीन युद्धों के दौरान भी चिट्ठियों का आना- जाना कभी रुका नहीं. बहुत से रिश्ते-नाते अब भी सीमा के दोनों ओर बसते हैं. ये चिट्ठियां ही हैं, जो उन्हें कभी मुस्कराने तो कभी गम बांटने का मौका देती हैं. बेशक जमाना इंटरनेट और मोबाइल का आ गया, लेकिन दोनों देशों में पत्रों का आदान-प्रदान कम नहीं हुआ. लेकिन ये पहली बार हुआ कि जब पाकिस्तान ने खीझ में आकर चिट्ठियों और पोस्ट पर रोक लगा दी है.

कश्मीर (Kashmir) मामले पर जब केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 (Article 370) में संशोधन किया है, तब से पाकिस्तान लगातार किसी ना किसी तरीके से खीझ उतारने में लगा है. दोनों देशों के बीच व्यापार पर रोक लगी. फिर पाकिस्तान ने बस और ट्रेन सेवा रोक दी. अब पाक हुक्मरानों की खीझ चिट्ठी पत्री पर उतरी है.

27 दिसंबर के बाद से पाकिस्तान से ना तो कोई पोस्ट भारत आ रही है और ना ही भारत से आने वाली कोई पोस्ट स्वीकार की जा रही है. पाकिस्तान के इस कदम के बाद लोगों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं. केवल मुस्लिम ही नहीं बल्कि सिखों और हिंदुओं के भी कई परिचित पाकिस्तान में रहते हैं. जो शादियों, त्योहारों और अपने घरेलू प्रोग्राम्स में डाक के जरिए कार्ड्स आदि वहां भेजते थे, वो सब इन दिनों रुका हुआ है.
ना तो पाकिस्तान ने इसकी कोई वजह बताई है और ना ही इस बारे में कोई जानकारी ही दी है. बगैर किसी सूचना या नोटिस के ही उसने ये कदम उठा लिया है.



क्या हैं अंतरराष्ट्रीय प्रावधान
अंतरराष्ट्रीय डाक यूनियन के प्रावधान कहते हैं कि चिट्ठियों के आने-जाने पर बेवजह रोक नहीं लगाई जा सकती है. पत्र तो तब भी आते रहते थे जब दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था. तमाम उदाहरण हैं कि जब जापान और जर्मनी से अमेरिका, ब्रिटेन और गठबंधन सेना में साथ निभा रहे देशों के लोग पत्रों का आदान-प्रदान कर लेते थे.
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केंद्रीय संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इस बात की पुष्टि की. एक प्रेस कांफ्रेस में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले दो महीनों से भारत से गई हुईं चिट्ठियों को लेना बंद किया हुआ है और ऐसा उसने भारत को बिना किसी सूचना या जानकारी दिए किया. हो सकता है कि भारत इसके खिलाफ कोई कदम उठाए.

हालांकि पाकिस्तान के अखबार "द न्यूज" ने अपने देश में पोस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों से बात की. जिन्होंने इस पर गोलमोल जवाब दिया. साथ ही पूरा दोष भारत पर मढ़ दिया.

सामान्य दिनों में भी घुमावदार और लंबा रूट
वैसे आपको बता दें कि सामान्य दिनों में भी भारत और पाकिस्तान के बीच पोस्ट का रूट कभी लंबा और घुमावदार होता है, क्योंकि भारत से सीधे कोई पत्र, पार्सल या कूरियर ना पाकिस्तान जाता है और ना ही वहां से यहां आता है. डाक सेवा के लिए सऊदी अरब की राजधानी रियाद या फिर दुबई का रूट लिया जाता है. यानी पोस्ट पहले रियाद पहुंचती है और फिर वहां से पाकिस्तान. इसी तरह वो भारत भी आती हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक पोस्ट सेवा का रूट काफी घुमावदार और लंबा रहा है


हालांकि इस स्थिति में भारत के लोग उन विदेशी पोस्ट ऑफिस की सेवाएं ले रहे हैं जो दिल्ली और मुंबई में हैं. भारत में कुल 28 विदेशी पोस्ट ऑफिस हैं जिनमें से सिर्फ दो में पाकिस्तान जानी वाली और पाकिस्तान से आने वाली चिट्ठियां ली जा सकती हैं. सबसे ज्यादा डाक जो भारत में पाकिस्तान भेजी जाती है, वो पंजाब और जम्मू-कश्मीर से होती हैं.

क्या भेजा जाता है दोनों देशों के बीच डाक से
जानकार बताते हैं कि पाकिस्तान भेजी जाने वाली चिट्ठियों में ज्यादातर शैक्षिक और साहित्यिक सामग्री होती है. लेकिन शादियों और शुभकामों के आमंत्रण पत्र भी पोस्ट के जरिए भेजे जाते हैं. इससे भी बड़ी जरूरत तब पड़ती है, जब दोनों देशों के लोगों को वीजा लेना हो, तब स्पांसर पत्र या रिश्तेदार या परिचितों से अनुमति पत्र की जरूरत होती है.

वीजा अधिकारी इन पत्रों को मूल दस्तावेज के रूप में ही अमूमन स्वीकार करते हैं. हालांकि अब ईमेल के जरिए बहुत सा संवाद हो जाता है लेकिन जरूरी कागजात के आदान-प्रदान के लिए डाक सेवा का ही सहारा लेना होता है.

कई बार इसका इस्तेमाल और ज्यादा जरूरी काम में होता है. मसलन अगर किसी भारतीय मछुआरे को पाकिस्तान ने पकड़ लिया तो उसे भारत में अपने वकील को पॉवर ऑफ अटार्नी भेजने की जरूरत होती है, इसे डाक से ही भेजा जा सकता है. कूरियर से भी नहीं. साथ ही अदालतें ईमेल से भेजे गए कागजात स्वीकार नहीं करतीं.

दोनों देशों के बीच पोस्टल सर्विसेज महंगी भी हैं


डाक शुल्क भी ज्यादा
वैसे भारत से पाकिस्तान भेजी जाने वाली डाक सेवा पर लगने वाला शुल्क भी कुछ ज्यादा ही है. पाकिस्तान भेजे जाने वाली हर 250 ग्राम वजन की डाक के लिए 810 रुपये शुल्क लेता है.

दिल्ली में रहने वाले नजर हुसैन की बहन कराची में रहती हैं. दोनों के भारत या पाकिस्तान जाने की सूरत में उन्हें वीजा के लिए प्रायोजक पत्र उपलब्ध कराना होता है. अगर ईमेल से इन्हें मंगाकर वीजा अधिकारियों को दिया जाए तो वो इस पर विचार ही नहीं करते बल्कि मूल दस्तावेज ही मांगते हैं.

हालांकि दोनों देशों के लोग डाक सेवा बंद होने के बाद प्राइवेट कूरियर का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन ये बहुत मंहगे हैं और प्राइवेट कूरियर सर्विस वाले इन्हें दुबई और कुवैत के रास्ते लेकर जाते हैं.

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First published: October 22, 2019, 9:55 PM IST
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